छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: बसतर के कहानी मोर जुबानी

समाज सेवी संगठन, अउ सरकार ह कंधा से कंधा मिलाके चल ही त बस्तर के विकास ल कोनो नई रोक सकय.
समाज सेवी संगठन, अउ सरकार ह कंधा से कंधा मिलाके चल ही त बस्तर के विकास ल कोनो नई रोक सकय.

छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक अउ पौराणिक महत्व के दृष्टि से बसतर के विशेष महत्व हइबे. लोक मान्यता हावे की त्रेता युग में भगवान श्री राम, सीता मैया जी और लखन लाल जी के साथ बसतर के डोंगरी -पहाड़ी म बनवास के बहुत लंबा बेरा ल बिताय रीहिस. त आवव छत्तीसगढ़ के अईसन ऐतिहासिक और पौराणिक भुइंया के दर्शन करथन.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 6:45 PM IST
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लेखक: पवन साहू

सतर के लोगमन सिधवा अउ भोला -भाला होथे ईहां के साहित्यकार लाला जगदलपुरी बहुत बड़खा साहित्यकार रिहिस हे. बसतर संभाग के मुहाटी म चारआमा   अउ आखरी डाहर कोंटा तक  फईले हईबे. बस्तर संभाग के क्षेत्रफल अंदाजी 40000,,चालीस हजार,, वर्ग किलोमीटर हईबे. बसतर संभाग ल पहली बसतर  राज काहत रिहीस हईबे. बसतर संभाग के महाराज प्रवीर चंद्र भंजदेव ह आन देश म पढ़ई -लिखई ल करीसे. महराज ल बसतर के लोगमन भगवान कस मानत रीहिस हे. जईसे भारत ल सोने की चिड़िया काहत रीहिस न उसने बसतर ल तको सोन के चिरई केहे जाथे . बसतर के बारे में बरनन करना सूरज ल दिया दिखाएं के बराबर होथे.

आवव अब हमन ह बसतर संभाग के जिला के बारे म  जाने के उदिम करथन. महराज के बेरा म बसतर संभाग ह पहली एके ठन जिला रीहिस हे, फेर बाद में एक-एक करके सात ठन जिला बन गेहे. ईहां पहली राजा ह एके झन राज करत रिहीसे. राजा ह अपन राज ल हरहिंच्छा रखे बर अपन वनवासी सेना मन के साथ म अंग्रेज मन से भी लड़ाई लड़ीस हावे. हमर देश आजाद होवे के बाद बसतर भी भारत सरकार के अधीन हो गीस. फेर बाद में बसतर संभाग ह धीरे-धीरे बसतर, कांकेर दंतेवाड़ा ,कोंडागांव ,बीजापुर, सुकमा अऊ नारायणपुर ये सात जिला में बंटगिस. बसतर संभाग के उत्तर म कांकेर जिला , बीच म कोंडागांव ,नारायणपुर अउ बसतर जिला आथे . दक्षिण में सुकमा ,दंतेवाड़ा अउ बीजापुर जिला ह अाथे.



दंतेवाड़ा जिला के नाव बसतर के आराध्य देवी माता दंतेश्वरी दाई के नाव म पड़ीस हे. दंतेवाड़ा म  संख्नी अउ डंकिनी नदीया के संगम म दंतेश्वरी माई के जगत प्रसिद्ध मंदिर हाबे. संखनी अउ डंकिनी दूनू नदिया के पानी ह लाल और सफेदअलग-अलग दिखथे. ईहां दुरिहा दुरीहा ले दूसर देश ले भी लोगमन देखे बर आथे. अउ ईहा साल में दू बार कुवार और चैत महीना म माता के दरबार में हजारों की संखिया में अपन मनोकामना जोत जलाथे . ईहा साल में एक बार होली के समय पाख भर बर  फागुन म मेला मड़ई भी भरथे.
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दंतेवाड़ा ले 35 किलोमीटर दूर म बारसूर नाम के ईस्थान हइबे . जेन ल पुराण परसिद्ध बानासुर ह बसाये रीहिस हाबे . एकरे सेती एकर नाव ह बारसूर पड़ीस हे. बारसूर म एशिया के सबसे बड़े जुड़वा गणेश जी की मूर्ति हाबे. जेकर लंबाई अंदाजी बड़े गणेश जी की लंबाई 5:30 फीट और छोटे गणेश जी के लंबाई अंदाजी 4 :30फीट हाबे. गणेश मंदिर के तीर में ही ममा भाचा के भी मंदिर हावे. ईहां ममा अउ भाचा ह  एक संघरा मंदिर म नइ जाए ,क़ाबर कि अइसन मानता हावय कि ,ममा भाचा एक संघरा जाथे त कोनो न कोनो अनहोनी हो जथे.

बारसूर बस स्टेशन के पास में ही अड़बड़ पुराना शिव जी के मंदिर बने हावय  .जेन ह  अब्बड जान -जान पथरा के 32 खंभा ले बने हावय.एकरे सेती एला बत्तीसा मंदिर कथे. मेहा जब बारसूर म सौहत पढ़त रेहे हव 1986से -1991 के बीच म तब गणेश मंदिर अउ बत्तीसा मंदिर म बईठ के पढ़व,सच म बड़ अच्छा लगय उन्हा के वातावरण ह मन ल मोह डरे वो समय म उहां  के वातावरण ह  एकदम शांत रीहीस हाबे. बत्तीसा मंदिर के तीर म करीबन 30- 40 एकड़ क्षेत्रफल में बहुत जान तरिया हाबे. जेकर उपयोग खेत -खार के सिंचाई ,नौका -विहार ,अउ मछरी पालन बर करे जाथे. तरिया के तीर म विष्णु जी के भी मंदिर हाबे बारसूर ले 7 किलोमीटर दूरीहा म सातधार नामक जगा म  इंद्रावती नदी म पहाड़ी ले सात धारा ह आकर गिर थे. जेकर सेती एकर  नाम सातधार पड़ीस हाबे. सातों धारा हा एक संघरा मिलके नीचे डाहर जलप्रपात बनाथे. जेहर  अब्बड़  सुग्घर दिखथे .

इही जगह म बोधघाट परियोजना बनत रिहिस हाबे. फेर पर्यावरण मंत्रालय ले तको अनुमति नई मिलीस त करोड़ों रुपया ल खर्चा करे के  बाद म बंद होगीस. आज कोन्हो बोधघाट परियोजना ह बने रतिस त ईहां के लाखों बेरोजगार मन ल तकॊ रोजगार मिले रतीस. अऊ खेत -खार म सिंचाई करे बर पानी घलक मिलतीस. एकर संघरा- संघरा जल विद्युत परियोजना ले बिजली घलो पैदा होतीस. पर्यटन ल घलो बढ़ावा मिलतीस.आज कोन्हो बोधघाट परियोजना ह बने रतीस  त बारसूर के संगेसंग हमर छत्तीसगढ़ ह घलक चमक जाय रतीस. बांध के पानी ल निकाले बर बोधघाट के डोंगरी पहाड़ी ल खोद  के 500 मीटर की लंबाई तक के बोगदा,,,(सुरंग) घलो बनाएं गेहे. ये सुरंग म एक संघरा 2-2,3-3 ठक हाईवा ह घलो बुलक जाथे. अब ईहां शेर भालू के डेरा हईबे.

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हमर बस्तर म जंगल अउ जंगल ले प्राप्त होवईया वन- औषधि, लकड़ी और वन्य उत्पाद के कोनो कमी नई हे. इही बस्तर म जगत प्रसिद्ध बैलाडीला के पहाड़ी म अपार मात्रा म अब्बडअकन लोहा के खदान हईबे. जेन हर  छत्तीसगढ़ अउ भारत म  अब्बड महत्व अउ पहिचान रखत हईबे. ईहां के चित्रकूट अउ तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर के गुफा, दंतेश्वरी माई के मंदिर ह दुनिया भर म पर्यटक मन के आकर्षण के विशेष ठउर के रूप म जाने जाथे. ईहां के शीशम, सागौन के लकड़ी अउ समृद्धिशाली आदिवासी संस्कृति ह जम्मो भारत भर म विशेष पहचान बना थे. एकर बावजूद नक्सलवाद के समस्या के चलत बस्तर के जईसन विकास होना रिहीस वो ह आज तक नई हो पाईस हे. अगर इमानदारी से  स्थानीय निवासी, जनप्रतिनिधि, समाज सेवी संगठन, अउ सरकार ह कंधा से कंधा मिलाके चल ही त बस्तर के विकास ल कोनो नई रोक सकय.
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