छत्तीसगढ़ी व्‍यंग: बाईस्कोप म चुनावी-कोरोनाकाल के चकरी आर–पार, कहूँ जीत-कहूँ हार

खबरीलाल किहिस-‘ कोरोनाकाल म नेता मन कोरोना ले निडर होय के वरदान मांगे हें. कोरोना चेता के किहिस होही अति करहु त मैं तुमन ल कोरोना–लोक जरूर घुमाहूं. नेताजी मन जल्दी-जल्दी म कोरोना के इही वरदान ल पा के खुश होइंन होहीं अउ चुनाव परचार म निकलगें. भासन बीर नेता मन युवा मन ल रोजगार देय के पासा फेंकत हें.
खबरीलाल किहिस-‘ कोरोनाकाल म नेता मन कोरोना ले निडर होय के वरदान मांगे हें. कोरोना चेता के किहिस होही अति करहु त मैं तुमन ल कोरोना–लोक जरूर घुमाहूं. नेताजी मन जल्दी-जल्दी म कोरोना के इही वरदान ल पा के खुश होइंन होहीं अउ चुनाव परचार म निकलगें. भासन बीर नेता मन युवा मन ल रोजगार देय के पासा फेंकत हें.

खबरीलाल किहिस-‘ कोरोनाकाल म नेता मन कोरोना ले निडर होय के वरदान मांगे हें. कोरोना चेता के किहिस होही अति करहु त मैं तुमन ल कोरोना–लोक जरूर घुमाहूं. नेताजी मन जल्दी-जल्दी म कोरोना के इही वरदान ल पा के खुश होइंन होहीं अउ चुनाव परचार म निकलगें. भासन बीर नेता मन युवा मन ल रोजगार देय के पासा फेंकत हें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 4:50 PM IST
  • Share this:
बरीलाल अउ संगवारी मन कोरोनाकाल म चुनावी-बाईस्कोप म विधानसभा चुनाव/उपचुनाव के रंग–तरंग,चित्र-विचित्र देखत हें. अपन-अपन आँखी ल गड़ियाय हें. खबरीलाल किहिस-‘चुनाव बखत तन मन म अतेक जोश आ जथे के डोकरा मन छोकरा लगथें अउ डोकरी मन छोकरी कस. चुनाव गरमी नापे के आज तक कोनो थर्मामीटर के आविष्कार नइ होय हे. जोश मुड़ उपर नाचथें. चुनावी गरमी चढ़थे-उतरथे,  उतरथे-चढ़थे.’ लालबुझक्कड़ किहिस-‘ कतको झन ल चुनाव के होत ले काम मिल जथे. आम मनखे फोकट म खाय, पिये के तिहार के रूप म एला जानथें.

चुनावी नारा लगाव, पोस्टर चटकाओ, बिल्ला लगाओ, बिल्ला बांटो. दिन रात एक करो. चुनाव के गरमी ल बढाव. चुनाव के गरमी वोटर मन ल चटाचट जरना जरूरी हे. हाय-चुनाव,हाय-चुनाव माते रहाव. बिहार विधानसभा चुनाव, म.प्र./छत्तीसगढ़ म विधानसभा उप-चुनाव के घमासान चलत हे. बिहार के भासन बीर नेता मन लाखों–लाख युवा मन ल रोजगार देय के फांसा फेंकत हें. चुनाव निपटे के बाद इनकर एके बुता होही ये बरसों नींद लेहीं, चुनाव आते साठ फेर जागहीं. आघू म प.बंगाल के उप–चुनाव हे. एहा अउ टाईट चुनाव मैच सिद्ध होही. कोरोनाकाल के ये सब इतिहास परसिद्ध चुनाव जाने जही. ’

कोरोनाकाल के निडर नेता
खबरीलाल किहिस-‘कोरोनाकाल म नेता मन कोरोना ले निडर होय के वरदान मांगे हें. कोरोना चेता के किहिस होही अति करहु त मैं तुमन ल कोरोना–लोक जरूर घुमाहूं. नेताजी मन जल्दी-जल्दी म कोरोना के इही वरदान ल पा के खुश होइंन अउ चुनाव परचार म निकलगे हें. इन बड़ जल्दी म हें न. चुनाव लोकतंत्र के सब ले बड़े तिहार आय. सब जानत हें समे होत बलवान. समे संग देथे त भाग चमकथे अउ मरहा घलो पहलवान हो जथें. समे कोनो ल नइ घेपे. चुनाव के आना सब ले बड़े इमरजेंसी होथे. ये ह कोरोना मउसम के संगे-संग राजनीतिक मउसम घलो आय.
गरीबदास किहिस-‘ये मउसम छोटे-बड़े सबे नेताजी मन के मउसम आय. सुते चुनाव-वीर चुनाव सुन के झकना के जागे हें. कतको नेता मन बर ये ह पइसा कमाय के मउसम आय. चुनाव के बहाना मोटहा रकम के आवक हो जथे. चुनावी जुद्ध काल म नेताजी मन घर म कलेचुप नइ बइठ सकें दीगर बुता ल छोड़ के इही बुता म भिड़ जथें. खाली कुरसी देख के मन ललचाथे ? लालबुझक्कड़ किहिस-‘ कुरसी भजन पूरा भक्ति- भाव/ छल, बल, दल ले करे के विधि –विधान हे. इही मौसम ह चमचा चुने के घलो सही मौसम होथे. जेन नेता-आरती गाथें. परसाद बांटथे तेखर नवा जनम हो के रहिथे. कुरसी खुस होथे, वर देथे. ये कुरसी मन ल कलजुगी इन्द्रासन जानो. एखर पाय ले लछमी दाई खुश होथे. सब सुख अपने अपन मिलथे.



चुनावी यज्ञ के गुप्त दान-मान
खबरीलाल किहिस- ‘ चुनाव क्षेत्र म अचानक राजनीतिक पारटी मन म हलचल पैदा करके भुइंया ल डोला देथे. सुंदर –सुंदर नवा नवा किसम–किसम के कार रेस सहर-सहर ,गाँव-गाँव म वोटर मन के आँखी-आँखी म दउडत रहिथे. सब प्रत्यासी अउ कार्यकर्ता मैंदान म शब्द के गोला /भाला फेंकथें. शतरंजी चाल चलथें. किसम–किसम के अस्त्र-शस्त्र चलथे. चुनाव यज्ञ म वोटर मन ल गुप्त दान के बड़ महिमा बताय जथे. ओहा कोनो रूप ले हो सकत हे  -‘एला ‘सोई जानई जेही देहू जनाई ’कथें. ये रहस्य ल वुही जानथे जेन चुनाव डायरेक्टर होथे. गुप्त चढ़ोत्री के बड़ा अच्छा फल मिलथे. जोंन दिखथे तेमा सचाई कम जेन नइ दिखे तेमा सचाई जादा होथे. ’

गरीबदास किहिस- ‘आजकल  हमर नेता मन लोकतंत्र ल महिमावान बना दे हें. चुनाव जीते बर अतेक सुंदर –सुंदर घोसना करथें के वोटर मन के मन ललचा जथे . चुनाव जीते के बाद राज करो. लोकतंत्र के राजा मन ले हिसाब मांगे के हिम्मत जनता आज तक नइ कर पाय हें. कोनो हल्ला-गुल्ला करथें तहू मन अपने–अपन चुप हो जथें. लोकतंत्र म नेता–लीला अइसने चलत आत हे. चोँच लड़इया चोँच लडाते रहि जथें.’

राजगद्दी के जादुई चिराग
खबरीलाल किहिस- ‘कोरोना-काल के रैली ल देख के जी ह पोट-पोट करत हे . खुद कोरोना (कोविड-19) घबरावत हे. न कोई रोका, न छेका. न कोनो कायदा कानून के परवाह. राजगद्दी होथे जादुई चिराग बरोबर,जो माँगबे सब मिलथे. बस जनता करा जाके सुंदर–सुंदर सपना बेचना हे. हर सपना अनमोल हे. सपना के फांसा म वोटर के आशा ल जगाना हे. गरीबदास  किहिस- ‘भीड़ देख के नेताजी मन के जोश अकास ल छुए बर लागथे. उन भुला जथें के उन ल हजारों आँखी देखत हे. पूरा देश देखत हे. उन कोरोना के देख–रेख म हें. बिहार विधानसभा के चुनावी रैली होय चाहे /म.प्र के उप-चुनावी भीड़ अउ रैली कोरोना संक्रमन के घंटी बाजत हे. फेर वाह रे कुरसी के दीवाना हो मोरचा म डटे हें. ये चुनावी वीर सेना अभी गरीब मन के सुख–दुःख के संगवारी लगत हें. चुनाव के बाद तें कोन, में कोन?”

लालबुझक्कड़ किहिस-‘चुनावी घोसना हर दल के एक ले बढ के एक हें. हर नेता सोचत हे के मोर बिना ये प्रदेश नइ चले. राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर लेख लिखेहे –नेता नहीं नागरिक चाहिए. देश म बड़  बदलाव अइस अउ नागरिक कम ,नेता जादा होगे. हर गली, मोहल्ला म नेता अउ नेतागिरी जिंदाबाद हे. कोनो फूल टाइम त कोनो पार्ट-टाइम नेतागिरी करत हें. कोनो पावर पुजारी आंय. अपन पावर बढाय म लगे हें. अइसन नेता घलो हें, जेन फुग्गा छोड़ के जनता ल चन्द्र-लोक के सफर करवाथें . हर समस्या ल सुंदर लीप पोत के चुनाव म ओला चमकत देखाथें.’

जब तक दवई नहीं तब तक ढिलई नहीं
खबरीलाल किहिस-‘ये डाहर चुनाव परचार चोटी म पहुंचगे हे, वो डाहर विशेषज्ञ मन के अनुसार कोरोना संक्रमन घलो ढूलत हे. एहा संजोग के बात आय. कोरोना काल म ताजपोशी के आनन्द अलगे होही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी चेताय हे के जब तक दवई नहीं तब तक ढिलई नहीं. ऐसे लागथे के विधानसभा के चुनाव अउ उप-चुनाव के परिणाम के संगे संग कोरोना संक्रमन के घलो रिजल्ट आही. चुनाव परचार म जोश अकाश–पताल एक होवत हे. देवारी तिहार के बजार अभी ले गनगनावत हे. दसेरा ,देवारी अउ दीगर तिहार आवत देख के मोदीजी के कोरोना चिंता कम नइ हो पात हे. मोदीजी देश ल चेतइस हे – लाकडाउन चला गया पर वायरस नहीं गया. कोरोना नियम खूंटी म टंगाय हे. चुनाव म कोरोना वैक्सीन के इंट्री होगे हे. बिहर में वोट दो ,मुफ्त वैक्सीन लो” के नारा सुनात हे.

लालबुझक्कड़ किहिस-‘चुनाव होय के बाद घलो चार दिन अउ रात अब्बड़ तात रहिथे. चुनाव जितैय्या राजपथ के रद्दा रेंग देथें. हरैय्या मुहूँ ओथार के बइठ जथें. गाँव-गंवई म मनखे के पक्का चिन्हारी हो जथे के फलां मनखे हर फलां पारटी के आय. अउ कटकटा के दुश्मनी हो जथे. सूरदास के कामरी चढ़े न दूजो रंग कस गाँव-गंवई उपर राजनीति के चढ़े रंग नइ उतरे. सहर म सब पारटी वाले एक दुसर ले मिले-मांझे होथें.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज