छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: चिभिक लगाके बुता करथे ते बने फभिन लागथे

घर के भितरी ले लेके दुनिया संसार के  सुन्दरता ला सबो निहारत हावन. सुन्दरता मन के घलो होथे अउ दुनियादारी मा घलो सुन्दरता रइथे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 7, 2021, 12:09 PM IST
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बो के सेती ईश्वर हा जगा निर्धारित कर दे हावय. अपन अपन जगा मा अपन सक के चलत हे बुता करनच परही, नइते हमन पछुवा जाबो. मानुस योनी कतका सबल होथे तेला सबो जुग मा देखे गेहे. सतयुग, त्रेता, द्वापर अउ कलयुग मा घलो देखे जा सकत हे. अभी घलो हमन थोकिन धियान धरके अपन मानुस होए के प्रमाण देहे सकत हावन.

धरती मा कोनो कोन्हा मा रहिले अउ देखले

घर के भितरी ले लेके दुनिया संसार के  सुन्दरता ला सबो निहारत हावन. सुन्दरता मन के घलो होथे अउ दुनियादारी मा घलो सुन्दरता रइथे. खोजत खोजत हवा,पानी अउ भुइंया मा कतको रमणीक जगा ला हमन जागत जियत देखे पाथन. ग्रह नक्षत्र के अपन अलग अलग जगा मा रहना बने संदेश देहे के काम करथे. सबके अपन गति हे अउ अपन रद्दा हे. ऋषि मुनि तइहा के सबो बात ला प्रमाणिक ठंग ले बताए हावंय. आजकाल उही ला अधार मानके बिज्ञान अपन काम ला बने सुघ्घर ढंग ले करत हावय. विनासकारी खोज घलो होवत हे फेर ओखर उपयोग बने ढंग ले होना चाही. जानसुन के अलहन ला नेवता झन देवय नइते समूल धरती विनास के लीला मा समा जाही अउ गर्त मा चल दिही.

का भईस अइसे कहइया घलो हावंय
टरकाए असन कोनो बात करिस ततके मा जानले ए दुनिया मा टरकइया घलो जनम धर डरे हें. पहली सबो अपन समय मा निर्धारित राहय. हाथ गोड़ के चलते ले आदमी खटावय. बीमारी, दुःखी सबो आवय जावय अउ वोखर इलाज घलो होवय. मन के मिलवना घलो एक ठन बने बुता होगे हे.  बईठे ठाल्हे लढ़ारत रा अउ अपन जीवन ला चलावत रा फेर के दिन ले. सब दिन बरोबर नइ होवय एकरे सेती आने वाला समय ला घलो बने राहय कहिके बचत करे के नियाव होए हावय तेन चलत आवत हे. रुपया मा चार आना ला सकेलत रा एक दिन उही हा तोर रुपिया बन के तोला सुख दिही. चलना एको दिन नइ कमाए ते का भईस ओ दिन ला सुरता मा राख अउ कांही उपरहा करे के सोंच बनावत चल. सबो बुता तो लगे हे तभो ले आने आने समाजिक अउ धार्मिक नियाव घलो होवत राहय इही बहाना परयावरण के सुरक्षा कोती घलो धियान जावत रिही. अपन तीर तार के घलो चिंता हमिच ला करना हे.

कोनो जगा होतिस ते देखा देते जिहा बुता नइये

जनम धरे तबले रेंगनच हे. फेर रेंगे मा फरक घलो हावय.कतको बछर सहारा मा चलथे.  लागिर होगे ते जिनगी भर सहारा चाही. लागिर मनखे ला घलो भगवान अक्कल देहे रइथे ओहू बपुरा बपुरी मन का करंय अपन सकत भर ले सकथें. आज देखले जमाना कतका बदल गेहे अब कोनो ला बपुरा बपुरी केहे के जरूरत नइ परय. हिसाबी होगे हांवय सबो झन कुछु न कुछु करत,धरत मिल जाही. सुन्दरता मन ला ताकत देथे अउ मने मन मा कल्पना साकार होएला धर लेथे फेर झन पूछ शरीर के सुन्दरता धरे रहि जाथे. गोठियावत,बतावत घलो चार पईसा के मुनाफा कमाए जा सकत हे. चारो मुड़ा अपन रुचि के हिसाब ले अपन काम बुता के तियारी होते रहना चाही. तियारी करना असली बुता हरय. का करना हे तेने हा तियारी के फल आवय. अपने अपन रुचि होना सबो किसम के बुता ला चिभिक लगाके देखना, समझना अउ अपन निर्णय लेके बुता मा लग जाना आज सबले जरूरी हे. त चलव तियारी मा लग जव.



घर जिनगी करत करत चलते चल

उम्मर के चढ़ती मा घर परिवार के,सियान सियानी करत करत शिक्षा घलो देवत जावत रइथें. अपन संग मा संघार के सिरजनहार के सेवा करतेन अइसे सिखोना देवत रइथें. तोला जेन बुता चाही पहली ओखर सोच मन मा पैदा होना जरूरी हे. निरणय करले फेर देख जिहां जाना हे तिहां तोला कोन लेग ही. लगन,लगन एक अईस रद्दा देखाथे जेखर कल्पना नइ राहय. समय बीतत जाथे अउ सुख के रद्दा चिन्हारी करइया तोर आगू आगू रेंगत रइथे.चिभिक लगाके काहीं बुता होवय करते रहना चाही. नानकुन सुजी अउ बड़े जान जिहाज ला देख के जान डार के चिभिक लगाए मा का से का नइ हो सकय.  सबो जनम मा अपन बुता घलो बोलत चालत देखे जाही. (यह लेखक के निजी विचार हैं)

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