छत्‍तीसगढ़ी भाषा में गांधी जयंती पर विशेष: परतंत्रता बने नोहय

मन मा देश प्रेम पनप गे तेन जिनगी भर देश सेवा करे के परन लेथे.
मन मा देश प्रेम पनप गे तेन जिनगी भर देश सेवा करे के परन लेथे.

महात्मा गांधी के लउठी ला धरे - धरे आगू - आगू रेंगइया लइका छत्तीसगढ़ के तुलेन्द्र हरय जेन आगू चलके स्वामी आत्मानंद के नाम ले  जाने गीस.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 11:09 AM IST
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"बने - बने सब बने - बने फेर बने - बने का होही,
गारत भर ले गार लिही फेर बार दिही तोर छोही "

19वीं अउ 20 वीं शताब्दी काल मा जेन मन दुनिया के गत ला मारत रिहिन तेनो मन जान डरे रिहिन के अब सब्बो दिन अइसनहा नइ चले सकय. मानव जाति ऊपर विपत्ति के पहाड़ टूटे रिहिस. सज्ञान लेवइया मन आगू आके नर संहार ला रोके के उदिम करिन. उही समय हमर भारत देश मा "मोहन दास" के जनम होइस जेन आगू चलके महात्मा कहाइन. महात्मा गांधी के जीवन संसार ले आजो कतको झन प्रेरणा लेथें.

अहिंसा अउ संयम के पुजारी महात्मा गांधी घलोक एक दिन समाज मा उच्च स्थान पाइस. समय काल के गति हा आखिर मा जान डारिस के अब समय आगे हे निरमान के. नवा समाज गढ़े बर कतको सुराजी मन अपन प्राण ला न्योछावर कर दिन. धरती माता अउ ओखर कोरा मा खेलइया, कुदइया सब्बो जीव मा जेन जीवात्मा हे तेन कभू कखरो संहार मा विसवास नइ करय. प्रकृति के विधान ला पालन करत जीव जगत के पालनहार सब्बो किसिम के जिनिस उपजाइस अउ  शोषण - पोषण के बेवस्था के संगे - संग सरलग अपन कारज मा आजो लगे हावय.
संसारिक अउ राजनीतिक जगत मा अहिंसा ला हथियार बना के जग जाहिर होगे महात्मा गांधी के विचार, शिक्षा - दीक्षा जन समाज ला जाने बर बहुत जरूरी हे. ग्रामीण अउ घरेलु उद्योग - धंधा के युग मा प्रवेश करे के द्वार फेर खुलगे. चरखा अउ अहिंसा ला अपन जिनगी के सार बनइया महात्मा तोर जय होवय. अब छतीसगढ़ के परिपेक्ष मा थोकुन देखे जाए.



वर्तमान छत्तीसगढ़( 01 नवंबर सन् 2000 से ) देखे जाए ता महात्मा गांधी के सुरता करे के पहिली इही माटी मा जन्मे दलित चेतना बगरइया हमर महापुरुष पं. सुन्दर लाल शर्मा के सुरता आथे.

"जाति - पाति पूछे नहिं कोई , हरि को भजै सो हरि के होई"

एतेहासिक साक्ष्य हावय के महात्मा गांधी जी 20 दिसंबर 1920 के रायपुर (वर्तमान छ .ग. के राजधानी ) आए रिहिन. उही पईत पं. सुन्दर लाल शर्मा जी के नहर सत्याग्रह मा संलग्न रहिके सत्याग्रही किसान संग सत्याग्रह मा जीत हासिल करे रिहिन. अउ सरकार समझौता करे रिहिस. अब बात जेन प्रमुख बात हरय कि शर्मा जी हा 1917 ले अछूतोद्धार के काम मा लग गे रिहिन. ऐ बात के पता गांधी जी ला चलिस ते उही दिन महात्मा गांधी जी पं. सुन्दर लाल शर्मा ला गुरु तुल्य सम्मान दिन. आज छत्तीसगढ़ मा पं. सुन्दर लाल शर्मा ला छत्तीसगढ़ के गांधी केहे जाथे.

साधन सम्पन्न संपत्ति वाला परिवार अभाव के जिनगी गुजारत ए धरती ले बिदा लेथे एला देखना हे ते राजिम के तीर जन्मे चमसुर गांव के माल गुजार परिवार के शर्मा जी ला जानना परही. महात्मा गांधी जी 1933 मा दुबारा फेर छत्तीसगढ़ आइन त राजिम घलोक गे रिहिन अइसे लिखइया मन लिखे हें. महात्मा गांधी के लउठी ला धरे - धरे आगू - आगू रेंगइया लइका छत्तीसगढ़ के तुलेन्द्र हरय जेन आगू चलके स्वामी आत्मानंद के नाम ले जाने गीस. स्वामी आत्मानंद याने छत्तीसगढ़ के विवेकानंद.

मनुष्य योनि मा जनम धरइया कोनो न कोनो देश के रहइया बसइया होथे. सबके अपन पूर्वज , अपन इतिहास. घलोक संग मा संघरे रथे. संस्कार अउ संस्कृति के संगे - संग जाति धरम के बात घलोक करे जा सकत हे. स्वदेशी अउ स्वराज के कल्पना मात्र से कतको अस्त्र - शस्त्र के निरमान होगे जइसे असहयोग करना , उपवास करना , अहिंसा के प्रयोग करना , आमरण उपवास करना. इही सब्बो अस्त्र - शस्त्र के प्रयोग हा गांधी ला महात्मा बना दिस. मानव सेवा के पाठ घलोक उनला दूसर देश मा मिलिस. त्याग के परिकल्पना उंखर मन मा अपन देश के अभाव ग्रस्त जिनगी जियइया मन से मिलिस. सब्बो किसिम के झेल ला सहइया एक दिन समाज मा ऊंचा स्थान पाथे. जेखर  मन मा देश प्रेम पनप गे तेन जिनगी भर देश सेवा करे के परन लेथे.
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