छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: छत्तीसगढ़िया मनखे के जिनगी के संगवारी जानवर बँधाथे घर दुवारी 

इही जीव मन ओखर संगवारी, रखवार, हितवा मितवा रहय. पाछू जंगल के जीव ले अलग होइस अउ अपन परिवार बनाइस. परिवार मा कुछ जानवर ला मिंझारिस.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 11:43 AM IST
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नखे के जिनगी मा चार किसम के नत्ता माने गय हे. परिवार के नत्ता, समाज संग नत्ता, संसार संग नत्ता अउ भगवान संग नत्ता. इही चारों नत्ता  ला मिंझार के मनखे के जिनगी पूरा होथे. मनखे हा अपन जिनगी के संगवारी मा मनखे के संगेसंग गाय गरु अउ दूसर जानवर ला चलो बनाथे. मनखे या दुख सुख , मया पीरा के समझ होथे वइसने जानवर या घलो होथे फेर ओ बता नइ सकय. मनखे हा आदिमानव रहिस ता जानवर मन ओखर संगवारी रहिन. मनखे हा सामाजिक जीव आय समाज ले बाहिर रहिके अपन जिनगी नइ बिताय सकय. पहिली जब मनखे के परिवार नइ रहिस, समाज नइ बने रहिस तब मनखे  जंगल मा रहय अउ उहाँ के जीव संग अपन जिनगी बितावय.


इही जीव मन ओखर संगवारी, रखवार, हितवा मितवा रहय. पाछू जंगल के जीव ले अलग होइस अउ अपन परिवार बनाइस. परिवार मा कुछ जानवर ला मिंझारिस. अपन खेती खार के सहयोगी बनाइस. छत्तीसगढ़िया मनखे मन घलो कतको कन जानवर मन ला अपन परिवार मा मिंझार के रखथे. गाँव के रहइया मन अपन जिनगी जीए अउ दुख सुख के बेरा मा इही नान्हे बड़े जानवर के संग पाथे. खेती बाड़ी के बूता मा ये जानवर मन उँखर खाँद जोर के कमाथे. छत्तीसगढ़िया मन अपन जिनगी मा जौन जानवर ला मिंझारथे संघेरथे ओमा गाय बइला, भँइसी भँइसा, छेरी बोकरा, भेंड़ी भेंड़ा, कुकरी कुकरा, सूरा बधिया, गदहा गदही, कुकुर बिलई हावे. बेंदरा, साँप ला घलो पोसथें.


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छत्तीसगढ़िया मन ये जानवर ला दूध मही, माँस, खातू, केंस, अउ बूता मा सहयोग बर पोंसथे. गाय ला दूध, दही, मही, घीव खाय बर मनखे मन पोंसथे. ओखर बछवा पिला हा बड़े बाड़के बइला बनथे. खेती किसानी मा ओला नाँगर, गाड़ा, कोप्पर, दँउरी, बेलन मा फाँदथे. अइसने भँइसा भँइसी ला घलो दूध दही खेती किसानी बर पोसथे. इँखर गोबर ला खेती बाड़ी के खातू बनाय जाथे. मरे के पाछू एखर हाँड़ा अउ चाम ला घलो बेंच देवय. दान दाइज मा गाय बछिया दान करे जाथे. फेर अब एमनला डेयरी फार्म मा राखके व्यवसायिक रुप मा बउरत हे. छत्तीसगढ़ मा छेरी बोकरा, भेंड़ी भेंड़ा ला घलो दूध, मास, केंस अउ खातू बर पोंसथे.


एखर दूध ला कमती बउरथे फेर मास ला, खातू ला अउ केंस ला बेंच के पइसा कमाथे. देंवतहा मन देव धामी मा पूजउनी करथे. सूरा बधिया के मास, केस, खातू हा घलो बेचाथे. एखरो पूजउनी होथे. आदिवासी मनघर बिहाव मा मांदी खवाथे. टिकावन मा बेटी ला देथे. छत्तीसगढ़ मा कुकरी कुकरा पोंसे के चलागन हे, एखर अंडा, मास ला साग राँध के खाथें. सगा सोदर के मान गाउन करेबर साग राँधथें. देव धामी के पूजउनी चढ़ाथे. गदहा गदही ला घलो छत्तीसगढ़ मा कतको बच्छर पाछू ले पोंसत आत हे. गदहा हा बोझा बोहइया जानवार आवय. ओखर पीठ उपर कतको बोझा लाद ले, ओहि दुरिया पहाड़ी मा चढ़ा देथे. राजा पाहरो मा धोबी घर गदहा राहय.


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सील लोढ़ा बनइया बेलदार मन इँखर पीठ मा लाद के गाँव गाँव मा सील लोढ़ा जाँता बेचे बर जाथे. छत्तीसगढ़ के परिवार मा कुकुर बिलई घलो पोंसे के चलागन कतको जमाना ले चले आवत हे. कहे जाथे कुकुर हा मनखे सबले पहिली संगवारी बनिस. कुकुर सबले जुन्ना संगवारी आवय. कुकुर   मनखे के संगे संग रहिथे. घर अउ खेती खार के  दिन रात रखवारी करथे. घर के कुकरी, बोकरा, बारी बखरी ला चोर ढोर ले बचाथे. बिलई ला घर मा राखे अन्न ले ला मुसवा ले बचाय बर पोसे जाथे. छत्तीसगढ़ के देवार आदिवासी जनजाती मन बेंदरा घलाव पोंसे. बेंदरा ओखर परिवार के सहारा बने. बेंदरा ला नचा के दान पुन ले अपन परिवार बर चाउँर दार के बेवस्था करे.




गाँव गाँव पारा पारा बेंदरा के तमासा  देखावय. लइका सियान के मनरंजन करे. जौन मन बेंदरा नइ राखय ओमन साँप ला घलो पोंसे. वहू ला लोगन ला देखा के अपन परिवार ला पाले पोंसे बर बेवस्था करे.

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