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छत्तीसगढ़ी व्यंग्य - ऑनलाइन शिक्षा के ऑफलाइन विद्यार्थी

"आनलाइन शिक्षा पियासा के पानी बन के परगट होय हे. शेष मन आंकड़ा दउड़ म शामिल हें"

सरकार ‘पढ़ई तुहँर दुआर’कार्यक्रम चलावत हे. ये कार्यक्रम अखबार म जादा रेंगत, दउड़त हे. हाल बेहाल हे. आनलाइन पढ़ई बर न पालक जागे हें न बालक.कुलुप अंधियार हे. कतको शिक्षा–परेमी, गुरूजी अउ पालक आनलाइन शिक्षा ल आफलाइन नइ होवन दे हें. आनलाइन शिक्षा पियासा के पानी बन के परगट होय हे. शेष मन आंकड़ा दउड़ म शामिल हें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 5:25 PM IST
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आनलाइन वाले जुग म शिक्षा घलो आनलाइन हे. जेन आनलाइन नइ हें तेंन आउट लाइन समझो, फाउल लाइन समझो. आफलाइन के परंपरा घलो चलत हे. जिहां बिजली अउ नेट हे तिहां आनलाइन ओके हे. जिहां बिजली हे त नेट नइ हे. जिहां दुनों हे तिहां विद्यार्थी नइ हे या कमती हें. आनलाइन नवा जुग के देन हे. खबरीलाल पीपर तरी बइठे-बइठे आनलाइन’ चिंतन करत हे. लइका ‘न घर के रिहिन न घाट के’ हाय!HAAY हाय! ये सब कोरोना स्वाहा कर दिस. दाई–ददा से लइका असकटागे हे. लइका से दाई–ददा असकटाय-असकटाय हवें. मनोविज्ञान घलो टकटकी लगा के देखत हे. लालबुझक्कड़ कुछ गुनत-गुनत स्कूल डाहर ले चंवरा म आगे. राजगद्दी म बइठे कस मचोली म बइठगे. ‘आनलाइन’ विषय जान के जन-चिंतन म शामिल होगे. गोबरदास अउ गरीबदास घलो आ बइठिस. चहा-पानी पी के उनकर आनलाइन चिंतन के अखाड़ा जमगे.

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न पालक जागे हें, न बालक, कुलुप अंधियार हे
खबरीलाल किहिस-‘आज के जुग गियान-विज्ञान के जुग आय. कोरोना के आय ले स्कूल सांय-सांय करत हे. स्कूल म सन्नाटा पेलत हे. ‘सरकार पढ़ई तुहँर दुआर’ कार्यक्रम चलावत हे. ये कार्यक्रम अखबार म जादा रेंगत, दउड़त हे. हाल बे-हाल हे. आनलाइन पढ़ई बर न पालक जागे हें न बालक. कुलुप अंधियार हे. कतको शिक्षा–परेमी, गुरूजी अउ पालक आनलाइन शिक्षा ल आफलाइन नइ होवन दे हें. आनलाइन शिक्षा पियासा के पानी बन के परगट होय हे. शेष मन आंकड़ा दउड़ म शामिल हें. आंकडा के खेल जारी हे.
मुख्यमंत्री के पाटन म अंजोरे-अंजोरे हे
लालबुझक्कड़ किहिस- ‘कतको लइका काम करे बर चल देथें. कतको ल आनलाइन शिक्षण म एकोकनी रुचि नइ हे. कोनो-कोनो ल छोड़ के दाई-ददा मन ल घलो एखर परवाह नइ हे. कतको स्कूल म गुरूजी मन भिड़े हें .घर-घर अलख जगे हें तेखर सेती कार्यक्रम चलत हे. कई जगा अक्का दुक्का, कई जगा आधा अधूरा कक्षा लगे के आवाज सुनावत हे. गरीबदास किहिस-‘मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के चुनाव क्षेत्र पाटन के पचास-साठ स्कूल म जोरदरहा आनलाइन एजूकेशन के खबर हे’. खबरीलाल किहिस-‘राज्य म कोनो-कोनो जगा कुलुप अंधियार हे. त कोनो जगा गियान के बुग-बाग़, कोनो जगा टिमिर-टिमिर दीया बरे कस हे. राजधानी रायपुर म ‘सरकार पढ़ई तुहँर दुआर’कार्यक्रम सरक-सरक के चलत हे. घर म खुसरे-खुसरे लइका मन रेंधियावत हें’. सियान मन घलो कोरोना-नियम के बंधन म बंधाय हें.

मोबाइल जागरण हे
गोबरदास किहिस-‘छत्तीसगढ़ म सोर के जोर जादा हे. चांटी बरोबर सफलता ल हाथी बरोबर बताथें. छोटे-छोटे लइका मन के हाथ म मोबाइल हे. बड़े संख्या म लइका मन ल आनलाइन एजुकेशन म कोनो दिलचस्पी नई हे. कतको लइका मन तिर मोबाइल नइ हे, उन दूसर उपर आश्रित हें. जेखर तीर खुद के मोबाइल हे तेंन कतको झन मन पढ़ई के कार्यक्रम ल छोड़ के दिगर कार्यक्रम म रुचि जादा लेवत हें. इहाँ मोबाइल जागरण हे’’. गोबरदास किहिस-‘मोबाइल के जादू चलगे हे. लइका मन कटकटा के मोबाइल ल धरे हें. खटाखट मोबाइल चलावत हें. न कखरो गुनना हे, न सुनना हे. घर के सुंदर द्दश्य हे बबा मोबाइल धरे हे, ददा, दाई मोबाइल धरे हे, डोकरी दाई घलो मोबाइल ट्राई करत हे, घर के सबे झन तिर मोबाइल हे, अइसनो घलो सुघ्घर घर दुआर हे’. सब अपन अपन ढंग ले बिजी हें. मोबाइल चरित्र निरमान करत हे. गियान-विज्ञान के दुआर मोबाइल खोलत हें. आनलाइन पढ़ई के मजा हे कहाँ? अइसे सोच घलो हे. सोसल मीडिया के चमत्कार छोटे-बड़े सब ल बांधे हे.

आनलाईन पढ़ई पेल-ढकेल
खबरीलाल किहिस-‘जेखर दाई-ददा ,बड़े भाई ,बहिनी मन पढ़ई म रुचि लेवत हें ओ घर के लइका मन आनलाइन पढ़ई म जादा धियान देवत हें. आनलाईन पढ़ई पेल ढकेल चलाना सरकार के मजबूरी हे. अइसे लागत हे के सरकार कोरोना-काल म स्कूल खोले के रिस्क नइ लेना चाहत हे. लालबुझक्कड़ किहिस-‘कोरोनाकाल म 26 जनवरी 2021 तक छत्तीसगढ़ म स्कूल कालेज बंद रही. आघू स्कूल खुलही के नइ खुलही ओला समय बताही. सरकार कोरोना महामारी के बिपदा ले बड़े-बड़े मोर्चा म लड़त हे. ये शिक्षा-सत्र जनरल प्रमोशन डाहर फेर बढ़त हे’.

चिड़चिड़ाहट बाढ़गे
खबरीलाल किहिस-‘दसवीं अउ बारहवीं के लइका मन ल मिलाके सबे पढ़इया लइका मन सरकार भरोसा हें. कालेज के हाल घलो सहँराय के लइक नइ हे. कालेज मन म आनलाइन पढ़इ म आधा ले कमती विद्यार्थी मन लाभ उठा पावत हें. शिक्षा बर खुद के रुचि ले बिना विद्या हासिल नइ होय फेर चाहे कोनो पढ़ाय-लिखाय. आनलाइन पढ़ई होय चाहे आफलाइन. आनलाइन पढ़ई म सांत्वना सुख जादा दिखत हे. गोबरदास किहिस-‘अभी आनलाइन एजूकेशन बर छत्तीसगढ़ म पूरा-पूरा माहौल नइ बन पाय हे. गाँव-गाँव के अपन-अपन समस्या हे. नान-नान लइका मन के परेशानी जादा हे. घर म घुसरे–घुसरे लइका-सियान जवान सबके चिड़चिड़ाहट बाढ़गे हे’.

आफलाइन बड़े बाधा
गरीबदास किहिस-‘नौवीं अउ बारहवीं के विद्यार्थी मन ल हर महीना स्कूल ले गृह-कार्य दे जथे ओखर जाँच होथे अउ वुही आधार म विद्यार्थी ल अंक दे जही. बोर्ड परीक्षा के कोर्स सिकोड़ दे गे हे. बाकी कक्षा के आँन लाइन पढ़ई के दौरान लइका मन ल प्रश्न दे के ओखर उत्तर के जांच करे जथे. खबरीलाल किहिस-‘आनलाइन’ पढ़ई के अखबारी खबर जादा हे. आनलाइन पढ़इ करे के कोशिश म आफ लाईन बाधा जादा हे. शुरूआती दउर म लइका मन के एमा रुचि रिहिस अब ओ रुचि घटगे हे’.
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