छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: सब्बो किसम के संसाधन हमर धरती मा हावय , तभो ले गरीबी भोगत हन

घरो - घर सुख - समृद्धि लाने बर हमन ला खुद हुसियारी करना पपरही , तभे सपना पूरा होही.

घरो - घर सुख - समृद्धि लाने बर हमन ला खुद हुसियारी करना पपरही , तभे सपना पूरा होही.

सरकार बनिस, फेर चुनाव जितइया सरकार बनिस तभो ले सब्बो जस के तस हवय. तेल चुपरे असन चिक्कन - चिक्कन तरक्की देखाय ले का होही समझ मा नइ आवत हे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 9:59 PM IST
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"अब्बड़ दिन पहाएन संगी पंगपंगागे न
हरन छत्तीसगढ़िया हमर राज आगे न"

 ब्बो छत्तीसगढ़िया मन के भावना के अनुरूप 01 नवंबर 2000 के दिन एक नवा राज्य छत्तीसगढ़ बन गे. आज सन् 2020 चलत हवय. हमन पाछू मुड़ के देख थन त हमन ला सुरताए ला परही तइसन लागथे. सब्बो किसम के संसाधन हमर धरती मा हावय , तभो ले गरीबी भोगत हन आज तो रोजी रोजगार के चिंता सताए लगिस. सरकार बनिस, फेर चुनाव जितइया सरकार बनिस तभो ले सब्बो जस के तस हवय. तेल चुपरे असन चिक्कन - चिक्कन तरक्की देखाय ले का होही समझ मा नइ आवत हे.

अभी नवा सरकार गद्दी मा बैठे हवय.
नवा - जुनी करत - करत आगू बाढ़त हवय.



संस्कार अउ संस्कृति के संगे - संग विज्ञान सम्मत चिंता घलो देखे जा सकत हे. हमन, साहित्यकार बिरादरी वाला मन भाषा के चिंता करत - करत अतका दूरिहा आगे हवन. अब भरोसा होय लागिस के हमन ला , राजकाज के भाषा छत्तीसगढ़ी बहुत जल्दी मिल जाही. हमर इहां  लोक भाषा, लोक कला अउ सांस्कृतिक परंपरा के भंडार हवय.

पृथक छत्तीसगढ़ बर आंदोलन करइया कतको झन मन अभी घलोक अपन बात ला राखथें अउ सरकार ला चेताय के उदिम करत रहिथें. सबले पहिली भाषा ऊपर काम होना चाही. खेतिहर किसान के लइका अपन घर ले इसकूल जाथे. इसकूल मा पढ़ाने वाला मन के संग गोठ बात मा भाषा बदल जथे. मय खुद ह इसकूल पढ़े बर जांव ता छत्तीसगढ़ी बोले मा डांट परय , अरे देहाती अइसन काहंय.

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आज मय ह ओ दिन के सुरता करथंव त लागथे के हमरे छत्तीसगढ़िया मन भाषा ला कमजोर करथें. अभी भी गोठ बात मा छत्तीसगढ़ियापन नइ झलकय.

"हमरे चिरौंजी, हमरे लासा , ऊंखर गड़ा - गड़ा नून
पनही असन पनहा नापिन , कान लगाके गून"

ठग - जग करइया मन इहां आके अपन पसरा लगाइन अउ बिल्डिंग टेका दिन. बोलचाल के भाषा ला सीखिन अउ दीदी - भाटो के रिश्ता बनाइन. अपन परिवार ला दूरिहा राखिन अउ शोषण करे लागिन. ऐ हरय मन के असली पीरा. दाऊ मन के गउटई बेचा गे फेर आँखी नइ ऊघरिस. इही पाय के आज जरूरत हे के हमन अपन आप ला सजग प्रहरी बनावन.

महतारी भाखा महतारी के दूध मा घुरे रहिथे , उही दूध ला पी के हमन पचोए हन. आज हमन ला अपन क्षेत्र के विकास बर सबले पहिली अपन भाषा के विकास के चिंता करे ला परही.

चिंतन करइया , व्यवस्था देवइया कतको आइन कतको गिन , फेर देखबे त सब्बो जस के तस हे. आदमी मन अलाल हो गे हवय. जान डरें हें कमजोरी ला ओट मंगाइया आहीं, कइसनो करके पाँच साल ला निकाल. कमिया , बनिहार मन के हाड़ा झांकत हे. तभो ले नइ चेतत हें. ऐ बात मन ला लिखे के कारन ऐ हे के " सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाय" के वातावरण बनाए ला परही. लालची मनखे मन ला खोजे ला परही. थोरको मौका मिलिस तहां ले झपा जाथें अउ काहीं कहिबे ते नोखियाथें. जेला मौका नइ मिले हे तेने ईमानदार हवय.

सरलग बुता जोंगइया मन ला घलोक बुता करना चाही. पारिवारिक समस्या ला समझना चाही. सब्बो चीज बर सरकार डाहर नइ झांकना चाही. काम खोजइया मन ला काम देवइया बनना चाही.

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सरकारी नौकरी खोजइया मनखे मन चांव - चांव मा बोजागें. जेन जइसने काहत हें तेखरे पाछू रेंगे लागथें. पलायन के पीरा आजो हावय. पलायन के बाद जेन बांचे हें ते मन काय करत हें , ऐ देखे ला परही. अपन खुद के काम धंधा बर कतको जगहा हे. शहर मा तो दार - भात, साग रांध के अपन घर दुवारी मा बेच डारथें.

गांव मा जाबे ता बेकारी के समस्या सबले आगू  आथे. ओती किसान ला खोजे में, बनिहार नइ मिलत हे. नशा, नास के जर केहे गेहे , तभो ले बोजइया बोजाते जात हे, का करबे.

अतका सब्बो बात ला केहे के मतलब ऐ हे के समय  ला पकड़ो, बचत कोती ध्यान धरो. अपन बिराना मा झन राहव. घरो - घर सुख - समृद्धि लाने बर हमन ला खुद हुसियारी करना पपरही , तभे सपना पूरा होही.
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