छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: लोक जीवन म चापड़ा चटनी

ईहां पर एक खास चीज के मसलहा अउ स्वादिष्ट चीज बनाए जा थे. जेला सब्बों झन अब्बड चाव ले खाथे. जे ला एक परकार के लाली चाटी ले बनाय जाथे. जेला चापडा चटनी कथे.

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  • Last Updated: October 9, 2020, 4:31 PM IST
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संगी हो आप सब्बो झन ह जानत  हो कि, हमर भारत देश ह विविधता ले भरे हईबे. वैसने किसम ले छत्तीसगढ़ राज्य के जम्मो बस्तर अंचल ह घलक विविधता ले भरे हईबे. जिंहा परवत, पहाड़ अउ डोंगरी पहाड़ी म किसम किसम के खाय पिए के जीनिस पाय जाथे. पहली जबाना म छत्तीगढ़ म एक अब्बड पुराना गीत ह अब्बड परसिद्ध रीहिस हे. ‘भाटा के भरता पताल के चटनी, काबर रिसागे दामाद बाबू दुलरू. ‘अर्थात जीहां खाना म पाताल (टमाटर) के चटनी हैबे त दमान बाबू ह काबर रिसागेहे. छत्तीसगढ़ म सगा मन (मेहमान) के चटनी के संग खास कीसम बर सुवागत करे जाथे. दूसर -दुसर राज म अलग-अलग परकार के चटनी बनाए जाथे.

जेला साग-भाजी ले बनाए जाथे. पर बस्तर के बात ह अलग हईवे. ईहां पर एक खास चीज के मसलहा अउ स्वादिष्ट चीज बनाए जा थे. जेला सब्बों झन अब्बड चाव ले खाथे. जे ला एक परकार के लाली चाटी ले बनाय जाथे. जेला  चापडा चटनी कथे. चापड़ा के चटनी ह बस्तर के संग-संग जम्मों छत्तीसगढ़ म तको जाने जाथे. फेर ये ह बड़े-बड़े बीमारी ल भगाए अउ मिटाए के घलक काम करथे. स्वाद के संग -संग औषधि महत्व के चापड़ा चटनी इहां के लोग मन के परमुख खाद्य म एक हरे.

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ईहां के लोग मन के खानपान म तको विविधता पाए जाथे. इंहा के परमुख खाद्य पदार्थ म भात, उरीद दार, उसन्हा  साग, चउर ले बने मद्य पेय पदार्थ, ज़ेला लांदा कइथे. इहां के लोग मन ल लांदा ह खूब भाथे. वैसने ढंग ले मड़िया से मडिया पेज तको बनाथे. गर्मी के दिन म जब अब्बड गर्मी पड़थे त गर्मी ले बचे बर मडिया के पेज पिये ले सब्बो गरमी ह उतर जाथे. मडिया पेज के साथ में चापड़ा के चटनी, कच्‍चा आमा के चटनी अउ इमली के चटनी मडीया पेज के सुवाद ल अउ बढ़ा देथे. त अावव आज हमन चापडा चटनी के बारे म जाने के उदीम करथन.
(1) काय हरे चापडा (मांटरा)
बसतर अंचल में ईहां के लोग मन के हर आवश्यकता के चीज ह जंगल ले पूरा होथे. इही म एक ठन चापड़ा चटनी तको हरे. बसतर अंचल के हल्बी बोली म येला चापड़ा कथे. हिंदी म लाल चींटी, अंग्रेजी मां रेड एंट, अउ छत्तीसगढ़ी म येला मांटरा कथे.

(2) चापड़ा कहां पाए जाथे
चापड़ा (मांटरा ) ह चवड़ा  पत्ता वाला ,झुरमुट, अउ अब्बड झुनकुर पत्ता वाला जईसे सरगी, करण, अशोक, पिकरी अउ बड जैसे रुख रई म पाए जाथे. झुनकुर अउ चौड़ा पत्ता वाला रुख रई म चापडा ल घर बनाए बर सोहलियत होथे. एकरे सेती अइसन किसम के रुख रई म अब्बड़ मातरा म चापड़ा ह पाए जाथे.

(3) चापड़ा कईसे बनाथे अपन घर
चापड़ा ह अपन मुंहू के लार ले कई ठन पत्ता ल एके संघरा जोड़ के गोल आकार म अपन खोंदरा ल बनाथे. खोंदरा म हजारों के संखिया म चापड़ा मन रहीथे. उही खोंदरा म चापड़ा मन अंडा देथे. अउ ओकर अंडा ह सफेद रंग के होथे.

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(4) कईसे बनाथे चापड़ा चटनी
जब चापड़ा के खोंधरा म चापड़ा अउ अंडा ले भरे रथे त ओकर खोंदरा ल तोड़ के बांस के झेंझरी में रखते. अउ जोरदार झेंझरी ल हलाथे त चापड़ा हा मूर्छा होके मर जाथे. ताहन वोला दोना म रख लेथे. अउ घर म लान के पानी म धोके ओमा आदा, मिर्चा, धनिया, लसुन अउ नुन ल एक संघरा मिलाके सिलबट्टा म चिकना पीस देथे. ताहन चापड़ा चटनी बन जथे. चापड़ा चटनी ल फेर भात के संग, मडिया पेज के संग अउ महुआ के दारू बर चखना असन तकों खाथे. एकर सूवाद ह अम्मट असन  होथे. ईहां के लोग मन ल चापड़ा चटनी ह अब्बड़ पसंद हैबे. बसतर पर्यटन म घुमे ल अवईया देश- परदेश के सैलानी मन तको चापड़ा चटनी ल पसंद करथे.

(5) खासियत
लोक मान्यता हावय कि अम्ल पित्त होय म चापड़ा ल रात म डबका के बिहनचे खाली पेट पिए म मूड पीरा ह दूर होथे. अउ  कोन्हो ल मलेरिया जर धर लेते  त ओला चापड़ा चटनी खवाथे. अउ  वोकर पूरा बदन म चापड़ा ल चबवाथे. त आदमी के  मलेरिया जर ह तको उतर जाथे. एकरे सेती चापड़ा ल लोगन मनके प्राण रक्षक तको कईथे. चापड़ा के गार ल साग तको बनाथे. अउ चापड़ा ल पिचकोल के अम्मट साग घलो बनाथे. चापड़ा म कई परकार के पोषक तत्व पाए जाथे. अउ रोग प्रतिरोधक तत्व तको पाए जा जाथे.
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