छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: फोसवा पायके उफले हे, डोंगा नोहे जाने

बाते बात मा लपर - लपर कतको फांकने वाला अपन हुसियारी के सेती दुनियादारी मा बोहाए असन रहि जाही. लफ्फासी कतका दिन चल ही. दइहान के गोबर असन एक दिन घुरुवा के रद्दा धरही. सरग अउ नरक इहें हे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 11:42 PM IST
  • Share this:

डोंगा अपन बनावट के सेती ए पार ले ओ पार लाने , लेजे के साधन हरे. डोंगा ला खोवत - खोवत डोंगहार जान डारथे के कइसे धार हे, अउ कइसन हे. पार पाने वाला. जिनगी के घटाना, बढ़ाना काखर जिम्मे हे बस अतके मा सब्बो जनम के सार दिखत हे जान ले. पेरावट के आगी अउ वोखर धुंगिया मा घलोक पानी के असर होथे. राख करिया जथे अउ फोसवा असन उड़ियावत - उड़ियावत कतको झन मुड़ उप्पर घलोक चघे ला धरथे. बउरे के हिसाब आगी, पानी हमर मदद करथे नइते ओखर सेती कतका नकसान होही ते अन्ताजी नइ जान सकस. बाते बात मा लपर - लपर कतको फांकने वाला अपन हुसियारी के सेती दुनियादारी मा बोहाए असन रहि जाही. लफ्फासी कतका दिन चल ही. दइहान के गोबर असन एक दिन घुरुवा के रद्दा धरही. सरग अउ नरक इहें हे.


 चरदिनिया सुख ला का कहिबे. बने रेहे अपन घर दुवार मा. दुखम - सुखम चलत रिहिस. पर के बुध मा आके अपन ठिकाना बदलना बने बात नोहे. ओकर मेर हावय तोर मेर नइये ते का भईस. मन मा संतोष राख एक दिन तोर आाही. "घुरुवा के दिन घलोक बहुरथे " अइसे केहे गेहे. सियान , सियनहिन , नारी परानी , लइका - पिचका एकरे मन के सेती घर हा घर असन लागथे. कोनो मेर ला आ अपन बनाए छाया मा बईठ के सुरता. तोर ओगारे पछीना तरतर - तरतर बोहावत हे तेनो सुख देवत होही. पानी , पसिया के थेगहा राहय कहिके बनिहार , भूतिहा दिन रात खटाथें. अपन घर के कपाट बेड़ी कइसने राहय अइसे लागथे के हमर परिवार सुरक्षा मा हाबे. पर घर के सुख ला अपन घर संग जोंगे - जंगारे के काम कभू झन होवय. सियान के समझाइस मा घरो - घर मंदिर असन पबरित हो जथे.


दिखावटी जीवन जीने वाला अपन गांव घर मा चिनहउ हो जथे. का करय बनाए ले चलाए ले थोरे होथे , मन ला जगाना परथे. जेन दिन जाग जबे तोर अपन सेती कतका सुख के अनुभव ले जान डारबे. दिखत हावय तइसन संसार के भोरहा मा नइ जीना चाही. सब अपन - अपन मा मस्त हें. चमड़ी अउ दमड़ी के सेती कतको घर सरग असन दिखथे. आवत - जावत मनखे कतको काहंय कखरो पतियाना जरूरी नइ होवय. रद्दा के चिन्हारी मंजिल कोती लेगही ही. कहां पहुंचना हे कोन बताही. पहुंचे के ठिकाना एके हे. सब बात के अक्कल हे अउ नइये तको. जानत रेहे तभो ले अइसन रद्दा मा काबर रेंगना जेन हा कोनो ठिकाना कोती नइ जावय. थोकन रेंगे तहां ले भसरंगले खाई आगे , फेर लहुट के रेंग. लहुट - पहुट के रेंगई के सेती का होगे जाने नहीं. रेंगना हे ते जेन रद्दा ला दुनिया चिन्हउ बनाके राखे हे तेन रद्दा मा रेंग.


छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: पितरमन के प्रति सेवाभाव के पाख - 'पितर पाख'


रटहा डारा ला फोसवा होए के गुमान होगे. कतको झन ओखरे सेती मुड़भसरा गिर परिन. गिरे परे पान - पतई ला देख जेन कोती के हवा तेन कोती ठिकाना. रदरद ले कुढ़ोए फेर बरबर ले उड़ियाए अतके मा ओखर गति हे. पानी परिस तहां चमचम ले होगे. खातू - कचरा होगे . माटी रिहिस माटी मा मिलगे. लीला देखाने वाला खुदे लीला करके दिखाइस. ओखर लीला अपरंपार हे. सिखोना राखे के बुता कभू नइ करिन. अपने - अपन जेन समझत गिन तेन गुनवान होगिन.


 उफले रा फेर पानी के धार मा. सकलाए पानी मा उफलाना बने नोहय. धार ला जान डारबे ते जरूर कोनो मेर नवा किनारा मिलही. नवा जगा , नवा किनारा हो सकत हे तोर जिनगी मा कुछ नवा हो जावय अउ तें डोंगहार हो जवस.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज