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    छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: मनखे के जिनगी ले जुड़े अउ पूजा मा समाय चिरई चिरगुन

    छत्तीसगढ़ मा घर मा पोसवा  मिट्ठू दू तीन किसम के होथे. एमा करणसुवा ला सबले जादा पोंसे जाथे.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 27, 2020, 12:54 AM IST
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    त्तीसगढ़ के भुँइया मा अउ इहाँ के पानी मा मया दया घोराय हवे. इहाँ के मनखे हा साँप बिच्छी, टेटका मेचका, संग चिरई चिरगुन बर घलो दया मया करथे. चिरई चिरगुन हा उँखर अन्न ला खेत मा खाथे तभो ओला मारे के नइ उड़ाय केउदीम करथे. जंगल के रहइया मन अपन सउँख मा चिरई चिरगुन ला खेदा करते अउ फंस जाथे ता भुँज के खा घलो लेथे.

    छत्तीसगढ़ के मनखे मन चिरई मयारुक घलो होथय. कतको झन मन चिरई चिरगुन ला पोंसथे. कतको चिरई चिरगुन ला देवी देवता के सवारी मान के पूजा करथें. पोंसे चिरई चिरगुन के खाय पीये रहे के बेवस्था करथें. परिवार संग एक सदस्य बरोबर राखथें. मनखे जौन चिरई ला सबले जादा मयारुक करके पोंसथे ओमा सुवा सबले जादा हवे. सुवा जेला मिट्ठू ,सुवना कहे जाथे. छत्तीसगढ़ मा घर मा पोसवा  मिट्ठू दू तीन किसम के होथे. एमा करणसुवा ला सबले जादा पोंसे जाथे.

    सुवा पोंसना शुभ माने जाथे. करणसुवा के रंग हरियर होथे, चोंच थोकिन लम्बा अउ लाल होथे. पूछी घलो दूसर सुवा मन के पूछी ले लम्बा होथे. मिट्ठू ला मनखे के संग सबले जादा रहइया चिरई  माने जाथे. एला नानकुन पिला ले पोंसे जाथे. एखर बर पिंजरा राखथे. वोहा जइसे जइसे बाढ़त जाथे, घर मा रहाइया मनके भाखा ला ओरखत जाथे अउ उँखर नकल कर के मनखे बरोबर गोठियाथे. राम राम कहिबे ता राम राम कहिथे.एखर खाय पीये के बेवस्था अपने संग करथे.सुवा साकाहारी होथे.फल फूल साग भात चना मुर्रा  सब खाथे. हरियर मिर्चा ला अबड़ सँउख से खाथे.पंडित जोतिस मन इही सुवा ला मनखे के भविष बताय बर घर मा पोंसथे.



    अइसने मनखे मन परेवा ला पोंसथे.फेर परेवा ला कमती मनखे मन पोंसथे. एखर बर पिंजरा के जरुरत नइ परय. एमन अपन मन के रहिथे अउ अपन संगवारी ला बला के लानथे. परेवा बिहनिया ले चारा चरेबर उड़ जाथे अउ दिनभर किंजर के संझा लहुट के आ जथे. परेवा ला घलो शुभ माने जाथे. सादा रंग के परेवा ला शांतिदूत माने जाने. करिया परेवा ला लोकवा अउ बात के दवाई माने जाथे कतको मनखे एला बेंचे अउ पइसा कमाय बर पोंसथे.
    छत्तीसगढ़ के राज्य चिरई पहाड़ी मैना ला माने जाथे. येहा करिया रंग के होथे अउ गर मा पींयर रंग होथे. करिया रंग के चिरई कोयली घलो होथय येहा घर तीर आमा अमरईया मा रहिथे. एखर बोली ला शुभ माने  जाथे. अइसने मनखे मन मंजूर, गड़ूर, अउ हंस टेहर्रा चिरई ला पूजा के चिरई मानथे. मंजूर हा भगवान कार्तिकेय के सवारी माने जाथे. भगवान कृष्ण हा अपन मुकुट मा एला खोंचथे. कृष्ण ला गोपाल गलो कहे जाथे ता मंजूर पांख ला देवारी जेठौनी के दिन गाय बछरू के गर मा सोहाई बना के माला असन पहिराथें. गरुड़ भगवान विष्णु के सवारी अउ हंस माता सरसती के सवारी आय.एखर सेती उँखर पूजा करे जाथे. टेहर्रा चिरई ला दशरहा के दिन देखे मा शुभ माने जाथे.

    अइसे तो कउँवा ला दोखहा अउ अशुभ चिरई माने जाथे. काबर कि ओहा एक आँखी ले कनवा रहिथे.अउ बड़ उदबिरिस चिरई आवे.कउँवा ला कोनों पोंसे नइ फेर एहा  छत्तीसगढ़िया मनखे के जिनगी ले जुड़े अउ हिरदे मा रचे बसे  चिरई आय. काबर कि ओहा एमा अपन पीतर ला देखथे. पीतर पाख मा एखर अगोरा करथे. पीतर के दिन कउँवा ला नानम किसम के पकवान खवाथें.

    जइसे जानवर मा शेर होथे वइसने चिरई चिरगुन मा गिधवा अउ रवना होथे. एमन नान्हे चिरई ला खा देथे. मनखे ले इँखरो जुड़ाव रहिथे.एहा गंदगी ला सफई करथे. गांव मा जब कोनों पोसवा जानवर गाय बाइला मर जाथे ता ओला गांव ले बहिर फेंके जाथे. ओखर हाड़ा अउ चाम ला निकाले के पाछू बांचे मास ला इही गिधवा अउ रवान मन खा खा के सफई करथे अउ मनखे ला बास ले बचाथे.

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    अइसने किसम के छत्तीसगढ़ मा अउ नानम किसम के चिराई चिरगुन हावय जौन मनखे के जिनगी ले जुड़े हे बाम्हन चिरई गोड़ेला, पड़की, कठखोलवा, तीतुर घुघवा, कोकड़ा,चमगेदरी जौन गांव मा मनखे के तीर तार मा रहिथे.


    फेर आज कतको चिरई चिरगुन के बंश नास होवत हे, प्रदुशन, तरंग, विकिरण मन ले अउ फसल ला उपराहा पाय बर नाना किसम के जहर महुरा के दवई बउरे ले नानमुन कीरा मकोरा मन मर जाथे, एमन चिरई चिरगुन के चारा आवय. जब मरे कीरा ला चिरई मन खाथे ता ओला खाय ले वहू मन मर जाथे. पेड़ मन घलो कटात हे एमन चिरई चिरगुन के घर आय. घर नइ रहे से बेघर मनखे नइ जी सके फेर ये तो जीव जन्तु आय.आज सबो मनखे ला चिरई चिरगुन के रक्षा के संकलप करना परही तभे हमर जिनगी ले जुड़े से जीव हा बाँचही.
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