छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: चुनई आगे, चुनई आगे नाम के आगू छप्पा चेपागे

छत्तीसगढ़ मा जनजाति आरक्षित सीट मा चुनई के बिगुल बाज गेहे. मरवाही विधानसभा क्षेत्र नवा-नवा जिला बने हे-मरवाही-गौरेला-पेंड्रा. इहां थ्री-इन-वन किस्सा चलत हे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 9:37 PM IST
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बीच रद्दा मा चुनाव होवत हे. एला उप-चुनाव कहिथें. हमर छत्तीसगढ़ अउ मध्य प्रदेश के चुनई के चर्चा होटल, ठेला अउ कतको जगा चले लगिस. तीर-तार मा जेन फदके हे तेकर हाल बेहाल हे. कोन आदमी कोन डाहर के हरे जानबच नइ होवत हे. चम्बल असन जगा मातगेहे. मातगेहे माने कलारी वाला माते के बात नइ होवत हे. अउ होही घलोक फेर अभी चुनई होवत हे तेखर उम्मीदवार मन के बिरादरी के गोठ बात हो जाना चाही. प्रजातंत्र हे जी सब्बो स्वतंत्र हे. अपन हिसाब ले रेंगही.. फेर एक बात आगे हे जी काबर के जमाना के हिसाब देखो-का जमाना आगे हे, थोकिन घुच के रेंगे ला परही, बइठे के जगा देबे ते सुते के जगा मांगथें.


पहली जोर सोर लगा के चिल्लाइन फलाने भईया को फलाने छाप मा वोट देना हे. अब भईया के पाला बदल गेहे. कई झन कटखाके कलेचुप बईठ गेहे , अउ कतको झन बर तिहार फेर आगे हे. दू घांव वोट डारहीं पांच साल मा. लउंद के महिना , असन उकट बर बने सीजन आगे. आंसो कुंवार के महीना मा लउंद के महीना परे हे. केहे गेहे कुंवार के महीना भारी जियानथे. कुंवरता घाम मा खेती किसानी करइया के करिया पछीना निकल जाथे तइसे हमर सियानमन के अनुभो बताथे. अबतो अलटी - पलटी मार खागे सट्टा वाला कहिथे विरोधी से मार खागे. वाह रे खेलइया हो अइसन खेल मताना रिहिस कहिके ते जाने नइ रेहे का. अब तोर नाम मा छप्पा बदलगे. कतको परयास करले अचेतन मन मा तोला चेत लगा करोए असन लागत होही.


छत्तीसगढ़ मा जनजाति आरक्षित सीट मा चुनई के बिगुल बाज गेहे. " मरवाही विधान सभा क्षेत्र " नवा - नवा जिला बने हे - मरवाही - गौरेला - पेंड्रा. इहां थ्री - इन - वन किस्सा चलत हे. कोण बदल गेहे. अब देखव करवट बदलही के नहीं.


नवा - नवा छबाए भिथिया ला गोल्लर उधेनेच लेथें. छबना झन ओदरय कहिके गरुवा ढिले के बेरा घर के लइकामन चंवरा मा खड़ा होके हाथ -हुत करत रहथें. छप्पा वाला मन अपन - अपन करार करे के फोटू छापे वाला कागज घरो - घर बांटथें. बंटई घलोक एक ठन बुता ए. रोजी , पानी के चरदिनिया जुगाड़ मा रेट घलोक अखमुंदा झोंकले चरवाही नइ ते बरवाही असन. बरवाही पवइया अतका निथार लेथे के ओदिन बछरू के का होही तेनो बात ला नइ सोंचय. अब नेता मन के का लेबे. बने कलो - कलो के , कलो - कलो के राखथें. एकंगू जरे झन पाए अइसन सोंच ला बगराय बर गांव - गांव मा पहरा लगाथें. अपन पहुंचे नइ पाए राहय ऊंहा जगवारी होगे. हो हल्ला चलथे.


मितनहा सगा बरोबर भारी मान होथे. पइसा काखर ए तोला अजम नइये फेर तोरे हाथ ले लाड़ू बंटवाही. मजा लेवइया के मजा अउ सजा पवइया के सजा. मजा अउ सजा दुनो पांच परगट चुनई के रिजल्ट मा आ जाथे.






"अइसे हे हमर चुनई के सोर.
पांचे साल लागही तें निटोरत ले निटोर "


बांटे भाई परोसी असन
होगे हावय हमर किस्सा ,
मध्य प्रदेश अउ छत्तीसगढ़ के हमन जनता हरन
फेर कहां हे बतादव हमर हिस्सा


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