छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: पितर पाख म हमर पुरखा के सुरता - डा खूबचंद बघेल

छत्तीसगढ़ भातृसंघ बनाय के अपन उद्देश्य ल बतावत उंमन कहिथें के हमन ल सुआर्थी, रंगे कोलिहा, अउ हमन ल भोकवा बनाने वाला मनखे ल पहिचान करना हे.

छत्तीसगढ़ भातृसंघ बनाय के अपन उद्देश्य ल बतावत उंमन कहिथें के हमन ल सुआर्थी, रंगे कोलिहा, अउ हमन ल भोकवा बनाने वाला मनखे ल पहिचान करना हे.

इहों हमन अपन पितर मन ल गोहार लगाथन के अपन लइका-बाला मन ल बने-बने राखव. धन-धान्य के बढ़ोतरी होवय. तुंहर आसीस मिलत राहय.

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  • Last Updated: September 10, 2020, 2:53 AM IST
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भी छत्तीसगढ़ म घलो पितर पाख चलत हे. पितर पाख छत्तीसगढ़ के पुरखा के सुरता करे के श्राद्ध पक्ष ए. छत्तीसगढ़ी म ऐला पितर पाख कहे जाथे. पितर पाख म हिंदू मन अपन पितर ल सुरता करके पिंडदान करथें. जम्मो भारत अउ भारत के बाहिर घलो ए पाख ल मनाय जाथे. छत्तीसगढ़ हिंदू बहुल राज्य हे. इहों हमन अपन पितर मन ल गोहार लगाथन के अपन लइका-बाला मन ल बने-बने राखव. धन-धान्य के बढ़ोतरी होवय. तुंहर आसीस मिलत राहय.

दान-पुन्न के परंपरा घलो छत्तीसगढ़ म विद्यमान हे. छत्तीसगढ़ अपन पूजा-पाठ, संस्कृति-संस्कार अउ लोक-संस्कार बर जाने जाथे. एइसे माने जाथे के पितर पाख म चैदह दिन अपन पितर मन ल अन्न-जल-दान करे ले चैदह फल के प्राप्ति होथे. ए चौदह फल हे- गुनवान कन्या, बुद्धिमान दमाद, योग्य बेटा, गाय-गरूआ, जीत, व्यापार म लाभ, खेती अउ नौकरी म लाभ, घर-परिवार के बढ़ोतरी, अपन भीतर ओज के प्राप्ति, स्वस्थ तन, बल अउ ताकत, मन की इच्छा के प्राप्ति, परम गति. दाई के श्राद्ध करे ले बेटा अपन दाई के लागा ल मुक्ति पाथे.

छत्तीसगढ़ म अपन पितर मन ल खवाय बर आनी-बानी के कुंवर कलेवा बनाय जाथे. जइसे- सोंहारी, बरा, बबरा, तरोई के साग, कढ़ी, आदि. बावहन मन ल खवाय के घलो परंपरा हे. श्राद्ध के मतलब हे - श्रद्धा ले जो संभव हे दे जाए. हवि, तिल, कुश्, जल के अर्पण ले पितर मन साल भर प्रसन्न रहिथे अउ दान ले इंहा के जजमान मन.



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अब बात हे के हमर पितर का हमर दाई-ददा मन बस हे, के हमर छत्तीसगढ़ ल बनाय-संवारे म जेन मन के जोगदान हे तेन मन घलो हें. हां, सिरतोन हमर छत्तीसगढ़ के पुरखा हमर छत्तीसगढ़ के सपना देखइया, हमर सुख-दुख, मया-पीरा के संसो करइया मन घलो हें. ऐ पुरखा मन के सुरता के बेरा पितर पाख म होना चाही. आवव आज अइसने हमर एक पुरखा ल सुरता करिन.

डॉ. खूबचंद बघेल हमर छत्तीसगढ़ के सपना देखइया पुरखा ए, जेला पितर पाख म सुरता करके हम अपन लागा ले चिटकुन मुक्ति पा सकत हन. डॉ. बघेल ह अपन जम्मो उमर ल छत्तीसगढ़ बर चघा दे रहिन. उंखर नाव आत ले हमर मन म ईमानदारी, हमर गरीब-किसान बर लड़ैया, नाटक अउ साहित्य लिख के छत्तीसगढ़िया मन ल जगैया अउ दिन-रात छत्तीसगढ़ ल राज बनाय के सपना देखइया के तसवीर बन जाथे. डॉ. बघेल जुच्छा एक राजनेता नइ रहिन बल्कि लोकरंग के धनी मनखे रहिन.

हमर समाज कइसे एकजुट होवय, जाति-पाति के भेदभाव कइसे मिटावय अउ कइसे छत्तीसगढ़िया मन के आत्म-सम्मान बाढ़य ऐखर संसो करत अउ ओखर बर लड़त अपन उमर ल बितादिन. उंखर नाटक उंच-नीच, करमछड़हा, गरकट्टा अउ जनरैल सिंह उन मन ला एक समर्थ नाटक लेखक बनाथे. ऐ नाटक आज घलो अपन दुख-पीरा ल हमर मन म बगराथे. आज जेन छत्त्तीसगढ़ रेजीमेंट के बात होवत हे तेन डॉ. खूबचंद बघेल के नाटक जनरैल सिंह म देखाय गे हे. भारत-चीन के लड़ई के बाद अपन देशप्रेम ल दिखावत ए नाटक म देश बर छत्तीसगढ़ रेजीमेंट के सपना देखे गे हे.

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हमर पुरखा डॉ. बघेल जी उंचनीच नाटक लिखिन तव समाज म घनघोर छुआछूत बगरे रहिस. गांधीजी 1933 म छत्तीसगढ़ आइन तव उंखर काम ल प्रेरना पाके डॉ. साहब ह उंचनीच नाटक लिखिन. नाटक म छत्तीसगढ़ के पीरा, छत्तीसगढ़िया मनखे के सोसन, भेदभाव ल देखाय गे हे. नाटक समस्या के संग समाधान घलो बताथे. चंदखुरी म एखर पहिली मंचन होइस जेला देखे बर भारी भीड़ उमड़गे. अपन एक लेख क्षुब्ध छत्तीसगढ़ म डॉ. बघेल लिखथें के जेन छत्तीसगढ़ के हित समझथें तेन हमर भाई ए. अउ जेन हमर राजनैतिक, आर्थिक अउ आनी-बानी के सोसन करना चाहथें तेन ल हमन कभू मया नइ कर सकन.

अपन नइ बना सकन. छत्तीसगढ़ भातृसंघ बनाय के अपन उद्देश्य ल बतावत उंमन कहिथें के हमन ल सुआर्थी, रंगे कोलिहा, अउ हमन ल भोकवा बनाने वाला मनखे ल पहिचान करना हे. अपन एक लेख छत्तीसगढ़ का आंसू पुकारता है म उंखर चिंता-संसों दीखथे. डॉ. साहब कहिथें के छत्तीसगढ़िया छत्तीसगढ़ महतारी के गौरव, ओखर सम्मान, अउ छत्तीसगढ़ म मानवता के बढ़ोतरी करे बर बियाकुल हे. हमन ल छत्तीसगढ़ के सियान-पुरखा मन के सम्मान करना चाही उंखर सुरता, पितर पाख म उंखर जोगदान के चरचा करे ले हमन ल पुन्न मिलही. डॉ. खूबचंद बघेल तो हमर पुरखा मन के एक प्रतीक हें अइसन कतकोन कोरी पुरखा मन छत्तीसगढ़ ल बनाय हें आवव उनला श्रद्धा के फूल-पाना चढ़ावन, पानी देवन ताकि हमर छत्तीसगढ़ बाढ़त राहय, सुख अउ समृद्धि मिलत राहय.
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