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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- पुरदा मं अजब-गजब रामलीला

छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- पुरदा मं अजब-गजब रामलीला

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पुरदा नांव के गांव हे, जेकर आजकल गजब शोर उड़त हे. दुर्ग जिले के धमधा तहसील मं ये गांव आथे, जिहां सिरिफ अउ सिरिफ दस ले बारह साल के नोनी (बेटी) मन रामलीला करत हे. एमा एको झन पुरुष पात्र नइहे. राम से लेके रावण तक सबो उहिच मन बनथे.

ये रामलीला ला देख बर बताथें सैकड़ों ला कोन काहय हजार ले उपर मनखे उम्हिया जाथे. दशहरा के दिन रामलीला होही. ये लीला के संवाद छत्तीसगढ़ी मं होथे. महतारी भाखा के सुवाद तो बासी मं दही डारे असन होथे. का पूछना हे? लीला के खास बात ये हे के एमन के जम्मो पात्र (बेटी) मन साहू समाज के हें.

कोनो पतियावयं चाहे झन पतियावयं फेर ये बात सोलह आना सही हे के एक ठन गांव मं रामलीला होवत हे तेला देखे बर बताथें- दहाई, सैकड़ा ला कोन काहय हजारों के भीड़ जुरियावत हे. महूं सुनेंव, अखबार मं पढेंव रामलीला, ओमा हजारों के भीड़. दरियाप करेंव, एती-तेती पता लगवायेंव तब ओ बात सही
निकलिस.

अब अइसन नाटक-लीला तो कतको देखे, सुनेन अउ हमू मन अपन समे मं नाटक, लीला करेन, फेर अइसन भीड़ कभू नइ जुरियाय रिहिन. ले-दे के गांव भर के मनखे मन आवयं देखे-सुने बर. फेर ये रामलीला मं अइसन कोन जादू हे तेला देखे बर हजारों मनखे बतरकिरी असन उमड़े परत हे. हां अइसे कोनो खास जादू हे, तभे तो गांव के ला कोन काहय,दूसर गांव के मन घला देखे बर टूटे परत हे. अउ ओ जादू हे, ये रामलीला मं, जौंन काम करत हें, तेन जम्मो के जम्मो बेटी, बहिनी हे. राम, लखन, भरत, शत्रुहन, सीता, उरमिला, कैकेयी, कौशिल्या, सुमित्रा, मंथरा, राजा दशरथ, राजा जनक, हनुमान, सुग्रीव, जामवंत, रावन, कुंभकरन, विभीषण, मेघनाथ ये सबके सब कलाकार बेटी-बहिनी मन हरे. एको झन पुरुष पात्र नइहे. इही हे जादू ये रामलीला के. अइसन अजब-गजब रामलीला मोर जानती मं न कहूं, कभू देखे हौं, न सुने हौं. सांझर-मिंझर कलाकार भले होथे, फेर निमगा सबो पात्र नारी जाति के मन करय, ये तो पहिली खबर मं आय हे. जौंन ये खबर ला सुनत हे, भौचक रहि जात हे. रइही अउ होही कइसे नहीं, जइसन कभू होये नइहे, देखे-सुने नइहे, अउ ओला देख सुन परही तब मन चकराबे करही.

ये बहुत बड़े हौसला के बात हे, अजूबा हे, जइसन काम ये देश मं कोनों नइ करे हें तेला एक छोटे से गांव के बेटी-बहिनी मन करके देखावत हे, ओकर मन के हुनर, कला के सब ला तारीफ करना चाही. वइसे भी आज ये देश के बेटी मन कोनो अइसे क्षेत्र नइ होही जिहां कदम नइ रखे होही, अउ अपन प्रतिभा के डंका बजावतहे. शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, उद्योग, व्यवसाय, राजनीति, कृषि, कला, साहित्य सबो मं बढ़-चढ़ के भाग लेवत हे. अभी-अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश निकलिस तेमा केन्द्र सरका हा सेना मं घला एकर मन के भागीदारी तय करके ओकर मन के मान बढ़ाइस, कुल मिला के पुरुष प्रधान वर्चस्व मं एकर मन के बढ़त भागीदारी के सेती कमी आवत जाते हे. अउ हां पुरुष मन से कोनो काम मं नारी मन के प्रतिभा मं कमी नइहे.

फेर मजा अउ अचरज के बात ये हे के गांव ले प्रतिभा निखरत हे ये तो बड़े गौरव के बात हे. अइसन गांव जिहां साधन, सुविधा, शहरी क्षेत्र के बनिस्बत कम रहिथे, उहां ले बेजोड़ प्रतिभा निकल के आना मायने रखथे. अइसन गांव बधाई के पात्रहे, अउ सरकार मन ला तो चाही के ये परकार के गांव अउ निकलत अइसन प्रतिभा मन ला आघू बढ़ाय खातिर प्रोत्साहन देवय. अइसन करही तब गांव-गांव मं विकास के गंगा अपने आप बोहाय ले धर लिही.

अब सबके धियान ओ गांव कोती गे होही, के अइसन धनी-मानी गांव कोन से हे, जिहां के बेटी-बहिनी मन अतेक बड़े हिम्मत करके रामलीला करे के निरनय लीन. ओ गांव हे पुरदा, दुर्ग जिले के धमधा तहसील मं ये गांव आथे. अउ सरलग पांच साल ले ये रामलीला ला करत आवत हे. राम से लेके रावण तक जतका पात्र हे सब के सब बेटी मन बनथे. एको झन पुरुष पात्र ये लीला मं भाग नइ लेवय, ये सबले बड़े अचरज के बात हे. ये लीला मं पूरा संवाद छत्तीसगढ़ी बोली मं हे. अपन महतारी भाखा के बहुत असर होथे, जादू होथे, उही पायके लीला देखे-सुने बर पुरदा गांव के ला कोन काहय, अतराब के जतका गांव हे, ओमन सुनथे के पुरदा मं बेटी मन रामलीला करत हें, दोर-दोर ले गरुआ मन असन भेडिय़ा-धसान लीला देखे बर टूटपरथे. अभी काहे, नवरात, दशहरा समे हे, सब के सब रामलीला के आनंद उठावत हे. अपन बोली के मिठास तो अमरित बरोबर होथे, तेकर सेती बरबस खिंचे चले आवत हें.

ये रामलीला मंडली के मुखिया जागेश्वर प्रसाद मानिकपुरी हे. ओकर अनुसार चौतीस साल पहिली ओकरे परिवार वाले मन रामायण मंडली बनाय रिहिन हे. फेर रामलीला के मंचन नइ करे रिहिन हे. गांव के मन ला रामलीला मंचन करे खातिर जोजियायेन फेर कोनो कनमटक नइ दीन. फेर एक घां अइसन होइस गांव वाले अउ लड़की मन के रजामंदी अउ राय लेके रामलीला मंडली के गठन करे गिस. बात बनगे, रास्ता खुलगे अउ खेल शुरू होगे. तब ले आज तक पांच साल होगे सरलग रामलीला होवत हे, हमर गांव पुरदा मं, जेला देखे खातिर हजारों मनखे उमड़त हे. इही हमर मन के मेहनत के फल हे, बहुत खुश हन.

ओ कलाकार के नांव हे जौंन पात्र बनथे- श्रद्धा साहू- राम (19वर्ष), राम, गौरी साहू- सीता (12 वर्ष), राजकुमारी साहू (लक्ष्मण) 17वर्ष, भारती साहू (हनुमान) 17 वर्ष), थानेश्वरी साहू- सुग्रीव (15 वर्ष), खुशबू साहू-विभीषण (19 वर्ष), हेमलता साहू- जामवंत (15 वर्ष), सुमीता सिन्हा- रावण (22 वर्ष), दीपिका मानिकपुरी- मेघनाथ (19 वर्ष), रितु सिन्हा- कुंभकरण (18 वर्ष), कन मानिकपुरी- खरदूषण (15 वर्ष), गायत्री साहू-सूर्पनखा (17 वर्ष), कृष्णा साहू- अंगद (21 वर्ष), गोपेश्वर साहू- मृग मारीच (13 वर्ष), लोकनंदिनी मानिकपुरी-सुषेण बैद. संगीत रामलीला मंडली के संस्थापक जेमा महिला सदस्य घला हें, उही मन देथे. दशहरा के दिन रामलीला के मंचन करे जाही.

(परमानंद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi News

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