छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: ब़ोइर तरी के बतिया

सुरुज नारायन जमराज कस बनगे हे, चना गहुँ के होरा कसभुंजत हे सबला जइस्रे कोरोना मनखे मन ला करो करो के मारत हे,जीव ला लेवत हे.
सुरुज नारायन जमराज कस बनगे हे, चना गहुँ के होरा कसभुंजत हे सबला जइस्रे कोरोना मनखे मन ला करो करो के मारत हे,जीव ला लेवत हे.

सुरुज नारायन जमराज कस बनगे हे, चना गहुँ के होरा कसभुंजत हे सबला जइस्रे कोरोना मनखे मन ला करो करो के मारत हे,जीव ला लेवत हे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2020, 5:16 PM IST
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बाप रे बाप नवतपा आगी कस अंगार बरसत हे. जीव कलबलाव हे, भोंभरा अतेक के उखरा पाँव घर ले बाहिर नइ निकल सकस. मुडी मं खुमरी नइते पागा बाँध के निकलबे तभे जीव परान बाचही, नइते फिर लू के चपेट मं आये बिगन रहे नइ सकस. सुरुज नारायन जमराज कस बनगे हे, चना गहुँ के होरा कसभुंजत हे सबला जइस्रे कोरोना मनखे मन ला करो करो के मारत हे,जीव ला लेवत हे. पानी बुड़े नइ बाचही तइसे लागत हे. कसेली के करौनी ला लइका मन सुतई मं करो करो के सपेट डरथे वइसने कस हाल कोरोना करत हे. बड़े बड़े मन माथा धर के बइठगे हे. का होही कैसे होही इही सोच में परे हें? अब जौन हो ही तौन  होबे करही अपन कोती ले कोरोना राक्छस ला मारे के उदीम तोह सब जुर मिलके करत हें फेर ये चंडाल बाम्बी मछरी कस सलंग देवत हे, लगथे जइसे येहर कालनेमी रावन कस बनके आगे हे.

आदमी गुनथे कुछु  अउ  हो जथे कुछु. जनक मंडल सोचे रिहिस हे बेटा के बिहाव करिहौं, लगिन घला धरा डरे रिहिस हे फेर हर्रस ले बिपत मुड़ तरी अइसे खपलागे के चुरमुरा के रहिगे. कोनकोती ले कोरोना टिड्डी दल बरोबर अइसे झपागे के कीर-कार् नइ कर सकिस. देश भर ला कोन काहय पूरा संसार भर मं ये रोग सचरगे. सब कोती लाकडाउन होगे. चौबीसों घंटा घर मं खुसरे-खुसरे सबके जीव कउवागे हे. का करे जाए, कइसे नेतघात जमाये जाए, इही ला सोचत विचारत जनक मंडल के माथा भारी होगे. तीर मं बइठे राहय ओकर गोसइन रुकमनी तेला पुछथे, तब ओहार का बतावय? कोरोना के डर म लाकडाउन ला देख के ककरो हक्का बक्का नइ चलत हे. खेतीखार, कल कारखाना, उद्योग धंधा, आफिस,दूकान, रेल, मोटर गाड़ी अउ हवाईजहाज तको बंद हो गेहे. यहा का राक्छस कस चंडाल आगे हे तेकर लेखे तो ओकर बाप पुरखा मन घला नइ देखे रिहिन हे तौन आज देखे ले परत हे, आगू का होही तेला बिधाता जानय?

एक दिन सरी मंइन्झिनी मंझनिया मंडल ला बाहिर पानी-पोखार जाये ले परगे. आमा तरिया मेर बोइर के पेड़ रिहिस हे विही मेर खाल्हे मं बइठगे. अतके बेर पेड़ कोति ले अचानक आवाज आथे. मंडल पेड़ तरी बइठ के ये का करत हस,ये अच्छा काम नइहे,सियान मनखे होके अइसन तो नइ करना चाही कुछु तो लिहाज करे करौ. मंडल ये आवाज सुनके झक्नकागे, ओहर एती ओती देखथे तब कोनो देखउन नइ दिस. अब ओहर बइठे-बइठे सोचे ला धर लिस. बात तो सही हे,कोनो पेड़ के नीचे मं पानी-पोखार (शौच) नइ करना चाही. धरा पसरा सफा होइस, हाथ जोड़ के जौन कोती ले आवाज आये रिहिस हे तेकर करा मुअखरा माफ़ी मांगिस. एकर बाद तरिया म आके नहाइस धोइस अउ घर आइस. रस्ता भर कोनो मरे रोवइया नइ मिलिस, कुकुर मन के छोड़े.



चार दिन बीते के बाद ओ गाँव मं नाचा पेखन होइस. गुड़ी चौक म डटा-डट मनखे नाचा देखे बर जुरियाय राहय. ठीक दस बजे रात के नाचा शुरु होथे. परी अउ गम्मतिहा मन के गाना नाचना सुरु होथे. अतके बेर परी एक ठन गाना गाये ले लगिस. उही बखत जनक मंडल घला नाचा देखे ले आये रहिथे. सरपंच घनाराम ठेठ्वार जउन अपन लंगु झंगू मन संग बाजवट मं बइथे रहिथे तउन मेर आके मंडल बइठ जथे. परी के गाना ला सुन के सरपंच खुस हो जथे अउ ओला फरमाइस करके इशारा देवत अपन तीर मं बलाथे. परी ओकर मेर आके मटककली बरोबर मटक-मटक के नाचे ले धर लिस. ओकर गीत के बोल रिहिस से –
बोइर तरी के बतिया
मैं जानत हांवौ मंडल
मैं जानत हावौ गा
तै का करे बोइर तर
मS जानत हवौ मंडल
बोइर तरी के बतिया.

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ए गाना ला जब वो परी गावत रिहिस हे तब सुर ताल म गजबे सुघ्घर लागत रिहिस हे. हारमोनियम, बैंजो, तबला, ढोलक, गिटार, मंजीरा के सुर ताल जब एकमई होके गुन्जिस तब ओतका बेर के मजा कुछ अलगे रिहिस हे. संगीत परेमी मन मातगे रिहिन हें तइसे लागत रहिसे. सरपंच ये गाना ला सुन के सौ रूपया के एक ठन नोट ओ परी ला थमहा दिस. ओ मगन होके मुचुर-मुचुर मुस्किआवत पंडाल मेर चले गय अउ फेर उही गीत ला सुर धर के गाथे तब जनक मंडल अकबकागे, ओकर छाती के धड़कन बढ़गे, उपरसंसी साँस चले ला धर लिस. नाचा मेर ले उठ के ओहर घर आगे. सोचे लगिस-ए नचकाहfरन आखिर जानिस ते जानिस कइसे के मै ओ दिन बोइर तरी का करेंव, अउ काकर संग गोठ बात होइस. इही चिंता मंसोचत बिचारत बिस्तर मं कतका बेर नींद परिस तेकर गम नइ पइस.
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