छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: पहली के नाचा अउ अबके ‘लोकमंच’

काबर के कलाकार नाम के भूखा रइथे अउ  ओखर भूख ला जनता जनार्दन हा अपन आशीर्वाद देके मिटा देथे.
काबर के कलाकार नाम के भूखा रइथे अउ ओखर भूख ला जनता जनार्दन हा अपन आशीर्वाद देके मिटा देथे.

लोकभाषा के असर सम्पूर्ण भारत मा देखे जा सकत हे. लोक जीवन मा पले बढ़े के सेती इनखर महत्व ला नइ नकारे जा सकय.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 7:10 PM IST
  • Share this:
त्तीसगढ़ के छतीसगढ़ी भाषा मा ‘नाचा’ शब्द के अपन अलग  पहिचान हे. लोक मनोरंजक विधा ला माध्यम बना के एकर प्रस्तुतीकरण होथे. ग्रामीण परिवेश में जन जीवन आधारित शिक्षाप्रद प्रस्तुती के कारण ‘नाचा’अपन जगा मा आजो प्रतिष्ठित हे. कोनो कोनो मेर आजो नाचा के संस्था संचालित हे जइसे की बेलसोंडा (महासमुंद) के नाचा पार्टी अउ अइसने कतको जगा अपन छोटे रूप मा नाचा आजो देखे सुने जाथे.

लोकभाषा के असर सम्पूर्ण भारत मा देखे जा सकत हे. लोक जीवन मा पले बढ़े के सेती इनखर महत्व ला नइ नकारे जा सकय. मुअखरा गोठ बात करत करत अपन समाज ला शिक्षित करे के काम आजो महत्वपूर्ण हे. आदिम जनजाति के अपन - अपन क्षेत्र मा अलग -अलग बोली, भाषा हे. छत्तीसगढ़ के परिपेक्ष मा देखबे ते चारों मुड़ा अलग-अलग प्रांत के भाषा जइसे - मराठी, उड़िया, द्रविड़ अउ हिन्दी के प्रभाव देखे बर मिलथे. एकरे सेती हमर भाषा स्वीकार के भाषा घलोक बनगेहे.

नाचा मा अइसे अइसे कथा के सृजन देखे सुने बर मिलथे जेखर कल्पना साधारण मानस के मन मा नइ राहय. कहां-कहां ले बिषय लान - लान के जनजीवन ला संदेश देथें.



नाचा मा नारी स्वर
नाचा संस्कृति में पात्र चयन के अपन अलग भूमिका हे. नारी पात्र ला पुरुष वर्ग ही निभाथे. साज साजिन्दा मन अपन साथ  बिजली ले संचालित बाजा नइ राखंय फेर अब समय के परिवर्तन मा काला रोके सकबे. गीत गायकी मा नारी स्वर के प्रधानता के कारण  सब्बो संस्कार के गीत मा नारी ला प्रधानता मिलथे.

पात्र
सबले महत्वपूर्ण पात्र होथें ‘गम्मतिहा ‘जेन अपन गम्मत के माध्यम ले लोगन ला बांध के राखथे . पहली शुरू परी मन के नाच होही . लोकगीत या फिल्मी गीत ला स्वयं गाके परी अपन कला प्रदर्शन करथे. गम्मतिहा पात्र मा जोक्कड़ के अपन विशेष स्थान रइथे . हंसी मजाक अउ वाद - विवाद के बीच जब’नजरिया ‘के आवाज आम दर्शक ऊर्जा दिखाई पड़थे.’नजरिया ‘महिला पात्र हरय जेन ‘नाचा ‘के महत्वपूर्ण कड़ी हरय अउ ओखरे इर्द - गिर्द गम्मत के ताना बाना बुने जाथे. अलिखित संवाद , तत्कालिक विचार के माध्यम बनके मनोरंजन मा अमिट छाप छोड़थे .

‘नाचा' मा जीवन के सामाजिक, आर्थिक अउ आध्यात्मिक पक्ष ला उजागर करे के परयास रथे ताकि शिक्षा से वंचित समाज ला देख सुन के अपन आप ला संस्कारित करे के मौका मिलय .

‘नाचा' कलाकार अपन कल्पना शक्ति ले अलग -अलग समस्या अउ ओखर समाधान खोज निकालथे. वर्तमान में अब नाचा के स्वरूप बदल गेहे. मनोरंजन के साधन बदले रुप मा परोसे जाए के परंपरा आ गेहे. तभो ले अपन पहिचान बने राहय एखर बर परयास करइया मन आजो नाचा ऊपर अपन लेख अउ प्रस्तुतिकरण लगातार जारी रखे के परयास मा हावें. ये अच्छा बात हे के नाचा संस्कृति ला हमन बचाए रखे के परयास करन अउ आने वाला पीढ़ी ला एखर जानकारी दे के परयास करन.

मशाल नाच
एला खड़े साज के नाचा केहे जात रिहिस न बिजली न गेस बत्ती. मशाल बार के रात भर नाचा नाचे जाए . कनिहा मा तबला बांधे राहय बजाने वाला. अपन अपन समय मा सबके महत्व रइथे. नाचा कलाकार के जीवन आज भी सामाजिक प्राणी के रूप मा हावय . कोई तरक्की नइ करिन लेकिन अपन संस्कार ला सरलग बोवत रहिन.

आधुनिक लोकमंच
सही बात ला केहे ना काहे कलाकार मन अपन मांग के खातिर एक नवा रुप ला स्वीकार कर लिन. आज छत्तीसगढ़ी के लोकमंच दुनिया भर मा अपन पहिचान बना डरे हे.

लोकमंच के जीयत जागत उदाहरण 
‘चंदैनी गोंदा', ‘कारी' ‘अउ' ‘सोनहा बिहान' ‘रिहिन'. ‘चरनदास चोर ‘बहुत चर्चित . होइस एकर कारण छत्तीसगढ़िया कलाकार मन के समर्पण हरय . चालीस ठन देश घूम डारिन तभो ले तोल्गी ढिल्ला के ढिल्ला. काबर के कलाकार नाम के भूखा रइथे अउ  ओखर भूख ला जनता जनार्दन हा अपन आशीर्वाद देके मिटा देथे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज