छत्‍तीसगढ़ी विशेष: पिचकाट के सेती ताए कई घाँव अलकर लागथे ते हा

अकुसल मजदूर ला कुसलता पाए बर लगन जरूरी हे. जेन कोती तोर मन लागथे बने रम जा अउ खुशी खुशी कमावत रा.

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उ का चाही कांही खंगे हे ते बता डार, अइसे कहिके घलो कखरो मन ला मढ़ाना पर जथे. सुनती बात ए कई पईत कखरो जोखा मड़ई हा कोनो कोनो ला भावय नहीं. उही उही करा घेरी पईत करई, धरई होथे तेनो जियाने ला धर लेथे, एकरे सेती सबो कोती चेत लगाके कमावय धरय तेन बने होथे. कोनो कोती चलदे एक्के बात चलही मोला पिचकाट करई थोरको नइ भावय.

चलत फिरत घलो चार पइसा बनाए जा सकत हे
आजे के दिन के बात ए अइसे कहत कहत पाछू दिन के सुरता घलो आए ला धर लेथे. बिना पूंजी पसरा के घलो चार पईसा बनाने वाला के कमी नइये. कोनो कांही बुता तियार के चल दिस के दे करा के समान ला दो करा जमा के राख देबे. अब तोर जिम्मेदारी हे के तें वो बुता ला करे मा कतका सुघराई लावत कर सकत हस. फल फलहरी के दुकान वाला मन घलो परछो ले हे बर बुता तियार के तपासत रइथें जेन पास होगे तेन बइठे ठाल्हे अपन दिनभर के कमई निकाल सकत हे. चरदिनिया खटाने वाला के कोनो मेरन मान नइ होवय. बने मन लगाके लगे रहिबे तभे तोर तारीफ होही अउ तोला सुखियार बरोबर रेहे के सुख मिलही. करबे तभे पाबे नइते पाछू पछताबे.



आंसो भर लगन लगाके अपन बुता ला कमा अउ देख
चाहे कुछु होजय मोला अपन आप ला सिद्ध करना परही के में कइसनो करके अपन बर मिहनत मजूरी करके रइहंव. होत बिहिनिया तियारी करले जान पहिचान बनाडार. जान पहिचान घलो कई पईत बने काम आथे. घाम पियास के कमई ला कहिबे अउ छइहां मा बईठ के रहिके कमई ला कहिबे दुनो मा भारी फरक हे. आज कमिया मन के भारी कमी हो गेहे. जानकार कमिया ला अपने अपन रोजगार खोजत आ जाथे. ओला रोजी पानी के चिंता नइ रहय. अनजान आदमी घलो कोनो काम मा अनुभो ले डरे हें तेनो काम पा जथे. एकठन शब्द हे अकुसल मजदूर. अकुसल मजदूर ला कुसलता पाए बर लगन जरूरी हे. जेन कोती तोर मन लागथे बने रम जा अउ खुशी खुशी कमावत रा. देखत करत कतको अनपढ़ घलो सबल होके चार झन ला रोजी रोजगार देहे के दम राखथे. हाथ मा चार पइसा आथे तहां मन हा आन हो जथे. अपन मन ला मनाना बहुत जरूरी हे काबर के बचत करके जेन आगू बढ़गे तेन आज मालिक बन गेहे. बचत करत करत मालिक असन जिनगी सबो झन ला जीना चाही.

करने वाला का कर नइ सकय तेला जान
भाजी पाला, कांदा कुसा, साग पान बोने वाला घलो रात मा सुख पूर्वक नींद भर सोथे. जागते साथ ओला कामेच सुहाथे. खाए पिये के चिंता नइ राहय. गांव मा बेरा कुबेरा मुखारी चाबत कतको झन ला देखे जा सकत हे. एला कहिथें कमईला. मुंधरहा से कमाई करत बेरा चढ़ित तहां चार पईसा के कमई करइया के चेहरा मा कतका खुशी नाचत रइथे एला देखे जाना चाही. घर ले दुरिहा जाके अपन जेवन पानी के अउ लोग लईका के खाई खजानी के सुरता ओला बियापय नहीं. काबर के ओला पता हे जेन ए दुनिया भेजे हे तेन सबो किसम के बेवस्था ला पहिली ला पहिली ले कर के राखे हे. बस हमनला पुरखउती पईत के सुरता ला राखे ला परही. कइसे करके सबो धरम करम मन अपन अपन जगा मा आजो मान पावत हें. तोर बिना मोर काम नइ चलय अउ मोर बिना तोर काम नइ चलय.

एकसरूवा मनखे घलो मगन होथे अउ कमाथे
बनाने वाला भगवान कइसे करके अपन बेवस्था ला सम्हालत होही. अकेल्ला हे फेर सबो डहर ओखर नजर हावय. फरक नइ खावय. अपन समे मा सबो करम होवत जावत हे अउ हिसाब घलो होवत जावत हे. थोरकुन सोंच के देखबे ते तोला सबो समझ मा आएला धर लिही. सिखना अउ सिखोना बस अतकेच हा सार हे. सदा दिन ले चलत आवत हे कहिके कतको झन भागेच के भरोसा मा बइठे रहिगें. आज अउ अभी कहते कहत दुनिया कहां ले कहां निकलगे. तभे तो केहे गेहे के एकसरुवा मनखे घलो अपन बुद्धि बल अउ अनुभो ला लेके समाज सेवा कर सकत हे. उठ के रेंगे ला पिचकाट नइ केहे जाए. फेर उठ अउ फेर रेंग. रेंगत रेंगत एक दिन दउड़े के मौका मिलहिच. जेन दउड़े बर जान डारिस तेन थाम्हे के ताकत घलो राखथे. धरा रपटा झन होवय बस काबर के हमर पाछू कतको झन के जीवन संघर्ष घलो हमन ला शिक्षित करे बर अपन उपस्थिति ला अचंभित करथे.