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छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: एक डाकू अइसे घलो रहिस – रोहिल्ला

आज त मोबाइल म फोन कर-करके लूटत हें, फेर रोहिल्ला याने मुलतानी मन त अलगेच रहिन.

आज त मोबाइल म फोन कर-करके लूटत हें, फेर रोहिल्ला याने मुलतानी मन त अलगेच रहिन.

रतनपुर के राज म मुलतानी कहे जाने वाला ए गिरोह मन ल रोहिल्ला कहे जाय. इतिहास के पन्ना म लिखाय हे के रोहिल्ला डाकू आज के ...अधिक पढ़ें

त्तीसगढ़ जम्मो संसार म सबले शांत जघा माने जाथे. काबर के इहां के मनखे बड़ मयारू अउ पहुना सत्कार बर सबले आगू. अइसे म कोन डाहर लरई-झगरा होवय. इतिहास के समे ले हमर छत्तीसगढ़ म कतकोन राजा-महाराजा आइन अउ इंहे राज करिन. अउ तो अउ कतकोन कमंडल-कटारो धर के आइन अउ राजा बनगिन. फेर आधुनिक समे म चोर-डाकू, लुटेरा, मोबाइल ठग मन आगू हें. फेर तू मन जानथव का के एक समे म इंहा एक डाकू गिरोह के आतंक घलो रहिस. ऐ डाकू गिरोह के  नाव घलो बड़ अजब रहिस- रोहिल्ला. आवव सुनव रोहिल्ला के तनिक किस्सा.

रतनपुर के राज म मुलतानी कहे जाने वाला ए गिरोह मन ल रोहिल्ला कहे जाय. इतिहास के पन्ना म लिखाय हे के रोहिल्ला डाकू आज के गब्बर डाकू मन कस डरडरावन रहिन. रोवत लइका मन ल चुप कराय बर गांव के दाई मन काहय -बेटा चुप हो जा रे, नइ त रोहिल्ला आ जाही. अउ लइका मन कलेचुप हो जांवय. इतिहासकार मन बतावंव के 12 वीं सदी म मुल्तान ले आके मुल्तानी मन  छत्तीसगढ़ के तीर-तखार म रहे ला लग गिन. ये मन तलवार अउ आनी-बानी के पथरा धरे रहंय.  पिंडारी गिरोह ह पहिली मनखे ल डरवाय फेर लूट-पाट मचावंय.

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कभू-कभू त मनखे ल उल्टा तरी मुड़ टांग देवंय. कभू गरम तेल ल उडेल दंय. आधा रात के आवंय अउ बड़का जमींदार-बैपारी मन ल लूटंय. लूट के पइसा ल बने ईमानदारी ले बरोबर बांटय. डॉ. प्रभुलाल मिश्रा बड़का इतिहासकार रहिन अउ मराठा मन के सत्ता उपर बनेच लिखिन-पढ़िन. उंमन घलो पिंडारी अउ मुल्तानी मन के किस्सा लिखे हें. मुल्तानी गिरोह के सरदार रहिस सलावत उदाहुस्न. इतिहास के सियान  डॉ. भगवान सिंह घलो लिखे हे छत्तीसगढ़ के इतिहास म. के अकबर के राज म भारी अकाल परगे. मुल्तानी मन मुगल राजा के कमान म लूट मचावय अउ भेंट देवय. अकाल के सेती भेंट नइ दे पाइन.

तव मुलतानी मन सरकारी खजाना ल लूट के भेंट जमा करिन. अइसे कहे जाथे के मुल्तानी मन लूटपाट के एक बटा चार हिस्सा छत्तीसगढ़ के जमींदार मन ल देवंय अउ जमींदार मन बदला म सुरक्छा देवंय. अधिकारी स्तर म छत्तीसगढ़ म भ्रष्टाचार के शुरूआत घलो इहीं घटना ले माने जाथे.

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जब अंग्रेज मन के सत्ता आइस तव उंमन मुल्तानी गिरोह ल समाप्त करे बर जतन करीन. डाकू मन बर कड़ा सजा के नियम बनाइन. ऐखर बर कप्तान स्लीमन ल अधीक्षक बनाइन. अंग्रेज मन के प्रयास ले मुलतानी डाकू मन के खात्मा होइस. डॉ. प्रभुलाल मिश्र लिखथें के 1806 म छत्तीसगढ़ म पिंडरी मन के बड़े गिरोह रहिस. ए मन मध्यप्रदेश के सोहागपुर ले अमरकंटक होवत रतनपुर आय रहिन. रतनपुर ल लूटना ऐ मन के सपना रहिस. फेर ओ समे रतनपुर के हालत अब्बड़ खराब रहिस ते पाय के नइ लूट पाइन.

मारकाट मचैया रोहिल्ला डाकू मन आज नइ हें. आज त मोबाइल म फोन कर-करके लूटत हें, फेर रोहिल्ला याने मुलतानी मन त अलगेच रहिन.

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