छत्तीसगढ़ी व्यंग - जब गाँव म अइस पंचइतीराज

'पंचइतीराज धीरे–धीरे खसलत-खसलत अइस.'

'पंचइतीराज धीरे–धीरे खसलत-खसलत अइस.'

पंचजी, सरपंचजी मन के मार्गदर्शन म गाँव के खूब विकास होथे. पंचइत के आमदनी अउ उनकर आमदनी संगे संग चलतथे. बड़े पंचइत के बड़े आमदनी हे. छोटे पंचइत सरकार भरोसा हे.अब नवा जमाना हे, रोना-हाँसना सब सरकार के भरोसा हे.

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  • Last Updated: December 25, 2020, 7:12 PM IST
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खबरीलाल के आँखी टेलीस्कोप बरोबर हे, दुरिहा के चीज घलो दिख जथे. नान-नान आँखी म सब नजर आथे. पंचइतीराज के शुभ दरसन कर ओखर आँखी जुड़ हो जथे. लालबुझक्कड़, गोबरदास अउ गरीबदास के पंचइतीराज दरसन महान हे. पीपर तरी चंवरा अउ ओखर उपर कागा-श्री मन के पंचइती के सुंदर कांव-कांव के मंगल ध्वनि कान म अमरित घोरत हे. सीतल, मंद, सुगंधित हवा चलत हे. सजीव चित्र ल देख के सुंदर लोकतंत्र के तंत्र गियान होवत हे. चारों मिलके गाँव अउ पंचइतीराज उपर अपन गोठ म फोकस करत हें.

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गाँव पंख लगा के उड़िस सहर डाहर

खबरीलाल बात शुरू करिस किहिस -‘अब गाँव के घलो पुदगा(पंख) जाम गे हे. गाँव ह सहर डाहर उड़त हे. जलदी-जलदी सहर होना चाहत हे. सहर के सपना रंगीन हे. लालबुझक्कड़-किहिस-अब का सहर कहिबे अउ का गाँव सबे एकमइ होवत हे. सहर के सुविधा गाँव म आगे. आबादी बाढ़े ले अकबकावत हे. आजकल शेडो-राजनीति सुंदर फूलत फरत हे. लालबुझक्कड़ किहिस-राजनीति म शेडो(छाया) प्रतिनिधि के कालखंड शुरू होगे हे. जनप्रतिनिधि लोकतंत्र म जनता के राजा होगे हें उंकर शेडो प्रतिनिधि होथे. एहा राजनीति के नवा चाल-चलन आय. जनसेवा म बिजी नेता जेन ओरिजनल जनप्रतिनिधि आँय मैदान म कम दिखथें. बुता शेडो-प्रतिनिधि निपटाथें? खबरीलाल के महान विचार सुन गोबरदास के खोपड़ी के ढक्कन खुलगे.
शेडो-प्रतिनिधि: राजनीति के नवा विंडो

गोबरदास-पहिली सीढिया चढ़ीस किहिस- हर गाँव म पंचइतीराज हे. जिहां महिला सरपंच हे वुहाँ जादातर उनकर पतिदेव शेडो (छाया) सरपंच हें. शेडो प्रतिनिधि ह सरपंची देखथे अउ ओरिजनल सरपंच रोटी बेलथे. पूरा घर सम्हालथे. मउका देख के सेडो सरपंच संग ओरिजनल सरपंच के भूमिका म होथें. पंचइतीराज म शेडो सरपंच के सक्रियता जादा हें. बस्ती म ओखरे तूती बोलथे. सब जानत हें. लोकतंत्र हे. हर स्तर म सत्ता के भागीदारी प्रथा हे. जतके बड़े नेता होथें ओतके बड़े ओखर शेडो-प्रतिनिधि होथे. कोनो कोनो जगा अपवाद हो सकत हे. ’शेडो’ राजनीति के नवा विंडो आय.

दान-पुन्न के महिमा



गरीबदास किहिस-‘पंचइती-राज ल लाने बर दारू के धार नदिया के धार बरोबर खूब बोहइस. तपस्या कर-कर के वोटर मन के पूजा सत्कार करे गिस. नेताजी मन दिन-रात झूठ अउ सच ल मिन्झरा के गोठियावत रिहिस, का रद्दा, का बाट, का-कोलकी, का-दुवारी सब जगा जा-जा के अलख जगाय गिस. हनुमानजी ल ओखर शक्ति के गियान जामवंतजी करइस. जनता ल वोटिंग पावर के गियान नेताजी मन करइन. जनता जानिस अपन पावर ल. अहा! हम अतेक पावरफूल हन. चुनाव के बखत जनता ल उन मोह डारथे. माई-पिल्ला खूब मिहनत करथें. फ्री जनता-नेवता रोजे होथे..

लालबुझक्कड़ किहिस-पंचइतीराज बर घलो एकक वोट बर वोटर-देवता मन ल मनाय गिस. तभो कतको मन दुनो-तीनों डाहर के जीनिस खा पी के दुसर डाहर खसल गें. उनकर मांग उंच होगे. कतको उम्मीदवार मन धोती लुगरा, पोलखा, बनियान, लच्छा सिलाई मशीन, टी.वी.के अउ न जाने का-का जीनिस के गुप्त दान कर चुनावी-पुन्न कमंइन. गाँव पूरा बोतल भीतरी तउरे ये देख के जीव ह धुकुर-धुकुर करे. फेर का करबे कुरसी के सवाल रिहिस. एक पइत कहूं कुरसी-तपस्या रंग लइस तहाँ ले पावरे-पावर हे. आगू के नेतागिरी के रद्दा इहें ले खुलथे.

बापू के पंचइतीराज अइस

गरीबदास किहिस-‘ये नेता अइस, ओ नेता गिस. येखर आदमी ये-ये चीज बांटीस त ओखर नेता पिया-खवा के हरू-गरू करिस. पूरा चुनाव म पइसा नाचिस, पइसा नचविस तब जाके गाँव म पंचइतीराज अइस. महीना भर तरह-तरह के पारटी चलिस. अढइ-तीन हजार के आबादी वाले गाँव कुकरा-कुकरी बिन सुन्ना होगे. बोकरा-बोकरी नंदागे तब जनइस के गाँव म बापू के पंचइतीराज आगे. विकास सकपकागे. कांजी हाउस म लुकागे. जेहा छेल्ला जानवर मन के बिसराम-गृह आय.

शेखचिल्ली काबर पाछू राहय? वुहू किहिस-‘का बताबे भइया पंचइतीराज बर खूब माथा घिसई होइस दारू के लाहरा म लोग दिन-रात नहइंन. तन-बदन ले दारू छ्लकिस. दारू फ्री, मुरगा फ्री, अउ....सब फ्री, सज्जन किसम के मनखे घलो दारू म डूबकिन. छम..छम ..पायल घलो बाजिस. बोतल के छत्र-छाया म वोटर टोटल मजा म रिहिन. रोज कखरो न कखरो चुनाव-भोज चले. भिखारीदास मन खूब खुश रिहिंन तब जाके गाँव म पंचइतीराज अइस

खबरीलाल किहिस-‘पूरा गाँव म बोतल के पाहरा राहय. कोतवाल चैन से सुतें. पुलुस मन सूंघीयावत-सूंघीयावत गाँव आवत जांय. सब के बाहरी आमदनी वाले रोजी-रोटी लगे राहय. पियो अउ जियो चले. कतको झन किहिन दारू म दुनिया के सार हे. ओखर बिन हर उपलब्धि बेकार हे. पंचइतीराज धीरे–धीरे खसलत-खसलत अइस. भाई-भाई के बीच महाभारत होइस. महाभारत के हर पात्र के रोल गाँव-गाँव म दिखिस. कुरसी के माया हर जगा छाय हे. ‘कुरसी महाठगिनी हम जानी’अइसने नइ कहे गे हे.

सरकार भरोसा रोना-गाना

’लालबुझक्कड़-किहिस पंचइतीराज आगे. चुनई के बाद गाँव के खूब तरक्की होय के सपना दिखत हे. हर सपना अनमोल हे. हर घर म एक-दु नेता हें. उन ठलहा हें. दुनिया के खबर रखथें. पंच-सरपंचजी मन इन ल राम-राम कहिथें. इन आधा पढ़े-लिखे हें. पंचायत म भ्रष्टाचार के राज जानथें. ठेलहा हें इनकर इही रोजगार आय.गाँव म का होवत हे, का नइ होवत हे, का होना चाही, का नइ होना चाही एखर ये मन ज्ञाता होथें. कोन अधिकारी करमचारी आवत हे, कोन जावत हे एखर खबर इन ल होथे. ठलहा मन के हर गाँव म समानांतर पंचइत होथे. इन मनरेगा के जानकारी रखथें. अब नवा जमाना हे, रोना-हाँसना,विकास करना सब अब सरकार के भरोसा हे.

सेवा-फल

सरपंचजी, पंचजी मन बड़े-बड़े नेता मन के कान काटे बर जानथें. कुछु-कुछु निर्माण कार्य होत रहिथे जेमा सरपंचजी मन के निजी आचार संहिता के अनुसार सम्मान राशि जेला कइ झन जागरूक मन रिश्वत कथें मिलत रहिथें. पंचजी, सरपंचजी मन के मार्गदर्शन म गाँव के खूब अइसना विकास होथे. पंचइत के आमदनी अउ उनकर आमदनी संगे संग चलत रहिथे. गाँव म स्कूल नेतागिरी के सब ले बड़े अखाड़ा होथे. गुरूजी सरपंच उपर अउ सरपंच गुरूजी उपर बरोबर नजर रखथें. बड़े पंचइत के बड़े आमदनी हे. बड़े बुता हे. छोटे पंचइत सरकार भरोसा हे. जनसहयोग बीते दिन के बात होगे हे.

नेतागिरी म तरक्की

खबरीलाल किहिस-पंचइती राज के सीढिया चढ़त-चढ़त कतको नेता मन के उद्धार होगे. सेवा के संग म मेवा जुड़े हे. उन सेवा कम करत हें. मेवा जादा खावत हें. शहर म पार्षद होथें. पार्षद ले महापौर, फेर विधायक, मंडल अध्यक्ष(सहित तरह तरह के पद) पावत तरक्की पाथें. विधायक, मंत्रीजी, सांसद बनथें, फेर एमा केन्द्रीय मंत्री पद म परमोशन के जादा मउका हे. दल म बल हे. जेला जनता गद्दी म बइठारथे तिही सबल होथे. पंचइतीराज अपन गोड़ म खड़े नइ हो पाय हें. सरकार के गोड़ म खड़े होथे.सरकार ओखर अंगरी ल धर के रेंगाथे तब रेंगथे.नहिं त कोनो तीर पालथी मार के बइठ जथे. गांधीजी के अइसना पंचइतीराज थोरे रिहिस हे. नान-नान बुता बर, सरकार के मुहूँ ताके बर परथे. साहेब-सुहबा मन के हुशियारी खूब चलथे, इहों आके देख लेव.

पेड़ के उपर पंचइती

गरीबदास किहिस- पेड़ के उपर कागाश्री-पंचइती चलत रिहिस. कागा (कऊँआ)मन के कांव-कांव सुंदर वाक् आउट के बोध करइस. कतको कागाश्री मन फेर उड़ें, फेर बइठे. फेर कॉव-काँव करें. कतको गुस्साय कागाश्री मन बीट घलो कर देंय. उंकर आवाज से लगे के ये भारतीय कागाश्री मन घलो लोकतंत्री शासन प्रणाली वाले आंय. सफेद पनियर द्रव(बीट) समे समे म पेड़ के तरी म गिरे. गांधीजी के पंचइतीराज के चुनाव विधानसभा, लोकसभा के चुनइ कस होगे हे. मोटर-गाड़ीके खूब रेम लगे रहिथे. ये आवत हे,वो जावत हे. आवत-जावत म खट ले चुनाव निपट जथे.

(लेखक वरिष्ठ रचनाकार और ये उनके निजी विचार हैं.)
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