छत्‍तीसगढ़ी विशेष: छत्तीसगढ़िया मनखे के जिनगी मा रचे बसे माटी के जिनिस 

माटी के किया ला माटी के जिनिस संग जोड़ के राखत हे.
माटी के किया ला माटी के जिनिस संग जोड़ के राखत हे.

आज के वैज्ञानिक मन घलो बताथे कि माटी के बरतन मा बने जेवन मा कोनों किसम के रसायन के परभाव नइ होवय. रसायन के प्रभाव ले नानम किसम के रोग रई होथे एला हमर पुरखा मन आकब कर ले रहिन होही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 3:07 PM IST
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त्तीसगढ़ के मनखे अपन जिनगी मा कतको किसम के जिनिस ला मिंझारे हवे. एमा माटी ले बने जिनिस घलो हावय. माटी के जिनिस के अलगेच मानता हे. आज विज्ञान के जुग मा एक डहर लोहा, ताँबा, पीतल, कांसा, जरमन ला अब दुरिहात स्टील, फाइवर, काँच, संग चाँदी के जिनिस ला छत्तीसगढ़ के मनखे घलो अब बउरत हे. फेर माटी ले बने कुम्हार के बनाय जिनिस हा सिराय नइ हे. आज के वैज्ञानिक मन घलो बताथे कि माटी के बरतन मा बने जेवन मा कोनों किसम के रसायन के परभाव नइ होवय. रसायन के प्रभाव ले नानम किसम के रोग रई होथे एला हमर पुरखा मन आकब कर ले रहिन होही. तभे सरेखत रहिन कि माटी के बरतन मा जेवन बनावव. माटी के बरतन मा बने जेवन पुष्टई होथे,नकसान नइ करय.


संसार मा माटी के जिनिस बनाय अउ बाउरे के चलागन कब ले चले आत हे एला कोनों नइ बता सके फेर इतिहासकार अउ पुरातत्व वाले मन एला बनेच प्राचीन बताथें.आकब मा 13000 बच्छर जुन्ना माटी के बरतन मिलथे. जौन नील घाटी मा मिले रहिस. मोहन जोदाड़ो अउ हड़प्पा संस्कृति मा आकब 3000 बच्छर पहिली के बखत के माटी के बरतन अउ जिनिस मिले रहिस. छत्तीसगढ़िया मनखे के जिनगी मा प्रकृति हा रचे बसे हे. घर गृहस्थी मा माटी ले बने बरतन, खेलउना, पूजा पाठ के जिनिस, पानी धरे के अउ पइसा ला सँइत के धरे के जिनिस, गोरसी ,चूल्हा आदिकाल ले बनत और बउरत आवत हे. रंधनी कुरिया ले कोठा कुरिया तक माटी के जिनिस राखे जाथे. जब लोहा, तांबा, पीतल, जरमन के जिनिस नइ रहिस तब माटी के जिनिस मा महतारी बहिनी मन राधे पसाय,धरे संइते बर बउरे. करसा करसी मा पानी भर के राखय. तोपे बर परई राखे. दूध दूहेबर कसेली रहय. कनौजी मा साग राँधे. पसाय बर अलग हड़िया रहय. चाउँर दार ला धरे बर मइरसा रहय. माटी के बरतन दे रंग के रहय(1) करिया (2) लाली.


चइत अउ कुंवार महिना महिना मा देवी मंदिर मा जोत जलाय जाथे. ये जोत के कलश दिया हा माटी के बने रहिथे. पानी भरे बर करसा बउरथे ओहा भरे रग्गी (गर्मी) मा पानी ला ठंडा राखथे. छत्तीसगढ़िया मन के बर बिहाव मा करसा के नेंग रहिथे. तेल हरदी चढ़ाय के बेरा ढेड़हीन दूल्हा दूल्हिन ला करसा धरके मड़वा मा आनथे. दूल्हा घर ले लगिन पूजहा करसा धरके दूल्हिन घर जाथे तभे उहाँ तेल हरदी चढ़ाय जथे. छत्तीसगढ़ मा पोरा के तिहार बड़ उछाह ले मनाय जाथे. एहा गृहस्थी अउ किसानी बूता काम ले जुड़े तिहार आय. बाबू लइका मन ला किसानी ले जोड़े बर माटी के बइला बनाके, सीली चक्का लगाके पूजा करके ओखर संग खेले बर देथे. नोनी लइका बर पोरा के संग किसम किसम के गृहस्थी जिनिस चूल्हा, चुकी, कराही, करछुल खेलेबर देथे. ए सबे माटी के बने रहिथे.


हमर देश के संगेसंग छत्तीसगढ़ के सबले बड़का धार्मिक तिहार आय देवारी. देवारी मा माटी के दिया बारे के महत्तम हे. अठोरिया पन्द्रही पहिली ले कुम्हार मन दिया चुकी करसा कलौरी बना के बजार मा लाथे. माटी के लक्ष्मी देवी ग्वालिन के रुप मा पूजा होथे.यहू माटी के बने होथे. इही देवारी तिहार मा गउरा गउरी के बरतिया निकलथे. घर घर ले करसा जेमा दिया बारे रथे ओला परघाय के गउरागुड़ी ठाउर लेगे जथे. यहू सब माटी के बने रहिथे. अइसने होली तिहार मा रंग गुलाल, रोटी पीठा के संगे संग बिन नंगारा के थाप अउ फाग गीत के तिहार के उछाय मिल नइ सकय. ये नंगारा, डमउ बाजा मन घलो माटी ले बने रहिथे. अइसने बर बिहाव अउ दूसर बेरा के बाजा मन घलो माटी ले बने रहिथे. तबला, गुदूम, रुँजू  हा माटी के खोल मा चाम ला छा के बनाय जाथे.


छत्तीसगढ़ के गाँव गाँव मा हमर देवी देवता मन नानम रूप मा बिराजे हवय. देवी देवता के मंदिर देवाला मा माटी के मूर्ति बइठारे के संग माटी के घोड़ा, हाथी, बइला चढ़ाय के परंपरा घलो हावय. छत्तीसगढ़ के घर कुरिया हा ईंटा, खपरा ले बने रथे. यहू हा घलो माटी के रहिथे. पाना पतई, खदर छानी के पाछू खपरईल के छानी वाला घर कुरिया बनाय गिस. अब छड़ सिरमिट के गच्छी घर बनत हे तभो खपरइल के घर कम नइ होय हे. मनखे के जनम के पाछू चहा पानी बर बउरे बरतन भाँड़ा ले मरनी तक के बरतन भाँड़ा मा माटी के बरतन समाय रहिथे. मरे के पाछू आस ला माटी के बरतन मा राख के गंगा लेगे जाथे. ओखर छूत उतारे बर माटी के करिया बरतन घर ले निकाले जाथे.


आज विज्ञान के जुग बिजली, गैस के चूल्हा , स्टील के बरतन अउ खाय पीये के नाना किसम के जिनिसमिलत हे फेर अभू माटी के जिनिस ला नवा रुप मा देख के मनखे हा घर सिंगारे बर लानथे अउ तीज तिहार, देवता धामी, पूजा मा बउरतेच हे. माटी के किया ला माटी के जिनिस संग जोड़ के राखत हे.

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