छत्‍तीसगढ़ी विशेष: छत्तीसगढ़िया के जेवन मा समाय फर फूल पाना कांदा अउ जर

छत्तीसगढ़ मा जर ला चलो साग राँधके खाय जाथे.
छत्तीसगढ़ मा जर ला चलो साग राँधके खाय जाथे.

भाजी हा पुष्टई के संगे संग रोग रई के दवई घलो होथे. राखड़ी भाजी, मुरईभाजी पेट सफई करथे, कुलथी भाजी हा पथरी ला गिराथे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 10:33 AM IST
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संसार मा सबे जीव देह मा एक अंग हावय "पेट" जौन ला रोज भरेबर ओहा नाना रिकिम के उदीम करथे अउ किसम किसम के जिनिस ला एमा डारथे. मनखे हा जौन जिनिस ला डारथे ओला जेवन कहिथे. जेवन हा घलो नाना किसम के जिनिस ला मिंझार के बनाय जाथे. मनखे के जुड़ाव प्रकृति ले होथे.कहे जाथे कलजुग मा मनखे के प्रान अन्न मा माने गय हे.


 छत्तीसगढ़ मा देवी देवता के मानता हे इहाँ के गाँव खार डीही डोंगर मा नानम रुप मा एमन विराजमान हवे. छत्तीसगढ़ ला राम के दाई कौशिल्या के मइके ले जोड़ के देखे जाथे. एखर सेती इहाँ के मनखे राम भगत माने जाथे. राम अउ किसन भगवान एके रुप होय ले इहाँ के मनखे अपन जेवन मा दूध दही मही, फर फूल पाना काँदा जर मन मिंझरगे. छत्तीसगढ़ मा आदिवासी जनजाति के रहवास जादा संख्या मा होय ले इहाँ के खवाई पीयई मा इँखरो जिनिस मिंझरगे हावे. आदिवासी मन शिव रुप बड़ादेव अउ डोंगरी के माई मन के पूजा करथें. उँखर ठउर तीर एमन पूजई करथे. जंगल भीतरी मा रहे के सेती इँखर जेवन मा फर फूल पाना कांदा जर के संग मछरी, कुकरी, बोकरा, सूरा जइसन जीव के मास हा घलो जेवन मा समागे हावय. एमन चिराई चिरगुन, चिटरा, मुसवा ला घलो मारके खा डारथे अउ पेट भरथे.


 छत्तीसगढ़ ला धान के कटोरा कहे जाथे. इहाँ धान के 1500 किसम मिलथे. इहाँ के रहइया मन तीनों चारों बखत चउँर ला कलेवा, भात, बासी के रुप मा खाथे पीथे. छ्त्तीसगढ़िया मन जेवन मा तीन किसम के जिनिस ला मिंझारथे. दूध दही मही अउ फर फूल के रस, माँस अउ फर फूल पाना कांदा जर के साग भाजी. एमा उरीद, रहेर, राखड़ी, मूँग, मसूर, कुल्थी, चना के दार अउ अरसी तिली मूंग फली के तेल घलो होथे. मशाला मन घलो इही फर फूल डारा पाना काँधा जर के रुप होथे.


 छत्तीसगढ़ मा भाजी खाय के परंपरा पुरखौती आय. भाजी हा कोनों केंवरी पउधा अउ नार के पाना होथे. हमर पुरखा मन साठ सत्तर किसम के भाजी बताय हवय. सबो भाजी सबो डहर नइ मिलय. जौन भाजी मिलथे ओमन उही डहर के भाजी ला जेवन मा मिंझारथे. अइसे तो भाजी मा सुवाद नइ रहय फेर तेल हरदी नून मिरचा डार के एला सुवाद वाला बनाय जाथे. कन्हो कन्हो भाजी मन दही मही बरोबर खट्टा होथय. जइसे अमारी भाजी, पटवा भाजी, अमली के कुरमा.


 भाजी हा पुष्टई के संगे संग रोग रई के दवई घलो होथे. राखड़ी भाजी, मुरईभाजी पेट सफई करथे, कुलथी भाजी हा पथरी ला गिराथे. लालभाजी, पाला हा रकत बढ़ाय मा बने होथे. पाला मा बिटामिन कैल्सियम होथे. मुनगाभाजी बीपी ला बने बने राखथे. करमत्ताभाजी हा जर बुखार मा खाय जथे. अइसने गोंदलीभाजी, खेड़हाभाजी, चनाभाजी, चुनचुनियाभाजी, तिवराभाजी, बोहारभाजी, कांदाभाजी, बथुवाभाजी, बिलईपोटाभाजी, मास्टरभाजी, गुमीभाजी, चरोटाभाजी, बर्रेभाजी पोईभाजी, सरसोंभाजी,  तिनपनियाभाजी, चेंच, मुस्केनीभाजी, कोहड़ाभाजी, बनबर्रे, मेथीभाजी, दारभाजी, पीपरभाजी, कुसुमभाजी, जरीभाजी चौलाईभाजी, खोटनीभाजी, बंधेभाजी, उरीदभाजी, गोभीभाजी ला घलो बेरा बखत मा खाय जाथे. धनिया पाना ला साग मा संघेरे जाथे, चटनी मा पीसे जाथे.


 अइसने नाना किसम के फर ला साग बनाय जाथे केरा, तुमा, कोड़हा(मखना), मुनगा, सेमी, बरबट्टी, कटहर, डोड़का, तरोई, भाँटा, कुंदरू, चुरचुटिया, रमकेलिया, करेला, खेक्सी, बंगाला पताल, खीरा, परवर, ढेमसा, बटरा ला साग बनाय जाथे एमा आमा अमली ला कोनों कोनों संग मिझारे जाथे. मिरचा घलो फर आय जौन ला साग मा मिंझारे जाथे. अइसने डारा मा जरी जौन ला खेड़हा घलो कहे जाथे, बाँस के करील, जिमीकांदा के पोंगा ला साग राधे जाथे. माई लोगिन मन अपन अपन मा क्षेत्र मा मिलत नाना किसम के डारा ला साग बना लेथे. बांस के करील हा पेट के कीरा ला मारथे.


 साग मा फूल ला घलो राँधे जाथे एमा सबले जादा अउ सबके पसंग के साग आवय फूलगोभी. छत्तीसगढ़ मा जर ला चलो साग राँधके खाय जाथे. मुरई, ढेस, गाजर अइसने जर आय जौन ला साग मा मिंझारे जाथे. जंगल मा रहइयामन ला कांदा कुसा अड़बड़ मिलथे एमा जिमीकांदा, कोचइकांदा, नांगरकांदा, सेमरकांदा, केऊ कांदा, केंवटकांदा, डाँगकांदा, भैसढेठी मन ला साग बनाय जाथे. जिमी कांदा हा बवासीर ला बने करेबर अउ रकत ला सफा करे के दवाई घलो आय. केउकांदा खाय ले बात पीत बने होथे.अइसने प्रकृति ले जुड़े सरईबोड़ा, फुटू घलो ला साग मा मिंझारे जाथे. आलू गोंदली मन घलो कांदा आय जेला  संसार भर मा खाय जाथे.अदरक, हरदी हा घलो कांदा आय जेला साग मा मिंझारे जाथे.हरदी ला सुखा के पीस के डारे जाथे.

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