छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: कोस-कोस म पानी बदले, चार कोस म बानी

छत्तीसगढ सरकार के मुखिया भूपेश बघेल अउ ओखर सरकार  छत्तीसगढी के विकास बर संकल्पित हें. वर्तमान सरकार घलो केंद्र सरकार ल छत्तीसगढी ल आठवीं अनुसूची म शामिल करे बर लिखे हे.’अब जरूरी हे के साहित्य अउ समृद्ध करे बर रद्दा चतरियाय जाय. संस्कृति विभाग अउ राजभाषा आयोग ल कागज म नहीं वास्तव म सक्रिय करे जाय.

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  • Last Updated: October 8, 2020, 3:09 PM IST
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ब आघू साल ले प्रायमरी स्कूल के पढ़ई छत्तीसगढी म होही. ’नवा शिक्षा नीति म नान –नान लइका मन के पढ़इ मातृभाषा म होही. महतारी के भाखा (भाषा) महतारी-भाखा (मातृभाषा) केहे जथे. हमर छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढी महतारी-भाखा आय. लइका मन ल जब इही भाखा म स्कूल म शिक्षा दे जही तब लइका मन जल्दी समझहीं. छत्तीसगढी महतारी के सेवा करे के अब बने समे हे. छत्तीसगढ़ नवा राज्य बनीस ओखर बाद छत्तीसगढी राजभाषा बनगे. फेर छत्तीसगढी ह अभी घलो बोली ले भाखा (भाषा) बने के रद्दा म हे. एखर मानकीकरण नइ होय हे. स्कूल म लइका मन छत्तीसगढ़ी-भाखा में शिक्षा पाहीं. छत्तीसगढिया खेल खेलहीं. अपन भाखा अपन संस्कृति ल समझहिं. हमर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेलजी इही त चाहत हें. नवा छत्तीसगढ़ म छत्तीसगढ़ के सब विशेषता समाय. ’छत्तीसगढी के हर स्तर म विकास होय. हालंकि ‘कोस-कोस म पानी बदले, चार कोष म बानी’ ये बात छतीसगढी बर घलो पूरा –पूरा लागू होथे.

छ्त्तीसगढी लोक व्यवहार म जादा दिखना चाही. येखर मानकीकरण करे बर मिहनत लागही. अपन महतारी भाखा के सेवा साहित्यकार, नेता, नागरिक अउ सब परकार के कारोबारी मन उपर घलो हे. एखर भरपूर परयोग होय. स्कूल अउ कालेज म छ्त्तीसगढी साहित्य लिखना, पढना, पढाना आना महत्वपूर्ण हे. इहाँ कालेज म छत्तीसगढी कालेज म पढ़ई के एक विषय हे. व्यव्हार म छत्तीसगढी  भाषा के हमेशा परयोग करना चाही. येखर मीठास मन ल गदगद कर देथे. प्राय: सबे छ्त्तीसगढिया बोलचाल में छत्तीसगढी के परयोग करथें. करीब दू ले ढाई करोड़ जनता छत्तीसगढी बोलथें. धमतरी के भाषाविद हीरालाल काव्योपाध्याय ने (1890 ) में छत्तीसगढी के बियाकरण तैयार करिस. हिन्दी म छायावाद के परवरतक पं. मुकुटधर पाण्डेय, पं. लोचनप्रसाद पाण्डेय कालजयी ग्रन्थ मन के छ्त्तीसगढी में अनुवाद करके छत्तीसगढी भाषा ल समृद्ध करके अपन योगदान दे हे. बाबू खूबचंद बघेल, पं. सुंदरलाल शर्मा, हरि ठाकुर, डा. नरेंद्रदेव वर्मा, नारायणलाल परमार, पवन दीवान, कृष्णा रंजन, श्यामलाल चतुर्वेदी, लक्ष्मण मस्तुरिया जइसे अनेकों साहित्य-साधक मन अपन योगदान दे हें.

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जब छत्तीसगढ़ नवा राज्य बनिस तब छत्तीसगढी के विकास के नवा रद्दा खुलिस.नवा राज्य बर आन्दोलन करइया नेता, साहित्यकार मन के योगदान महत्वपूर्ण रिहिस. छत्तीसगढी ल राजभाषा के दरजा दे बर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिह अउ ओखर सरकार के योगदान रिहिस. सरकार राजभाषा आयोग बनइस. छतीसगढी ल राजभाषा के दरजा दे बर विधेयक पारित होइस. केंद्र सरकार ल छत्तीसगढी ल आठवीं अनुसूची म स्थान दे बर लिखे गिस. छत्तीसगढ सरकार के मुखिया भूपेश बघेल सरकार छत्तीसगढी के विकास बर संकल्पित हें. छत्तीसगढी ल आठवीं अनुसूची म शामिल करे बर लिखे हे.अब जरूरी हे के साहित्य ल अउ समृद्ध करे बर रद्दा चतरियाय जाय. संस्कृति विभाग अउ राजभाषा आयोग ल कागज म नहीं वास्तव म सक्रिय करे जाय. नवा पीढी म अपन भाखा के प्रति गौरव के अनुभव कर सके अइसे वातावरण बनाय जाय. हालंकि लोक चेतना के बिना कोनो भाषा के विकास अधूरा होथे तभो ले राजपथ के अपन उत्साहपूर्ण योगदान जरूरी हे.
भाषा विज्ञान अउ भाषा विज्ञान विभाग रविशंकर विश्व विद्यालय रायपुर द्वारा डॉ. महेश चंद्र महरोत्रा, डॉ. प्रेमनारायण दुबे, डॉ.भागवत प्रसाद साहू, डॉ.मन्नूलाल यदु, व्यासनारायण दुबे, सतीश जैन, ढेलऊराम यदु, रामनिवास साहू, अउ साधुदास बघेल के संपादक मंडल ह सन 1982 में छत्तीसगढी भाषा–शब्द-कोश तैयार करिस. छ्तीसगढ राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी चन्द्रकुमार चन्द्र द्वारा लिखित वृहद छ्तीसगढी शब्दकोश (छ्तीसगढी से हिन्दी) में तैयार करे हे जेखर प्रकाशन छ्तीसगढ राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी ह संन 2012 म करिस. ये शब्दकोश करीब एक हजार पेज के हे जउन ह मिल के पथरा साबित होवत हे. ’पढ़इया –लिखइया लइका मन बर अउ छ्तीसगढी सिखइया मन बर ये छतीससगढी शब्दकोश बहुत उपयोगी हे. वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली बर घलो पुस्तक छापे गे हे.

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छ्त्तीसगढी देवनागरी लिपि म लिखे जथे. हिंदी के एहा सहायक बोली /भाषा आय. येखर  समृद्ध शब्दकोश हे. भाषा  म मिठास हे. जनता तक बात पहुंचाय बर एमा शब्द सामर्थ्य हवे. लोकभाषा के रूप में एखर शब्द ताकत बहुत हे. लोक तक पहुँचे बर छ्त्तीसगढी  सब ले सरल रद्दा हे. छ्त्तीसगढी के सशक्त होय ले हिन्दी के ताकत अउ बाढ़ही. हर विधा म छ्त्तीसगढी साहित्य लिखे जात हे. छ्त्तीसगढी के लोक कला मंच प्रभावी है. सांस्कृतिक क्षेत्र म प्रतिभा के कमी नइ हे. छत्तीसगढ़ सरकार ह पद्म श्री ममता चन्द्राकर ल खैरागढ़ संगीत विश्व विद्यालय का कुलपति बनाके ओखर कला के  मान बढ़इस हे. राज्य गीत अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार.... सुमधुर ढंग से गा के वोला जन-मन के कंठहार बना दिस. कविता वासनिक अउ अन्य सबे लोक कलाकार मन के के प्रयास ले छत्तीसगढी के सम्मान बाढत हे.

सबसे पहिली छत्तीसगढ़ी भाखा के मानकीकरण करे बर अब्बड़ गंभीर कोसिस करना चाही. छत्तीसगढी भाखा के विकास बर सरकारी कोशिश, साहित्य लेखन, प्रकाशन सहित आम जनता, जन-प्रतिनिधि, कारोबारी, शिक्षण संस्था, सबे सरकारी कार्यालय द्वारा सरलग प्रयास, प्रचार, प्रसार अउ प्रोत्साहन करना चाही. छत्तीसगढी भाखा से जुड़े मनखे मन ला प्रोत्साहित करना चाही ये सब बर चारों खूंट कोसिस होही तभे  हमर छत्तीसगढ़ी आघू बढ़ही. जुच्छा छत्तीसगढ़ी-छत्तीसगढ़ी कहिके गाल बजाय ले का होही. अब चोक्खा बुता दिखना चाही.
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