Home /News /chhattisgarhi /

छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- वो मसीहा कोन हे?

छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- वो मसीहा कोन हे?

.

.

छत्तीसगढ़ी मं वइसे तो साहित्य के सबो विधा मौजूद हे, जइसे गीत, गजल, कहिनी, नाटक, उपन्यास अउ कविता फेर वरिष्ठ पत्रकार परमानंद वर्मा हा एकालाप के जरिये अपन कोनो अनचिनहार मसीहा संग अंतरंग गोठ-बात करे हे| तव छत्तीसगढ़ी मं पढ़व आखिर कोन हे ओ मसीहा...

अधिक पढ़ें ...

– ‘देख तो कोनो आवत हे, तइसे लागत हे?
– कोन हे ओहर?
– अनचिनहार कस लागत हे, कभू देखे तो नइहौं ओला?
– अरे वो तो मोरे कोती आवत हे, धीरे-धीरे पग बढ़ावत इही डाहर आवत हे.
-कतेक सुंदर हे, मन ला मोहे कस लागत हे, चेहरा घला आकरसक दीखत हे.
-कोनो जादूगर तो नइहे ओहर?
-अरे, अब तो कुछु-कुछु बोलत हे, ओकर आवाज मोर कान तक आवत हे.
-का काहत हे ओहर?
-मोर राजा बेटा, दुलरवा बेटा, सिकिलधा बेटा.
-अरे अब तो ओहर बांह ला पसार के साीधा मोरे कोती चले आवत हे.
-‘फेर मैं ओकर बच्चा कइसे हो सकत हौं. जान न पहचान अउ काहत हे मोर राजा बेटा दुलरवा बेटा.
– का वाजिब मं ओकर मैं बच्चा हौं, हों हूं तभे तो काहत हे मोर बच्चा, दुलरवा बेटा. नइ होतेंव तब बरपेली थोरे कहितिस?
-हां, अइसे घला तो हो सकत हे, ओला मैं पहिचान नइ पावत होहॅू?
-फेर अइसे कभू हो सकत हे का के कोनो अपन बाप ला पहिचाने के गलती करही?
-का वाजिब मं अपन बाप ला पहिचाने के मैं गलती करत हौं? फेर अइसे हो कइसे सकत हे?
– का अतेक मूरख हौं, अगियानी हौं अउ नासमझ हौं?
– अइसन होना तो नइ चाही, कहूं अइसन होवत तो नइहे ना?
-अउ हां, दूसर कइसे पर के बेटा ला अपन कहि सकत हे? कहूं ओहर बरपेली तो अपन बेटा कइसे कहि सकत हे? कहूं ओहर बरपेली मोला अपन बेटा बनाय के कोशिश तो नइ करत हे?
-ये सब का होवत हे, मैं समझ नइ पावत हौं?
-का वाजिब मं मैं अगियानी हौ, नासमझ हौं जौंन अपन पराया के भेद ला घला नइ समझ पावत हौं?
-अरे….रे….रे…., वो तो धीरे-धीेरे करत मोर तीरे मं आगे. सफेद धोती-कुरता पहिने मनखे तो अदभूत लगत हे.
-मैं कुछु सोच अउ समझ नइ पावत हौं, के अब आघू का होवइया हे?
– ओहर पूछे ले धरथे, का सोचत हस बेटा?
-सवाल ला सुनके हड़बड़ागेंव.
– कोनो जवाब नइ दे पायेव तब फेर दुबारा पूछथे का सोचत हस बेटा?
– फेर जवाब नइ दे पायेंव, हिम्मत नइ हो पावत रिहिसे के ओला का काहौं?
-अचानक मोला ओहर अपन दूनों बांह मं पोटार लेथे. अतका बेर अइसे लगिस के आज वाजिब मं बरसों ले बिछुड़े बाप-बेटा के अइसे मिलन होवत हे जइसे राम अउ भरत के होय रिहिसे.
– अतका बेर अइसे लगिस जइसे पिंयार के बंधना मं बंधे मोर आंखी के दूनों दुआर खुलगे कोन जनी कोन डाहर ले आंसू के धार बोहाय ले धर लिस?
-चेहरा ला देख के पूछथे अरे बेटा, तैं रोवत हस?
– मुंह ले एक भाखा नइ निकलिस.
-मोर आंखी कोती ले झरत आंसू के धार ला पोंछत ओहर पूछथे -मोर राजा अउ दुलरवा बेटा तोला कब ले मैं खोजत फिरत हौं? कई घौं पुकारेंव, आवाज लगायेंव फेर तै अनसुना करत अपन दुनिया मं भुला जस, रेंग दस.
-सोचथौं ये अजनबी, अनचिनहार ला कुछु जवाब देवौं, फेर मुंह बोले बर तइयार नइ होइस, होठ थरथराय ले धर लिस.
-सच काहां, अतेक निसछल पिंयार आज तक ये संसार मं मोला कहॅूं नइ मिलिस, जतका ए मेर मिलिस. मन मं सवाल उठथे-कोन हो सकत हे एहर? अइसे तो नहीं बाप बने के ढोंग रचके अपहरन करे के उदीम रचे बर तो नइ आय हे ?
-हिरदय मं मोर कतको अइसे सवाल उठे लगिस जेकर कोनेा जवाब नइहे?
– का गुनत हस बेटा, अजनबी हा पूछथे तो मन मं जतका सवाल उठत हे तेकर सबके जवाब मोर करा हे. पूछ का पूछना अउ जानना चाहत हस?
– हड़बड़ागेंव. हिम्मत बांधेव, धरेंव अउ आंखी ले झरत आंसू ला भरोसा दिलायेव. केहेंव-बेटा, तोर आघू मं खड़े हे तौन कोनो साधारन मनखे नोहय? लगथे जरूर कोनो फरिश्ता हे या फेर नर तन धर के देवता आय हे. ओकर पांव तरी गिर जा, तोर जीवन सुफल हो जही.
-मैं झुकते रेहेंव के पलक झपकते ओहर अंतरधियान होगे. एती-ओती आंखी फार-फार के चारो मुड़ा निहारेंव न ओला दिखना रिहिस अउ ना दिखिस.

(परमानंद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi News

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर