छत्तीसगढ़ी व्यंग्य: आम मनखे के राशन कारड-कसरत

छत्तीसगढ़ व्यंग

आधार कारड ह राशन कारड ल लोकतांत्रिक-धक्का मारिस. खुद अव्वल आगे. पहिचान बर अब राशन कारड ल पूछइया कोनो नइ हे. पहिली बेजान राशन कारड खूब चलिस.अब बाउंड्री ले बाहिर कर दे गे हे.

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भिखारीदास अउ दौलतराम बहुत दिन बाद मानव मन्दिर तिर मिलिन. भिखारीदास किहिस-मोला सरकारी राशन कारड के सुरता आवत हे. सरकारी राशन कारड पहिली आम मनखे के पहिचान होय. आधार कारड ह राशन कारड ल लोकतांत्रिक-धक्का मारिस. खुद अव्वल आगे. पहिचान बर अब राशन कारड ल पूछइया कोनो नइ हे. पहिली बेजान राशन कारड खूब चलिस. अब बाउंड्री ले बाहिर कर देगे हे. ओखर चिन्हारी सरकारी राशन तक हे. राशन कारड बस राशन बर मान्य हे, आधार कारड ह जब-तब कैंची मार के राशन कारड गिरा देथे. सच हे ‘सब दिन जात न एक समाना’ राशन कारड कल्हरत, चीखत, चिल्लावत घर के कोनो कोंटा म परे रहिथे. ओखर आत्मा कलपत जथे. आधार कारड ह राशन कारड ल दिन म दसों बार ठेसरा मारत रहिथे. कहिथें- ‘आधार बिन सब निराधार हे’. ये झगरा ह ‘मुर्गी पहिली पैदा होइस के अंडा? प्रश्न बरोबर होथे. राशन कारड के जनम दशकों पहिली होइस. कुछ साल पहिली आधार कारड अइस. आते साठ थानेदार कस होगे.

राशन कारड के प्राण-प्रतिष्ठा

दौलतराम पूछिस-सरकारी राशन कारड बनाय के मौसम सुहाना होथे. अब त आधार कारड के सहारे राशन कारड बनथे. अइसन म आधार कारड के टेस बाढ़नाच हे. बड़े-बड़े घोटाला के कथा कहानी ल राशन कारड अपन आप म चटका लेथे. राशन कारड निर्जीव होथे, फेर साहेब के सील मोहर लगते साठ ओखर प्राण-प्रतिष्ठा हो जथे. फेर ये कारड पावर म आ जथे. ओखर लीला अपने आप होवत रहिथे. राशन कारड के अपन कहीं क्लोज, त कहीं ओपन मार्केट हे. साहेब मन राशन कारड ल सेल्यूट करथें.

राशन-कारड म मुखिया के वास

भिखारीदास किहिस-आम मनखे राशन कारड के लड़ई म फील्ड-आउट/ फील्ड-इन होवत रहिथें. ओपन-क्लोज गणित होथे. राशन कारड बनगे त अहोभाग्य जान. जेन लटके हें, तेन लटके रही जथें. जेखर तिर राशन कारड होथे तेन जगा-जगा बताथें देखो, हमर करा राशन कारड हे. आयुष्मान कारड हे. गियानी धियानी मन कथें - गरीबी रेखा वाले कारड म मुख्यमंत्रीजी के वास होथे. वइसने-जइसे क्षीर-सागर म भगवान बिष्णु अउ माता लछमी के निवास होथे. ये कारड मामूली कारड नोहे एखर महत्व कामधेनु गाय बरोबर हे. ये कारड ल देखा भर देव, तहाँ ले सरकार तिर जो चाहे माँग लेव. धीरे-धीरे सब मिलथे. चुनाव के दिन म नेता मन सगुन देथें. वुसने सगुन जइसे बर बिहाव म दुलहा ल दुलहिन के दाई सगुन देथे. बिहाव के नेंग कस चुनाव के नेंग होथे, जेला नेताजी मन ससम्मान देथें. कुरसी सुन्दरी बड़ मनमोहिनी होथे. अइसे मोहिनी थोपथे के सब गियान-धियान भसम हो जथे. सुरता रहिथे केवल कुरसी सुन्दरी.

नकली गरीब, फायदा म !!

गरीबी रेखा के कारड के धियान करे ले सब सरकारी सुविधा आँखी-आँखी म नाचथे. एखर सब ले जादा फायदा नकली गरीब मन उठाथें. नकली गरीब मन तिर असली गरीबी रेखा के कारड वार्ड के नेता मन के किरपा से बनथे. राशन दूकान वाले भइयाजी मन बहुत हुशियार जीव होथें. अपन सुवारथ ल साधे बर नवा-नवा रद्दा बना लेथें. नवा रद्दा बनाय बर खूब राहत कार्य चलथे. कहावत हे के नवा तारा(ताला) बने के पहिली चाबी बनाय जथे. हर बुद्धिमान मनखे या चतुरा मनखे अपन रद्दा ल खुदे बनाथें. जेन भटकिन तेन अटकिन.

आफिस के मौसम
दौलतराम किहिस-राशन कारड बनना बहुत बहाद्दुरी के काम होथे. आफिस के मौसम म अनुकूल होय ले बाबू साहेब के किरपा हो सकत हे. वइसे लोक सेवा गारंटी अधिनियम हे फेर ये अधिनियम आफिस के आगू म टाँगाय के शोभा पाथे. बुता के होवत ले आफिस आवत जावत रहो, चाय, पानी पिए ले कोनो साहेब बाबू ल रोक नइ पांय. काबर के बाबू के बिना साहेब के चकरी अटक जथे. बाबू साहेब जी मन ला फंसा सकत हे, फंसे साहेब ल अपन फ़ाइल के खाल्हे डाहर ले निकलवा घलो सकथे. पन्दरा दिन ,बीस दिन, महीना दु-चार महीना म राशन कारड बनगे त अपन आप खुद ल खुशनसीब कहि सकत हो. लाईन अटैच रेहे के अघोषित अनिवार्यता होथे. दुनिया के सब ले व्यस्त अउ खाली मनखे होथें बाबू जेखर उपर बाबू के किरपा हो जाय ओला सह्र्ब घलो रोक नइ पाय.नहिं त फेर तपस्या हम भारतीय बर उपर ले लिखाय आथे.
गलती करे के मौलिक अधिकार

भिखारीदास किहिस- राशन कारड बनगे तो जान लेव आप बड़ भागमानी हो. राशन कारड म अधिक से अधिक गलती करना राशन कारड बनइया मन के मौलिक अधिकार हे. खाद्य-विभाग के पावर अनंत होथे. उन मरे मनखे के राशन कारड बनाय म कुशल होथें. एला उन जन-सेवा म झट गिन लेंथें .हर सरकार जानथे के हर राशन फर्जी राशन कारड शहर-शहर/गाँव-गाँव के दूकान म होथे. गुपचुप सरकारी अनाज बेचना ह उनकर सेवा शुल्क होथे. कभू- कभू ठेलहा समे म खाद्य-विभाग छापा मारे के नाटक घलो करथे.चार दिन हल्ला होथे.खाद्य-विभाग म ईमानदार अधिकारी आय हे. जनता खुश हो जथे. खोटा सिक्का मन बजार म खूब दउड़थे.

पूजा-पाठ, दान दक्षिणा
दौलतराम किहिस-सरकारी राशन दूकान आबंटित करे बर गुपचुप बोली बोली लगे के खूब खबर आथे . रिश्वत तब घलो खून म घूरे रिहिस. अब घलो घूरे हे. राशन दुकानदार, खाद्य-निरीक्षक, खाद्य-अधिकारी, छोटे बड़े नेता सब के हाथ लाम होगे हे. दान-दक्षिणा बिना कोनो फरय-फुलय नहीं. दान-दक्षिणा होय ले रोटी अप-अपन फूलथे. सब विघ्न संतोषी मन के आशीर्वाद मिलथे.

समाजवाद के आरती
भिखारीदास किहिस-हमर देश म तीन दशक पहिली ले समाजवाद आय हे. गाँव-गली म समाजवाद हे. बिना रंग रूप के घुमत रहिथे. आम आदमी समाजवाद के आरती उतारथे. सरकारी राशन दूकान के खाली बोरा-बोरी बेचे ले बने आमदनी हो जथे. अनाज म चावल, गहूँ, शक्कर के आदर्श कालाबाजारी अउ आदर्श भ्रष्टाचार कोनो नवा बात नोहे.. एमा कोनो दोष नइ लगे. समरथ को नहिं दोष गोसांई.
अंगूठा निशान ओ.के.

लालबुझक्कड रस्ता चलत गोठ सुन के रूकगे. ये गोष्ठी म अपन उपस्थिति दर्ज कराते साठ किहिस-सरकार बदले ले राशन कारड घलो बदल जथे ये आदर्श होगे हे . पहिली राशन कारड पहिचान-पत्र होय. अब संचार-क्रान्ति होय ले आधार कारड पहिचान कराथे. आयरिश चेक होथे. अंगूठा के निशान ओके करथे. भिखारीदास किहिस-अब आधार बिना सब निराधार हे. आधार लेव अउ धारों-धार बढ़ो.

गरीबी रेखा, कल्पित रेखा बरोबर
लालबुझक्कड किहिस-आजकल त किसम किसम के कारड हे.अलग-अलग रंग के कारड. गरीबी रेखा खींचाय हे. अक्षांश, देशांतर रेखा बरोबर यहू गरीबी रेखा, कल्पित रेखा आय. यहू मूलत: माने हुए रेखा आय. वार्ड प्रतिनिधि जेला चाहे वोला ये रेखा उपर बइठार देथे. ये मन परमानेंट वोटर होथें. ये रेखा सब रेखा ले जादा गरू हे. कतको झन निच्चट गरीब मन ये कारड ल पाय बर तरस जथें. ये कारड के जादा लाभ जोन एखर दायरा म नइ आंय तें उठावत हे. भ्रष्टाचार करइया मन हर जगा शुद्ध भ्रष्टाचार करे बर अपन रद्दा बना लेथें. एक देश-एक राशन कारड आज तक इहाँ लागू नइ होय हे.

दौलतराम किहिस- राशन कारड बनवाना, ओला हासिल करना, गलती-सुधार कराना, नाम जोड़वाना एखर बर खपना जरूरी होथे. अइसन कार्यक्रम म दोषी मन के खोज नइ करे जाय. पूरा कार्यक्रम बोझा लादे –लदाय कस होथे. जनता उन ल ढोथें. बुता नइ होय ले रोथें.
यहू म ठेकेदारी !!

लालबुझक्कड किहिस-आधार-कारड ह सब कारड के बाप बनके बइठे हे.पूरा सभ्यता अंगठा म समा जथे. बात-बात म ठेकेदारी जिंदाबाद हे. आधार-कारड घलो ठेकादारी म बने हें. लेड़गा मन के करे गे गलती ल जनता भोगथे. लेड़गा मन आधार धारक के मुड़ पिरवा होगे हें. ये सुधारो ओ सुधारो. बस इही बुता करत रहो.

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