छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: सुख के साधन सब्बो जगह हे गांव, शहर, जंगल, पहाड़

समय के साथ - साथ गांव - गांव मा सुख सुविधा पहुंच गेहे. सुख सुविधा पहुंचना बने बात हे फेर ओकर सही उपयोग होना चाही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 3:55 PM IST
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देश दुनिया के बात करबे ते ग्रामीण जीवन अउ जंगल, पहाड़ के संगे संग बरफीला जगा मा हमन ला नियम धरम के पालन करइया जादा मिलथें. सब्बो किसम के आदत व्यवहार मा मानवता के झलक देखे बर मिलथे. एक पहर रात बांचे रइथे अउ जिनगी के आधार खोजे बर, जीविका के साधन ला संवारे बर मावा लोग ( आदमी जात ) निकल जथें. माई लोगन अपन दैनिक दिनचर्या मा लग जाथें. कतको आदमी घर मा उपरहा काम ला अपन सेती जान के करथें. सब्बो झन ला अपन संस्कृति ला जाने, समझे के मौका मिलना चाही एही पायके थोकिन छत्तीसगढ़िया संस्कार ला देखव.

हमर छत्तीसगढ़ मा कोनो गांव चल दे, सब्बो चीज व्यवस्थित मिलही. मुंधरहा से सुकवारो जाग जाथे. ओखर खरहेरा बाहरी खरर - खरर ओखरे संग रेंगे लागथे. बुहार बटोर के गोबर पानी के छरा छिटका मार के घर दुवारी ला पहली पबरित कर लेथे. ओती समलिया घलोक जाग गेहे. कोठा डाहर जाके माल मवेशी के बेवस्था मा पहली लग जाथे. कोठा ले गेरवा सुद्धा लान के बाहिर खुल्ला जगा मा बांध देथे. भैंसा मन ला पहुरा सुद्धा लान के बांध देथे. अब कोठा के सफाई गंउदन मन ला सकेलना. गोबर कचरा ला एकट्ठा करना ओखर काम होथे. गौंउदन सोज्झे कांवर मा जोर के घुरवा कोती लेगे जाथे. ए हरे साफ - सफाई के नियमित दिनचर्या. जेन गांव - गांव मा देखे ला मिल जाही.

खेती किसानी अउ रोजी - रोजगार
अपन घर परिवार ला सजाना संवारना सब्बो किसम के सुख - सुविधा देना असल जिनगी के आधार ए. खेती किसानी, बारी बखरी के आमदनी मा पहिली के सियान मन खुश राहंय. समय के साथ -साथ बयपार करे के शिक्षा मिलिस अउ अपन सुविधा अनुसार रोजी रोजगार करइया जमगें. सुन्दर आदत व्यवहार के कारण आजो व्यापार करइया फरत -फुरत हें. एक दूसर के देखा सिखी करथें तभो ले अपन आस ला बनाए रहिबे ते कुछु नुकसान नइ होवय.
आदत बेवहार


गांव - गांव मा होटल खवइया अउ चाहा पियइया मिल जाही नशा अपन जर ला इही जगा जमाना शुरु करथे. इही पायके आदत बेवहार ला सुधारे के उपाय इही मेरन होना चाही. नशा बेचइया मन ला कइ किसम के सहयोग करइया मिल जाथे. लेना मय हांवव न कोनो काय कर लिही एइसे कहिके बढ़ावा देने वाले मन के कमी नइ हे. सुवारथ के सेती सब्बो किसम के जुगाड़ करइया के अपन अलग संसार हे. इही संसारी मन आगू चलके अपराधी बन जाथें.

साधन सम्पन्नता
समय के साथ - साथ गांव - गांव मा सुख सुविधा पहुंच गेहे. सुख सुविधा पहुंचना बने बात हे फेर ओकर सही उपयोग होना चाही. इसकूल , कालेज , कल कारखाना , उद्योग - धंधा , कुटीर उद्योग सब्बो गांव डहर ला धर डारे हे. बने बात ए हमन ला समय के साथ चलना भी जरूरी हे. शासन प्रशासन के अपन चिंतन हे. एही चिंतन हा आगू चलके समाज मा परिवर्तन लानही.

सामाजिक परिवर्तन के सब्बो जगा सम्मान होना चाही. समय के साथ चले मा कोनो बुराई नइये. फेर नवा पीढ़ी ऊपर भारी जिम्मेदारी आगे हे. पूरा दुनिया जब उन्खर मुट्ठी मा समा गेहे ता बने गिनहा के अंतर ला समझ के अपन रद्दा निकालना चाही. सही रास्ता के चुनाव करइया घर परिवार आज कतका सुखी हे एला साक्षात् दरशन करना हे त गांव के पारिवारिक जीवन मा  रमें के आवश्यकता हावे. चलव अपन जिनगी ला सरल बनाके दुनिया मा मानवता के सेवा करे जाए. दिन भर बासी , पसिया खा पी के रतिहा कुन ताते - ताते बियारी करइया कमिया - किसान तोर जय जयकार हे.
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