छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: आदिवासी संस्कृति म राज वृक्ष सरगी (सरई ) का महत्व

सगरी रुख के अतेक जियादा महत्व के कारण सरगी रूख ल छत्तीसगढ़ सरकार ह राज रुख (राज्य वृक्ष) घोषित करे हईबे.
सगरी रुख के अतेक जियादा महत्व के कारण सरगी रूख ल छत्तीसगढ़ सरकार ह राज रुख (राज्य वृक्ष) घोषित करे हईबे.

सरगी के रुख के बिना आदिवासी भाई-बहन मन के संस्कृति ह अधूरा हाबे. काबर के कि उंकर सबो सुख-दुख के कारज ह सरगी रुख के बिना नई हो सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 12:18 PM IST
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संगवारी मन आप सब्बो झन जानथो कि हमर देश म अलग- अलग किसम के अब्बड अकन रुख -रई पाए जाथे. जेकरे सेती अलग-अलग बेरा म अलग-अलग जगा म आनी-बानी के रुख -रई अउ फर -फूल ह देखे बर मिलथे. जेहर हमर भुइंया के शोभा ल घलो बढाथे. संगे -संग हमर पर्यावरण के तापमान ल घलो बनाए रखथे. भुइयां म हर रुख -रई के अब्बड महत्व हईबे. कोन्हो के महत्व जादा रथे त कोन्हो के महत्व एककन.

छत्तीसगढ़ राज के बस्तर अंचल म अब्बड़ अकन क्षेत्रफल में सरगी के जंगल हावय. एकरे सेती येला सरगी के द्वीप के नाम ले तको जाने जाथे. सरगी रुख बस्तर के आदिवासी संस्कृति के मुख्य हिस्सा हरे. त आव आज हमन हमर राज वृक्ष( रुख )सरई के बारे में जानथन. बस्तर क्षेत्र म येला सरई अउ हिंदी म साल वृक्ष के नाव से जाने जाथे. सरगी के रुख ह बस्तर के लाली और डोंगरी पठारी माटी म जादा पाय जाथे. सरगी रुख के ऊंचाई ह अंदाजी 30- 35 मीटर ऊंचा होथे. सरगी के रूख के खाल्हे ले ऊपर डाहन ल देखथन त रुख के मुंडी ल देखत- देखत हमर टोटा तको पीरा ज़थे, अउ मुड़ के पागा ह खाल्हे म गिर जथे. अतेक ऊंचा होथे सरगी के रुख ह. सरगी के रुख के बिना आदिवासी भाई-बहन मन के संस्कृति ह अधूरा हाबे. काबर के कि उंकर सबो सुख-दुख के कारज ह सरगी रुख के बिना नई हो सके. त आवव जानथन सरगी रूख के आदिवासी भाई - बहन के जीवन म कायअउ कतेक महत्व हईबे.

(1) पाना (पत्ता) - बस्तर के आदिवासी भाई-बहन मन, हर सुख -दुख म सरई के पत्ता के उपयोग पतरी, दोना और बीड़ी बनाए बर करथे. छठठी - बरही अउ मरनी -हरणी के समय समाज के सब्बोझन लोगमन भुईया म बैठ के पतरी म भात खाथे. अउ दोना में नाश्ता करथे. अउ पानी घलो पीथे. लईका  मन के बिहाव के समय सरगी पत्ता के मड़वा तको डालथे.



(2) फूल- सरगी के फूल ह सफेद रंग के सूग्घर मनमोहक होथे. ये ह गुच्छा म फुल्थे. अउ एकर फूल केआयुर्वेदिक दवाई तको बनाथे.
(3) बीजा (बीज) - सरगी बीजा के तेल निकाले जाथे. जेकर उपयोग दीया जलाए बर अउ साग-सब्जी बनाए बर  करे जाथे. सरगी के बीजा ले साबुन अउ सौंदर्य प्रसाधन के सामान घलक  बनाए जाथे. एकर अलावा सरगी बीजा ल  बेच के पईसा तको कमाथे.

(4) डगाली (तना) - तना के उपयोग ईहां के ग्रामीण मन दतवन के रूप में करथे.  सरगी के दतवन के राहत दूसरा कोनो दतवन ल नई करे. सरगी रुख के  डगाली के अब्बड सुग्घर दतवन बनथे. जेकर से दांत घलो मजबूत होथे. गर्मी के दिन म  जब अब्बड घाम लागथे अउ कोनो डाहर पानी नई मिले त बाहा भर कच्चा डारा ल काट के ओकर पानी ल दोना म झोंक के अपन प्यास ल घलक बुझाथे.

(5) लासा =सरगी के लासा के उपयोग धार्मिक कारज बर करे जाथे.एकर लासा ल धूपबत्ती के रूप में खासतौर पर पूजा -पाठ म करे जाथे. एकर अलावा कान के बीमारी के दवा अउ जूता पालीस तको बनाए जाथे.

(6) बोड़ा- बसतर म बरसात शुरू होते साठ सरई रुख के खाल्हे माटी म बोड़ा अब्बड मातरा म पाए जाथे. एमा अब्बड मातरा म प्रोटीन, बिटामिन अउ फाइबर घलो पाए जा थे. शुरुआत में एकर कीमत 2000 से ₹3000 किलो तक बिकथे. बोडा ले दिल के मरीज और ब्लड प्रेशर वाला मन बर दवा  घलो बनाएं पर शोध चलत हे. बड़े-बड़े होटल म एकर अब्बड मांग हाबे.

बस्तर बोड़ा हमार देश के सबसे महंगा सब्जी के नाम से जानत हाबे. बस्तर के मनखे मन ये मउसम म लईका से लेके सियान तक घर से बाहिर निकल के सरगी पेड़ के खालहे म बोड़ा निकालत दिखथे. ईहां के मनखे मन अब्बड चाव से बोड़ा साग ला खाथे. बोडा ह दो प्रकार के होथे (1) जात बोड़ा (2) लाखड़ी बोड़ा. जात बोड़ा करिया होते और लाखड़ी बोड़ा सफेद होथे. जात बोड़ा ह अब्बड स्वादिष्ट होथे. जेकर सेती एकर मांग बाजार में जादा हईबे. अउ अब धीरे-धीरे दुसर राज में तको एकर मांग ह बड़त हावय.

(7) फुटू (मसरूम) बस्तर में जइसन बोडा ल खाथे उसने किसम ले फुटू तको बस्तरिया संस्कृति में रचे बसे हाबे. ईहां के लोगन मन फूटू के अब्बड शौकीन हाबे. ईहां कई प्रजाति के फूटू मिलथे. सरगी रुख के तीर दियार के भिभोरा म अब्बड डारी फूटू ह फुटथे. अउ सडे पैरा म पईरा फूटू तको मिल्थे. येकर अलावा छतरी फूटू अउ लकड़ी फूटू तको मिलथे. फूटू तको बोड़ा कस महंगा रथे. तभो ले फूटू खाय बर नई छोड़े. फुटू ह कडू तको होथे. यदि कोन्हो ह कडू  फूटू ल खा लेहि त बीमार तको पड़ जाथे.

(8) औषधि- यहां के लोग मन सरगी के बीजा, तेल, तना, छिलका, पत्ता, और फूल के उपयोग कई प्रकार के बीमारी के इलाज बर करथे. जैसे घाव भरे बर, हड्डी जोडे बर, उल्टी दस्त रोके बर, कान के संक्रमण रोके बर, बहरापन दूर करे बर, चेहरा चमकाय बरअउ दाद -खाज- खुजली मिटाय बर घोलो आयुर्वेद के रूप में करे जाथे.

(9) लकड़ी - यहां के स्थानीय लोगन मन सरई के लकड़ी के घर के दरवाजा, चौखट, खिड़की, कुर्सी, टेबल, सोफा, मचान, पुलिया, ढोंगी अउ खेती के औजार घलो बनाथे. एकर रंग भुरा अउ कत्था रंग के होथे.

(10) खासियत - सरई के लकड़ी ल काटे के बाद म अब्बड दिन ले पानी में डुबो के रखे जाथे. ताकि लकड़ी ह अउ कड़ा हो सके. सरगी ह अब्बड गरु, अब्बद कड़ा अउ अब्बड टिकाऊ घलक होथे. ये लकड़ी ह जतकी पानी में भीगे रथे ओतकी टिकाऊ अउ कड़ा होथे. एकरे सेती सरगी लकड़ी ले भारत सरकार ह रेलगाड़ी के स्लीपर तको बनाथे. सगरी रुख के अतेक जियादा महत्व के कारण सरगी रूख ल छत्तीसगढ़ सरकार ह राज रुख (राज्य वृक्ष) घोषित करे हईबे.
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