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छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: बसतर के कहानी मोर जुबानी

समाज सेवी संगठन, अउ सरकार ह कंधा से कंधा मिलाके चल ही त बस्तर के विकास ल कोनो नई रोक सकय.

समाज सेवी संगठन, अउ सरकार ह कंधा से कंधा मिलाके चल ही त बस्तर के विकास ल कोनो नई रोक सकय.

छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक अउ पौराणिक महत्व के दृष्टि से बसतर के विशेष महत्व हइबे. लोक मान्यता हावे की त्रेता युग में भगवान ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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    लेखक: पवन साहू

    सतर के लोगमन सिधवा अउ भोला -भाला होथे ईहां के साहित्यकार लाला जगदलपुरी बहुत बड़खा साहित्यकार रिहिस हे. बसतर संभाग के मुहाटी म चारआमा   अउ आखरी डाहर कोंटा तक  फईले हईबे. बस्तर संभाग के क्षेत्रफल अंदाजी 40000,,चालीस हजार,, वर्ग किलोमीटर हईबे. बसतर संभाग ल पहली बसतर  राज काहत रिहीस हईबे. बसतर संभाग के महाराज प्रवीर चंद्र भंजदेव ह आन देश म पढ़ई -लिखई ल करीसे. महराज ल बसतर के लोगमन भगवान कस मानत रीहिस हे. जईसे भारत ल सोने की चिड़िया काहत रीहिस न उसने बसतर ल तको सोन के चिरई केहे जाथे . बसतर के बारे में बरनन करना सूरज ल दिया दिखाएं के बराबर होथे.

    आवव अब हमन ह बसतर संभाग के जिला के बारे म  जाने के उदिम करथन. महराज के बेरा म बसतर संभाग ह पहली एके ठन जिला रीहिस हे, फेर बाद में एक-एक करके सात ठन जिला बन गेहे. ईहां पहली राजा ह एके झन राज करत रिहीसे. राजा ह अपन राज ल हरहिंच्छा रखे बर अपन वनवासी सेना मन के साथ म अंग्रेज मन से भी लड़ाई लड़ीस हावे. हमर देश आजाद होवे के बाद बसतर भी भारत सरकार के अधीन हो गीस. फेर बाद में बसतर संभाग ह धीरे-धीरे बसतर, कांकेर दंतेवाड़ा ,कोंडागांव ,बीजापुर, सुकमा अऊ नारायणपुर ये सात जिला में बंटगिस. बसतर संभाग के उत्तर म कांकेर जिला , बीच म कोंडागांव ,नारायणपुर अउ बसतर जिला आथे . दक्षिण में सुकमा ,दंतेवाड़ा अउ बीजापुर जिला ह अाथे.

    दंतेवाड़ा जिला के नाव बसतर के आराध्य देवी माता दंतेश्वरी दाई के नाव म पड़ीस हे. दंतेवाड़ा म  संख्नी अउ डंकिनी नदीया के संगम म दंतेश्वरी माई के जगत प्रसिद्ध मंदिर हाबे. संखनी अउ डंकिनी दूनू नदिया के पानी ह लाल और सफेदअलग-अलग दिखथे. ईहां दुरिहा दुरीहा ले दूसर देश ले भी लोगमन देखे बर आथे. अउ ईहा साल में दू बार कुवार और चैत महीना म माता के दरबार में हजारों की संखिया में अपन मनोकामना जोत जलाथे . ईहा साल में एक बार होली के समय पाख भर बर  फागुन म मेला मड़ई भी भरथे.

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    दंतेवाड़ा ले 35 किलोमीटर दूर म बारसूर नाम के ईस्थान हइबे . जेन ल पुराण परसिद्ध बानासुर ह बसाये रीहिस हाबे . एकरे सेती एकर नाव ह बारसूर पड़ीस हे. बारसूर म एशिया के सबसे बड़े जुड़वा गणेश जी की मूर्ति हाबे. जेकर लंबाई अंदाजी बड़े गणेश जी की लंबाई 5:30 फीट और छोटे गणेश जी के लंबाई अंदाजी 4 :30फीट हाबे. गणेश मंदिर के तीर में ही ममा भाचा के भी मंदिर हावे. ईहां ममा अउ भाचा ह  एक संघरा मंदिर म नइ जाए ,क़ाबर कि अइसन मानता हावय कि ,ममा भाचा एक संघरा जाथे त कोनो न कोनो अनहोनी हो जथे.

    बारसूर बस स्टेशन के पास में ही अड़बड़ पुराना शिव जी के मंदिर बने हावय  .जेन ह  अब्बड जान -जान पथरा के 32 खंभा ले बने हावय.एकरे सेती एला बत्तीसा मंदिर कथे. मेहा जब बारसूर म सौहत पढ़त रेहे हव 1986से -1991 के बीच म तब गणेश मंदिर अउ बत्तीसा मंदिर म बईठ के पढ़व,सच म बड़ अच्छा लगय उन्हा के वातावरण ह मन ल मोह डरे वो समय म उहां  के वातावरण ह  एकदम शांत रीहीस हाबे. बत्तीसा मंदिर के तीर म करीबन 30- 40 एकड़ क्षेत्रफल में बहुत जान तरिया हाबे. जेकर उपयोग खेत -खार के सिंचाई ,नौका -विहार ,अउ मछरी पालन बर करे जाथे. तरिया के तीर म विष्णु जी के भी मंदिर हाबे बारसूर ले 7 किलोमीटर दूरीहा म सातधार नामक जगा म  इंद्रावती नदी म पहाड़ी ले सात धारा ह आकर गिर थे. जेकर सेती एकर  नाम सातधार पड़ीस हाबे. सातों धारा हा एक संघरा मिलके नीचे डाहर जलप्रपात बनाथे. जेहर  अब्बड़  सुग्घर दिखथे .

    इही जगह म बोधघाट परियोजना बनत रिहिस हाबे. फेर पर्यावरण मंत्रालय ले तको अनुमति नई मिलीस त करोड़ों रुपया ल खर्चा करे के  बाद म बंद होगीस. आज कोन्हो बोधघाट परियोजना ह बने रतिस त ईहां के लाखों बेरोजगार मन ल तकॊ रोजगार मिले रतीस. अऊ खेत -खार म सिंचाई करे बर पानी घलक मिलतीस. एकर संघरा- संघरा जल विद्युत परियोजना ले बिजली घलो पैदा होतीस. पर्यटन ल घलो बढ़ावा मिलतीस.आज कोन्हो बोधघाट परियोजना ह बने रतीस  त बारसूर के संगेसंग हमर छत्तीसगढ़ ह घलक चमक जाय रतीस. बांध के पानी ल निकाले बर बोधघाट के डोंगरी पहाड़ी ल खोद  के 500 मीटर की लंबाई तक के बोगदा,,,(सुरंग) घलो बनाएं गेहे. ये सुरंग म एक संघरा 2-2,3-3 ठक हाईवा ह घलो बुलक जाथे. अब ईहां शेर भालू के डेरा हईबे.

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    हमर बस्तर म जंगल अउ जंगल ले प्राप्त होवईया वन- औषधि, लकड़ी और वन्य उत्पाद के कोनो कमी नई हे. इही बस्तर म जगत प्रसिद्ध बैलाडीला के पहाड़ी म अपार मात्रा म अब्बडअकन लोहा के खदान हईबे. जेन हर  छत्तीसगढ़ अउ भारत म  अब्बड महत्व अउ पहिचान रखत हईबे. ईहां के चित्रकूट अउ तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर के गुफा, दंतेश्वरी माई के मंदिर ह दुनिया भर म पर्यटक मन के आकर्षण के विशेष ठउर के रूप म जाने जाथे. ईहां के शीशम, सागौन के लकड़ी अउ समृद्धिशाली आदिवासी संस्कृति ह जम्मो भारत भर म विशेष पहचान बना थे. एकर बावजूद नक्सलवाद के समस्या के चलत बस्तर के जईसन विकास होना रिहीस वो ह आज तक नई हो पाईस हे. अगर इमानदारी से  स्थानीय निवासी, जनप्रतिनिधि, समाज सेवी संगठन, अउ सरकार ह कंधा से कंधा मिलाके चल ही त बस्तर के विकास ल कोनो नई रोक सकय.

    Tags: Chhattisgarh Articles, Chhattisgarh news, Chhattisgarhi, बस्तर

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