छत्तीसगढ़ी विशेष: बस्तर के जीवनदायिनी इंदिरावती

प्राकृतिक सौंदर्य ले भरा- पूरा इंद्रावती नदी का ईहां के सभ्यता अउ संस्कृति म विशेष महत्व रखथे. इंद्रावती नदी ह ईहां के लोगन मन के आस्था और भक्ति के प्रतिक हरे.

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  • Last Updated: October 27, 2020, 12:15 AM IST
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लेखक: पवन कुमार साहू

संसार म सब्बो सभ्यता के शुरुआत  ह नदी  के तीर  म होइस हईबे. एकरे सेती मानव समुदाय के जीवन, सभ्यता अउ संस्कृति म नदी मन के खास महत्व हईबे. उसने अइसने प्राकृतिक सौंदर्य ले भरा- पूरा इंद्रावती नदी का ईहां के सभ्यता अउ संस्कृति म विशेष महत्व रखथे. इंद्रावती नदी ह ईहां के लोगन मन के आस्था और भक्ति के प्रतिक हरे. एकरे सेती छत्तीसगढ़ के राज गीत –
अरपा पइरी के धार, महानदी हे अपार !
इंदिरावती ह पखारय तोर पइयां! जय हो, जय हो, छत्तीसगढ़ मईया!



ये गीत म इंदिरावती नदी ल विशेष ईस्थान दे हैबे . एकर मतलब ये हरे कि इंदिरावती नदी ह न सिरफ बसतर के आसपास म बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ म  तको अब्बड विशेष स्थान हैबे.इंदिरावती नदी ह अपन जल प्रवाह ले ईहां के लोगन मन के जीवन यापन म, पशु- पक्षी ,जीव- जंतु अउ जंगल के बिकास म अब्बड बड़ा योगदान हाबे.

इंद्रावती नदी ह जे -जे कर ले गुजरीस हे, उहां के तीर- तार के जगा ह धन धान्य ले परिपूर्ण हो गिस हावय,अउ  इंदिरावती नदी के सेती इंहा के जंगल ह हरदम हरियर रहिथे. अउ इंहा के लोग मन के जीवन के आधार जंगल ले प्राप्त होवइया कई  किसिम के जिनिस ले हो थे . ईही नदी तीर म इदिरावती राष्ट्रीय उद्यान तको हईबे.जिहा कई परकार के विलुप्त प्रजाति के जंगली - जानवर जैसन जंगली भैंसा ,शेर, बारहसिंगा, हिरण,जंगली सुअर, अउ  नीलगाय पाय जाथे .इहि नदी म कई ठक  परसिद्ध जलप्रपात अउ नदी  के तीर तार म कई ठक गुफा तको पाए जाथे. जेहर बस्तर की संस्कृति के गरिमा ल अउ  बडहा देथे. येकरे सेती इंदिरावती नदी ल बस्तर के जीवन दायनी नदी कईथे.

उद्गम स्थल
इंद्रावती नदी के उद्गम ह उड़ीसा राज के कालाहांडी जिला के रामपुर थुआमुल के पास डोंगरला पहाड़ी ले निकले हईबे. इंद्रावती नदी ह उड़ीसा राज ले निकल के छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला म परवेश करथे. ये नदी ह छत्तीसगढ़ म पूर्व ले पश्चिम के डाहर बोहात-बोहात बस्तर जिला ले नारायणपुर, दंतेवाड़ा अउ बीजापुर जिला में परवेश कर थे. फेर पश्चिम ले दक्षिण डाहर मुड़ जाथे. अउ  छत्तीसगढ़ राज के दक्षिण में बीजापुर जिला के भद्रकाली म गोदावरी नदी म मिल जाथे. उद्गम स्थल कालाहांडी ले संगम स्थल भद्रकाली तक येकर लंबाई ह 535 किलोमीटर हईबे. जेमा इंद्रावती नदी के एक तिहाई भाग ह उड़ीसा राज म  अउ दू तिहाई भाग  ह छत्तीसगढ़ राज के बसतर  क्षेत्र म बोहाथे. छत्तीसगढ़ के दक्षिण म ये नदी ह महाराष्ट्र, तेलंगाना अउ  छत्तीसगढ़ राज के सीमा तको बनाथे.

इंद्रावती के सहायक नदियां
इंद्रावती नदी केअंदाजी दू दर्जन सहायक नदी हइबे. जेमा उत्तर क्षेत्र के  परमुख नदी  म नारंगी अउ  भंवरडिह नदी हरे. अउ  दक्षिण क्षेत्र म संखिनी, डंकिनी पामेर,   चिंटा , मिंगाचल अउ  मारी नदी ह परमुख नदी हरे. संखिनी नदि ह बैलाडीला के डोंगरी पहाडी ले निकले हईबे. अउ डंकिनी नदी ह डांगरी -डोंगरी पहाड़ ले निकले हइबे . शंखिनी -डंकनी नदी के बारे म अइसन लोक मान्यता हईबे कि  ये  दूंनू  नदी के उत्पत्ति ह मादा राक्षसिनी शकीनी और डाकिनी के नाम पर पड़े हइबे. दुनु नदी के पानी के रंग ह अलग-अलग रंग के हैबे. शंखिनी अउ  डंकनी नदी के संगम म भैरव बाबा के पांव के निशान  तको  हईबे. ये दुनों नदी ह दंतेवाड़ा म संगम बनाय  के बाद म आघु  डाहर जाके इंद्रावती नदी म  मिल जाथे.

इंद्रावती के तट पर बसे परमुख स्थान

जगदलपुर: इंद्रावती के तट म जगदलपुर, चित्रकोट, बारसूर अउ भैरमगढ़  जईसन परमुख इस्थान ह बसे हईबे. जेमा जगदलपुर ह बस्तर संभाग के सब्बो ले बड़का शहर हरे.ये शहर के पियास ल इंद्रावती नदी ह बुझाथे. ये शहर ह परमुख बैपारिक केंद्र अउ पर्यटन स्थल हरे. ईहां हर साल देश-परदेश के पर्यटक मन घुमेला आथे. इहां हमर राज पक्षी पहाड़ी मईना ल देखे बर घलक मिलथे. अउ इहचेच हमर बसतर महाराजा के राजवाड़ा ह घलक देखतेच बनथे. माई दंतेश्वरी के मंदिर, बालाजी मंदिर और पुराना राम मंदिर ह देखेच के लाईक हईबे. इंहा के दलपत सागर तरिया म डोंगा चलई अउ मछली पोसे बर  परसिद्ध हईबे. ईहां जगा-जगा चउक हईबे. अउ ये शहर ह सुव्यवस्थित बसे हईबे. एकरे  सेती जगदलपुर ल चौकों का शहर कहिथे. जगदलपुर शहर ह अपन हरियाली अउ स्वच्छता बर परसिद्ध हईबे. जगदलपुर ल पहली जगतूगुड़ा के नाम ले जानत रीहिस हईबे. बाद में येकर  नाव ह जगदलपुर पड़ीस हईबे.

चित्रकोट: जगदलपुर ले 40 किलोमीटर दूर म चित्रकोट ह बसे हईबे. इन्हा इं दिरावती नदी ह शुग्घर जलप्रपात बनाथे. ये जगह म तको देश परदेश के पर्यटक मन घुमेला आथे. ईहां इंदिरावती नदी ह 90 फीट ऊंचा ले जलप्रपात बनाथे. चित्रकोट जलप्रपात ह हमर देश के सबले चवड़ा जल परपात हरे. जल परपात कर शुग्घर इंद्रधनुष ह तको देखे ला मिल थे. ईहां जल परपात के खाल्हे म डोंगा चलाई, मछली पकडाई अउ तउरई तको करथे. चित्रकोट जल परपात के सुंदरता ल देख के ऐला भारत के नियाग्रा जल परपात के नाम ले जाने जाथे. ये जल परपात ह अपन प्राकृतिक सुंदरता बर विश्व विख्यात हईबे.

बारसूर: चित्रकोट ले 45 किलोमीटर दूरिहा में बारसूर नगर ह बसे हईबे. बारसूर ले 7 किलोमीटर दूरिहा म सातधार नाम के गांव म इंदिरावती नदी ह शुग्घर जलप्रपात बनाथे. जेला सातधार  जल परपात के नाम ले  जाने जाथे. जल परपात के ऊपर डाहन म इंदिरावती नदी म सात ठक धारा हर आकर मिलीस हैबे. एकरे सेती एकर  नाम  ह सातधारा पड़ीस  हइबे. ईही सातधार म इंदिरा गांधी जल विद्युत परियोजना बनत रिहीस हे. जेला बोधघाट बहुउद्देशीय  परियोजना के नाम ले जानत रीहिसे . ईहां करोड़ों रुपया खर्चा करे के बाद म पर्यावरण मंत्रालय ले अनुमति नई  मिलीस त ये परियोजना ह बंद होगे हईबे . आज कोंहो यह परियोजना ह बने रतीस त बस्तर के लाखों बेरोजगार मन ल रोजगार तको मिले रतीस.बारसूर ह एक ऐतिहासिक पर्यटन नगरी तको हरे. ईहां के जुड़वा गणेश मंदिर ,बत्तीसा मंदिर मामा -भाचा के मंदिर ,शिव मंदिर ,विशाल जलाशय, विष्णु मंदिर अउ संग्रहालय  ह तको देखतेच बनथे.

भैरमगढ़: बारसूर ले 65 किलोमीटर दूरिहा म बीजापुर जिला के भैरमगढ़ विकासखंड ह तको इंदिरावती नदी के तट में बसे हइबे. भैरमगढ़ के परमुख पर्यटन स्थल म सीता कुटी, हाथी गेट, हनुमान मंदिर, गणेश मंदिर, अउ भैरव बाबा के परसिद्ध मंदिर हरे. ईही भैरव बाबा के मंदिर के नाव के सेती ये नगर के नाव ह भैरमगढ़ पड़ीस हईबे. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व अभयारण्य अउ वन भैंसा रिजर्व अभ्यारण इहचे पाय जाथे. ये राष्ट्रीय उद्यान ह इंदिरावती नदी के तट म हईबे. एकरे सेती एकर नाव तको इंदिरावती राष्ट्रीय उद्यान पड़ीस हईबे. ये राष्ट्रीय उद्यान म वन भैंसा, बघवा (टाइगर) बारहसिंघा, जंगली सूअर, भालू, चीता, खरगोश अउ हिरण बर परसिद्ध हे. बीलुप्त परजाति के बन भैंसा ह ईहचे पाए जाथे. नारायणपुर जिला के अबूझमाड़ ब्लॉक के हांदावाड़ा गांव के पास म धारा डोंगर पहाड़ी ले एक सुंदर परवती जल परताप ह बनाथे. जेला मिलकुलवाड़ा जलपरपात के नाम ले लोग मन ह जानथे ए परपात ह भैरमगढ़ ले अंदाजी 15 किलोमीटर के  दूरिहा म हइबे. ईहां तक आय जाए के कोन्हो साधन नई हे. जेकर सेती ये परपात ल अब्बड कम लोग मन ह जानथे. यदि राज सरकार अउ पर्यटन विभाग ह धियान दे के ईहां तक सड़क बना दीही त ये जगा ह अब्बड सुग्घर पर्यटक स्थल बन जही.
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