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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- 'हाय रे तोर ये गुस्सा'

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गुस्सा कब, काबर अउ कइसे होथे, एला कोनो जाने अउ बताय तो नइ सकय, फेर जब होथे तब पहाड़ मं, पानी मं, जंगल मं, घर अउ राजमहल मन मं अचानक आगी लग जथे, जलके सब राख हो जथे. गुस्सा, मनखे भर मं नइ होवय, पशु-पक्षी अउ जीव-जन्तु मं घलो होवत देखे गे हे. इही ओ गुस्सा हे जउन कहूं मइन्ता बाढ़ जथे तब बड़े-बड़े युद्ध अउ महाभारत जइसे भयानक घटना घला हो हे. धन, जन के अगिनत नुकसान हो जथे. इतिहास भरे परे हे, लड़ई-झगरा के बात ले, जेकर कारन सिरिफ गुस्सा हे.

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अभी काल-परन दिन के बात हे. बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के कानन पेंडारी जुलासिकल गार्डन मं बड़े बिहनिया एक ठन घटना होगे. चेरी नांव के एक बाघिन के केज ला टोर (तोड़) के भैरव नांव के बाघ हा खुसर के ओला दबोच लिस. दोनो झन मं जम के छीना-झपटी होइस, एक-दूसर ला दबोचे के कोशिश करिन. बाघ हा बाघिन ला नंगत ले नोच डरिस. आखिर मं बाघिन सके नइ सकिस, अउ जादा खून बहे के सेती ओहर मउका मं परान तियाग दीस. अब ये झगरा के कारण का हे तेला हर कोनो जान सकत हे. जादा चतवार के बता के लइक बात नोहय, जब ये घटना के खबर वन विभाग के अधिकारी अउ करमचारी मन ला मिलिस तब उहां जाके देखते तब पाथे बाघिन दम टोर दे रहिथे. मउका मं ओमन देखिन के बाघिन के तीर मं खून बगरे रहिथे. वन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक उही बाघ हा सन् उन्नीस सौ तेरह मं बाघिन संग संगम करे खातिर एक घौ अउ हमला करे रिहिसे, फेर अपन ओ उदीम मं ओहर सफल नइ होय पाय रिहिसे. जवानी बहुत खराब होथे अउ चढ़त जवानी के समय तो पागल कर देथे चाहे मनखे होय, चाहे जानवर अउ जन्तु. इही ला तो कामवासना कहिथे. कतको बरबाद हो जथे, घर फूंका जथे, खून-खराबा अउ हतिया जइसन घटना के खबर तो आजकल अखबार मन मं रोजे पढ़े ले मिलत रहिथे, ककरो बहू, बेटी, गोसाइन मन उपर कोनो नीयत खराब करिन अउ एकर पता चलगे, तब खून-खराबा के बात तो सहज होगे हे. मइन्ता जहां भोगाइस तहां ले ये चल जथे तलवार, बंदूक अउ फरसा. इही तो गुस्सा के कारन हे.

अइसन अउ एक ठन घटना हे. जंगल मं पुलिस जवान मन के ड्यूटी लगे रगिथे, कोन जंगल हे अउ काबर ड्यूटी लगे रिहिसे तेकर सुरता तो नइ आवत हे. फेर हां बात अइसन हे एक झन पुलिस के जवान ला जब ओहर जात रिहिसे तब ओकर पांव मं नागदेव खुंदागे. ओहर देखे नइ पइस. जब पांव ला उठाइस तब नागदेव ओकर पांव ला काट दीस. ये घटना ला दूसर पुलिस हा देख डरिस. फेर का हे ओहर दउड़ के आथे अउ गुस्सा के मारे डंडे-डंडा मं ओला मार डरिस. नागिन राहय तउन ओ पुलिस ला अपन पति नागदेव ला मारत देख डरिस.

नाग ला मार के पुलिस हा तो आघू बढ़ गे. अपन पति ला मरे देख के नागिन के का दशा होइस होही तउन ला सबो समझ सकत हौ. गुस्सा मं नागिन बगियागे, तन-बदन मं आगी होगे ओकर. नाग ला डंडे-डंडा पीट के मारे राहय तउन पुलिस जवान के ओहर पीछा करिस, अउ ओला अइसे डसना (दंश मारना) शुरू करिस के ओकर होश गायब होगे. ओहर समझ अउ देखे नइ सकिस के कोन ओला काबर डसिस. पछाड़ खाके गिरगे. जंगल के मामला हे, उहां कहां के अस्पताल अउ कहां के बइद गुनिया. जंगल मं ओहर दम टोर दिस. अपन पति ला मारे के बदला ओ नागिन ह अइसन ढंग ले लिस.

गुस्सा आगी तो आय, बम-बारुद के गोला हे, शांत में तब शांत हे, अउ कहूं भड़किस तहां ले तो ओहर ज्वालामुखी बन जथे. अइसने एक ठन कथा आथे जेमा सती संग ओकर ददा (पिता) दक्ष प्रजापति हा का करिस. गुस्सा मं महादेव ला जग (यज्ञ) के नेवता नइ दीस, बाकी सब देवता ला दे रिहिस. भोले बबा के मना करे के बावजूद सती उहां चल दीस, जलत जग मं कूदगे, पति के अपमान ला नइ सहे सकिस. गुस्सा का नइ करावय. होगे उहां तमाशा, जग मं शंकर जी के गण मं जाके विध्वंस कर दीन.

बात अतकी अकन रिहिसे- द्रौपदी के बात अंधरा के बेटा मन अंधरा होथे. बात लग गे दुर्योधन ला. गुस्सा मं ओहर का नइ कर देखाइस. भरे राज दरबार मं ओकर चीरहरन के कोशिश होगे. बात अइसे बढिस के महाभारत होगे. कौरव-पांडव के कई अक्षोहिनी सेना मारे गिस. कौरव कुल के मटियामेट होगे. ओकर कुल मं कोनो दीया बरइया नइ बाचिस. एला कहिथे गुस्सा, जेला एक घौं धर लिस ते फेर बिंदरा बिनाश करके रख देथे. इही पाय के केहे गे हे- काम अउ क्रोध (गुस्सा) ले बच के रेहे मं भलई हे, नइते फेर जय सीताराम हे.

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