छत्‍तीसगढ़ी विशेष: छत्तीसगढ़ मा महतारी मन रखथे लइका के लम्बा उमर बर  कमरछठ उपास

 कमरछठ हा बहिनी महतारी के मया के परीक्षा अउ बरदान आय.
कमरछठ हा बहिनी महतारी के मया के परीक्षा अउ बरदान आय.

मनखे के सांसारिक, गृहस्थी सुख मा लइका पाय के सुख सबले बड़का माने गय हे. एखर बर हमर बहिनी महतारी मन नानम परकार के उपास धास रखथँय.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 12:57 PM IST
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त्तीसगढ़ के नारी मन अपन परिवार के सुखशांति अउ खुसहाली बर अबड़ेच उपास धास करथँय. कभू अपन गोसइँया पायबर, पाछू अपन सोहाग ला अमर राखे बर. लइका पाय बर अउ ऊँखर रक्षा खातिर. कतको घाँव तिहार बार मा, देंवता धामी मन के मान गउन करेबर अउ पीतर मन के असीस पायबर घलाव उपास करथँय.अइसने एक उपास महतारी मन अपन लइकामन बर राखथँय.एला कमरछठ , खमरछठ, अउ हलछष्ठी उपास कहिथँय. ये उपास ला नवा बिहाता नारी अउ लोग लइका होय पाछू  महतारी मन रहिथँय.भादो महिना छठ के दिन के उपास ला कमरछठ उपास कहिथँय. कमरछठ उपास ला बहिनी मन बिहाव पाछू लइका पाय खातिर अउ महतारी मन अपन लइका के उमर बढ़ाय अउ उँखर जिनगी ला सुरक्षित रखे खातिर राखथँय.

हमर शास्त्र मा बताय हे कि सबले पहिली माता पार्वती हा देवता मन के गोहार सुनके लइका पाय खातिर अउ कार्तिकेय के जनम पाछू ओला तारका सुर के अइताचार ले बचाय बर अबड़ उदिम करिन, काबर कि ओ मायावी अउ बलवान रहिस.वरदान रहिस कि ओखर मौत शिव पार्वती के लइका के हाथ होही. ओखर छल बल से कार्तिकेय ला बचाइस, पाछू उही कार्तिकेय हा तारकासुर ला मारिस.अइसने जब पार्वती हा गणेश ला रखवारी करे बर बइठारे रहिस तब शंकर जी ला रोक परिस तब शिव जी ओखर नरी ला देह ले अलग कर दिस. गनेश ला मारे खातिर माता पार्वती हा भगवान शंकर अउ सबो देवता मन ला दोष लगाइस अउ लड़िस.पाछू जब तक गणेश ला नइ जियाही तब तक अन्न जल तियागहू अउ अपन शक्ति ले संसार मा परलय लाय के कसम खाइस. तब भोले बाबा गणेश ला गजानन बनाइस अउ अपन लइका के जिनगी के रक्षा करके अमर बनाइस. तब से आज तक महतारी मन अपन लइका के जिनगी के खातिर भादो महिना के छठ के दिन कमरछठ उपास रहिके माता पार्वती अउ शंकर के पूजा करथँय.



छत्तीसगढ़ ला भगवान राम के दाई कौशिल्या के मइके कहे जाथे. महतारी बने बर अउ भगवान ला लइका रुप मा पाय खातिर कौशिल्या हा घलाव तप उपवास करिस.तुलसीदास जी लिखथँय-
प्रेम मगन कौशल्या निस दिन जात न जान.

सुत सनेह बस माता बाल चरित कर  गान..

छत्तीसगढ़ के कमरछठ उपास ला हलषष्ठी कहिथें. द्वापर मा कथा आथे कि बलराम जी के जनम ले घलाव कमरछठ उपास ला जोड़ के देखे जाथय. बलराम जी के अस्त्र नाँगर (हल ) अउ ओकर जनम तिथि षष्ठी से बने दिन ला  हलषष्ठी उपास ले घलाव जोड़े  जाथय. ये उपास मा नाँगर से उपजे अन्न, भाजी ला नइ खाय जाय. द्वापर मा अपन लइका ला कंस के अइताचार ले बचाय बर देवकी माता पानी गिरत मा अधरतिया वसुदेव ला मथुरा जाके छोड़के आय बर कहिस.

छत्तीसगढ़ मा कमरछठ उपास मा सगरी पूजा के महत्तम हे. ये दिन महतारी मन बिहनिया ले मंजन ब्रस नइ करके महुवा नइते खम्हार के दतौन करथे.सेम्पू के जगा मुड़मिंजनी माटी मा मुड़ी मिंजथे. नाउ घर ले पतरी दोना  लानथे. केवट घर ले परसाद के जिनिस लाई,चना,मन ला लानथे. मंझनिया बेरा ले गाँव , सहर के मंदिर नइते चउँक, मइदान मा सगरी खनथे. सगरी के चारो मुड़ा ला बोइर, काँसी, चंदेनी गोंदा,सदा सोहागी, दसमत  फूल अइसने छै किसम के पेड़ पऊधा संग सजाय जाथय.

छत्तीसगढ़ मा सगरी ला जिनगी के अधार माने जाथय. सगरी खनाय अउ सजाय के पाछू सब उपसहीन मन सकलाथँय अउ इही सगरी के चारो मुड़ा बइठ जाथँय. पंडित महराज हा आथे तहान बिधि बिधान के संग पूजा होथय. अउ कमरछठ के छै ठन कथा सुनाथे पाछू शंकर के आरती करथें.

ये छत्तीसगढ़ के कमरछठ उपास के पूजा दूसर उपास के पूजा ले अलग होथय. कमरछठ मा छै के जादा महत्तम माने गय हे. ये भादो महिना के छेटवाँ दिन मनाय जाथय.छै जात के फूल पूजा मा चघाय जाथय. छै ठन कथा सुनाय जाथे.सगरी अउ सिव पारबती, गणेश, कार्तिकेय के पूजा करे जाथय. एमा छै किसम के खेलउना बाँटी ,भँवरा बना के चघाय जाथय. छै किसम के सिंगार जिनिस सगरी मा डारे जाथय.गाय के दूध, दही, घी के जगा मा भैंसी के दूध, दही , घी से पूजा करे जाथय . परसाद छै किसम के जिनिस लाई, चना, महुवा फूल, मसूर , बटरा ले बनाय जाथय. उपसहीन मन के खाय बर पसहर चाउँर ला भैंसी के दूध मा डार के खीर नइते भात बनाय जाथय. छै जात के भाजी जेमा सेमी, मखना, बरबट्टी, मुनगा, चेंच, अमारी ला संघेर के राँधे जाथय. खाय के पहिली छै जीव गाय, कुकुर, बिलई, मुसवा , चाँटी अउ चिरई के खाय बर भोग निकाले जाथय. कमरछठ उपास मा ए सख्त नियम हावय कि नाँगर ले जोत के बोंय जिनिस ला पूजा मा नइ बउरे जाय.

कमरछठ मा सगरी पूजा के कथा आथे. कथा सुनाय पाछू सगरी भरे जाथय. उहाँ जतका उपसहीन रहिथे सबोझन एक एक गघरा पानी लान के सगरी मा डारथँय. महतारी मन इही सगरी के पानी मा अपन लुगरा के अछरा ला फिलो लेथँय अउ अपन लइका के कनिहा मा छै घाँव छुवाथे. ऐला पोतका मारना घलाव कहे जाथय. कतको महतारी मन नान्हे नान्हे लइका ला सगरी मा बुड़ो घलाव देथँय. सगरी पूजा के आखिर मा भगवान शिव के आरती होथय. सब महतारी मन परसाद बाँटत अपन अपन घर जाथँय . घर मा जाके बड़े मन के पाँव पलगी करके असीस पाथँय. सात जात के भाजी अउ पसहर चाऊँर के भात ला भैंसी दही संग मिला के नइते भैंस दूध मा बने खीर के  भोग लगा के खाथँय पीथँय अउ उपास छोंड़थँय.

छत्तीसगढ़ के महतारी मन अइसने किसम के कमरछठ उपास मा सगरी पूजा अउ लइका के जुग जुग जीये बर उपास रखे जाथय. फेर आज के पढ़े लिखे अउ नउकरी  वाली महतारी मन अब ये उपास के परंपरा ला छोड़त जात हे.जौन हमर संस्कृति बर अच्छा नो हय.फेर आज घलो आधुनिकता मा कम नइ होइस कमरछठ पूजा.

आज कतको काहत हन आथुनिक अउ विज्ञान के जमाना आ गय हे फेर महतारी मन के लइका पाय अउ सुखी जिनगी राखे के सपना कम नइ होइस.नउकरी, मोबाइल, इंटरनेट , फैसन के संग रहे के पाछू लइका मन के जिनगी ला बचाय बर काय काय उदिम करथे एला महतारी मन जानथय.कमरछठ हा बहिनी महतारी के मया के परीक्षा अउ बरदान आय.
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