छत्तीसगढ़ी कहिनी - समय के चकरी फेर घुमिस

आपकी भाषा, आपकी बात

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मुखिया जी के बहुरिया गांव के लइका मन ल बिना पइसा लेय पढ़ाय. कुछ साल बाद गांव के नाम अंधियारटोला ले बदल के अंजोरटोला होगे. लइका पढ़ई म टंच होगे, यहू समे के चकरी आय के गांव के कचरा सोना होगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 6:08 PM IST
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अंधियारटोला गांव म एक झन जुन्नेट मुखिया राहय. मुखिया जी रोज अपन घर के आघू बाजवट म बइठे. सड़क के दुनो पार डेरी-जवनी ओखर गांव हे. मुखिया जी के बड़े-बड़े सुग्घर घर-दुआर, बारी-बखरी, बड़े-बड़े कोठा, कोरी-दु कोरी गाय-गरू, बइला-भंइसा, घरू बगीचा म किसम-किसम के फलदार पेड़ राहय. भरपूर हरियाली. बस्ती के लइका मन मौसमी फल जब-तब परदा कूद के फल चोरा लेय. रोकना-टोकना चलते रहय. फेर उनकर उपर कोनो असर नइ होय.

मुखिया जी के माथा म चन्दन-चोवा बरोबर लगे राहय. जमे-जुमाय खेती किसानी रिहिस. गांव म दबदबा दिखे. तइहे के मनखे मन जेला माने तेला खूब मानें. पथरा म चन्दन-बंदन लगा के कोनो तिर-तखार-म मड़ा देंय त गांव के मन ओमा भगवान के वास जान के नरियर फोरें, मुखिया जी के उमर इही कोई साठ-सत्तर बरस रिहिस होही. हर रद्दा रेंगइया मुखिया जी के चरन छुए. नाव रिहिस जमुनादास. ‘खुश-रहो’ के परमानेंट आसीस सब ल देय. उनकर घरू कहिनी सुने, सुनाय, हितैषी बरोबर सुझाव देय. ओखरदु बेटा एक नोंनी रहिस. तीनों के बिहाव होगे राहय. बड़े बेटा रामशंकर, छोटे रमाशंकर अउसबले छोटे बेटी कल्पना. छोटे बेटा वकील होगे. बड़े बेटा बड़े सरकारी ओहदा म रिहिस.

गांव के बइठका म मुखिया जी के विचार अंतिम माने जतिस. हलांकि ओहा पांचे बरस मुखिया रिहिस. बाद म घलो ओखर प्रभाव बराबर बने रिहिस. नियाव-अनियाव के बीच ओखर बिरोधी पनपे लगिन. धीरे-धीरे कोनो ओखर बात ला सुने, कोनो अनसुनी कर देय. मुखियाजी खुद निरास होवत गिस. कखरो बुरा करे के चाह ओखर मन म कभू नइ अइस फेर समे एक सरीख कहां होथे. मनखे घलो बदलत गिन. लइका जवान होगे, जवान बुढवा. बस्ती म घला बदलाव आगे. मुखिया के छोटे बेटा गांव म रुचि लेय.

जुन्ना पीढी के खींचे डांड़ ल नवा पीढ़ी मेटा देथे. नवा पीढ़ी ल जय जोहार नइ सुहइस. अउ कोनो न कोनो बहाना उन जुन्नेट मुखिया जी के सुझाय निर्णय ल उलट-पलट के सांस लेवंय. गांव म प्रथा रिहिस के गांव के झगरा-झंझट गांव म निपटाय जाय. बात-बात म कोर्ट-कछेरी डाहर भागे के नौबत झन आय. ग्राम-सभा होय. काम बुता ले निपट के अउ खा-पी के गांव के सियान-जवान मन रात कुन जुन्नेट मुखिया जी के घर के आगू म सकलांय. एक-दुसर के गोठ-बात सुन के गांव के पूरा हलचल जना जाय. गांव के बंधेज करना, नौकर चाकर लगाना, छोड़ाना, नाउ, राउत के बुता, बेटा-बहू के शिकायत अउ सबे समस्या ग्राम-सभा म उठाय जाय. गांव के सियान तब पंच-परमेश्वर बरोबर निष्पक्ष निर्णय दें. सब ल माने बर परे. नहिं त डांड़ पर जाय. एखर से गांव म एका राहय, विरोध कम से कम होय. कोर्ट-कछेरी के झंझट अउ पिचकाट ले गांव मुक्त रहि के खुश राहय. पूरा धियान अपन काम बुता म लगे लगाय जाय. गांव के विकास बर सब सोचे.
एक बखत मंगलू के बेटी हर आन जात के टूरा संग सहर जा के बिहाव कर लेइस. जब खबर गांव म गरमइस त मंगलू के तन-बदन म आग लग गे. बात गांव के सियान मन तिर पहुंचिस त गांव वाले मन बात के खूब बतंगड़ बनइंन. माई लोगन मन अइसन गोठ-बात म मिरचा मसला लगा के जगह-जगह बतियाना चालू करिन. चार-पांच झन मिलके टूरा-टूरी दुनो के हड्डी-पसरी टूटत ले बनेच ठोंक-पीट कर दिन. ओखर ले गांव म रोस बाढ़गे. बात पुलिस थाना तक पहुंचगे. मारपीट करइया मन ल जेल के हवा खाय बर परिस. जे ठन मुहूं ओ ठन गोठ अतराब म फैइलगे. इहां ले गांव के सांति भंग होना शुरू होइस तेहा बंद होबे नइ करिस. दुनों बालिग रिहिन त कानून उनकर संग होगे. घर बसगे. वकील रमाशंकर अपन संवारी बंसी संग गांव वाले मन के समस्या ल सुने अउ हल करे.

ठेलहा जवान लइका मन आए दिन कोनो न कोनो बखेड़ा खड़े कर देय. कमाय-न धमाय. अपन मुहूं के मिट्ठू बने फिरें. गांव म भाई बंटवारा होय चाहे लड़ई-झगरा अशांति बाढ़गे. बहाना पचासों ठन राहय. कतको झन सरकारी दारू पी के रोजे हुल्लड़ करें. पानी ले जादा दारू पियइया मन गांव म जादा होगे. खार म पानी पलोय बर होय या ओन्हारी फसल के रखवारी के आए दिन पुलुस, कछेरी-अदालत के फेरा राहय. गांव के छोटे-बड़े किसान पिसावत राहंय. पटवारी, तहसीलदार पुलिस, कोटवार सब खांव-खांव करें. कछेरी म जेब भर के नोट लेग अउ जुच्छा लहुट. वुकील मन दुमुहा बात करें अउ दुनों डाहर ले पइसा सोंटे. छोटे मोटे झगरा सालों-साल लग जाय निपटारा नइ होय.

एक दिन सुकालू मुखिया जी ल किहिस - हमन भाई बंटवारा होय हन. बड़े भाई कांटा मार दिस. घर के नाव लेके एकक ठन खोली मिलिस. बड़े भाई नहर-नाली वाले खेत ल खुद ले लिस. आधा भर्री, आधा धनहा दु अक्कड़ खेत मिलिस. मुखिया जी अपन कान ल धर के किहिस-भैया, मोर साध बुतागे हे. अब मेंहा कखरो तीन-पांच म नइ परंव कहि के कलेचुप हो गिस. अब ग्राम-सभा नइ होय. कोनो मनखे कोनो ल नइ पूछें. सब अपन मन के राजा होगे. बात-बात म पुलुस-कछेरी आम बात होगे. न लोग जुन्नेट मुखिया कखरो सुने, न नवा मुखिया के. छोटे मनखे के बड़े टेस होगे.



इही बीच बड़े शहर ले जुन्नेट मुखिया के बेटा रमाशंकर गांव अइस त गांव के दशा देख के बड़ दुखी होइस. वोहा वकालत पढ़े रिहिस. बड़े सहर म वकालत करे. अपन गांव के कथा-कहिनी ल सुन के ओखर आंखी म आंसू आगे. ओहा गांव के मन ल समझाना शुरू करिस के जिहां एकता होथे, सुनता होथे ओ गांव विकास करथे. सब ले मिलना जुलना, समझाइस देना. समझौता कराना. गांव के समस्या हल करना. सब झन ल साथ ले के चलना, अपन व्यवहार के जादू ले ओहा खुद चंद महीना म लोकप्रिय होगे. कोरट, कछेरी अदालत ल सब दुरिहा ले नमस्कार करिन अउ गांव फेर अपन रद्दा म आगे. रमासंकर बाबू अब अपन गांव म बसगे. मुखिया जी खुस होइस किहिस सिछा सार्थक होगे. अउ बेटा ल खूब आसीर्वाद दिस. अतराब म वकील बाबू प्रसिद्ध होगे. दुखी जनता ल लगिस के ओखर मन के तारनहार आगे. गांव म जैविक खेती करिस अउ ओखर प्रेरना ले कतको किसान मन घलो जैविक खेती करके अधिक पैदावारी हासिल करिन. खेती-बारी के विकास होइस. मुखिया जी के बहुरिया गांव के लइका मन ल बिना पइसा लेय पढ़ाय. कुछ साल बाद गांव के नाम अंधियारटोला ले बदल के अंजोरटोला होगे. लइका पढ़ई म टंच होगे, यहू समे के चकरी आय के गांव के कचरा सोना होगे.

( डिसक्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं.)
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