छत्‍तीसगढ़ में पढ़ें: गांव मं रोजगार नही, किसान करय तो करय का?

छत्‍तीसगढ़ में पढ़ें: गांव मं रोजगार नही, किसान करय तो करय का?
छत्तीसगढ़ के गावों में परेशान किसानों की फोटो बनेगी टैक्स होगा - किसान करय तो करय का.

किसान मन के तकदीर म अइसन सुख कहां, बने - बने हे तब सब बने हे अउ कहूं. अकाल झांक दीस तब ओकर सब कुछ चउपट हो जथै. दूसर कइसनो करके किसान अनाज उपजारथै तब ओमन ला ओकर लागत मूल्य नइ मिलय.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 11, 2020, 7:14 PM IST
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किसान के नांव सुनते साठ जीव हा धक ले करथे. कोन जनी का करम करे रहिथें के किसनहा परिवार मं ओकर मन के जनम होथे? दाई मन कुलकथे, मोर अंगना मं नांगर – जोत्‍ता बेटा के जनम होगे अउ ददा हा माथा धरके रोथे अउ मने-मन कहिथे हत रे कहां के करमछड़हा बेटा, रगड़ाबे जोताबे बइला सही रे जइसे मैं जोतावत हौं. ना तन के सुख, ना मन के, ना धन के. कोनो नेता, मंतरी, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, अउ सेठ-साहूकार, उद्योगपति मन घर जनम ले रहिते त सोन-चांदी के थारी म खाते-पीते अचोते? कहां किसान के घर जनम ले हस, चल बेटा तोर करम किस्मत मं इही लिखाय हे, बदे हे तौंन ला कोनो टार नइ सकय?

काबर किसान अइसे सोचथे के किसनहा के घर मं जनम लेना पाप हे? ओकर अइसन सोचना कहां तक सही हे, का करन हे ओमन अइसे सोचे बर मजबूर हे? किसान ला तो अन्नदाता कहिथे, किसान हे तब जहान हे, ओ नइहे तं सबके मरे बिहान हे. बात तो सोलह आना सही हे के ये संसार में किसान नइ रइही तब अनाज कोन उपजाही, सबके पेट ला कोन पालही? एक तरह ले किसान मन तो पालनहार हे, भगवान हे. फेर काबर अइसन सोचथे ओमन तेकरो तो कुछु कारन होही?

कारन जबर हे, ओ कारन हे राजनीति. ये देश के राजनीति सबो कोती धियान तो दिस फेर खेती-किसानी कोती शुरू ले धियान नइ दीन ओकर परिनाम आज सबके आंगू म हे. उद्योग-धंधा, राजनीति, शिक्षा, कला साहित्य संस्कृति सबके विकास बर सरकार योजना बनइस फरे खेती किसानी कोती अतेक धियान नइ दिस जतेक देना रिहिसे. खेती किसानी के छोड़े सब कोती के मन लाबालब हे, फुदरत रहिथे चिरइ र्, हिरन मन बरोबर फेर किसान मन ला देख तो ओकर मन के चेहरा अइसे ओरमे अउ लटके असन रहिथे जना-मना कब के लांघन भूखन हे?



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महात्मा गांधी हा खेती किसानी के दुरदसा उपर ‘ग्रामीण अर्थशास्त्र‘ नामक पुस्तक मं लिखे हे के भारतीय किसान करजा मं जनम लेथे, करजा मं पलथे अउ करजा मं अपन परान घला तियाग देथे. ओकर केहे के मतलब किसान मनके ये धरती म जनम लेना अबिरथा हे, अभिषाप हे. अपन जिंदगी म ओ सुख के कोनो पल नइ देख पावय? करजा के बोझ म दबके हजारों किसान खुदकुशी कर लेथे. सरकार अंधरा हे इही के हे जाय. कोनो समय म इहि देश कृशि परधान देश रिहिसे सबके पालन पोसन रोजगार जीवन इही खेती किसानी के परसादे चलय, आज इही खेती किसानी के राड़ बेचावथे. साल दर साल अकाल अनाज के वाजिब दान नइ मिलय, लांगत बढ़गे. किसान खेती किसानी करय तब कइसे करय. मरे के छोड़े कोनो रददा नइ दीखय अउ सरकार मन के का कहना, ओकर मन के दूने अंगुरी मं-घी हे, गुलछर्रा उड़ाय म मस्त रहिथे.

अभी मोर हाथ म एक ठन अखबार हे तेमा एन सी आर बी के रिपोर्ट छपे हे ओमा महाराष्ट्र, कर्नाटक अउ आंध्रप्रदेश समेत पूरा देश के किसान मन के बदहाली के जिकर करत बताय हे के सन 2019 मं दस हजार दो सौ इक्यासी किसान मन आर्थिक तंगी के चलते आत्म-हत्या कर लेहे. खबर ला पढे तब मोर माथा ठनकगे. किसान के बेटा हौं किसान परिवार म जनम लेहौं अउ किसानी के मरम जानथौं. बहुत माथा रगड़े ले परथे, माटी संग माटी मिले बर परथे तब कहूं अन्न परमेष्वरी के दरशन होथे. एक महतारी बता सकत हे एक संतान के जनम देबब मं ओला कोन कोन पीरा-दरद ले गुजरे ले परथे. ओला मतंरी, नेता, उद्योगपति, बयापरी अउ साहेब मन का जानही, ओमन तो कुरसी टोरथे अउ महीना बीते पइस ते बिहान भर थूक चाटत रोकड़ा ला जेबिया लेथे.

किसान मन के तकदीर म अइसन सुख कहां, बने - बने हे तब सब बने हे अउ कहूं अकाल झांक दीस तब ओकर सब कुछ चउपट हो जथे. दूसर कइसनो करके किसान अनाज उपजारथे तब ओमन ला ओकर लागत मूल्य नइ मिलय. मजाक उड़ाथे सरकार हा. इही पाके किसान निराश हे अउ खेती किसानी करे ले छोड़ के शहर कोती पलायन करथे रोजी-रोटी के तलाश मं. हजारों किसान जमीन बेचदीन अउ मजदूर बनके देश के कोना-कोना म बगरगे  हे. एसो कोरोना जब ये देश म झपाइस तब इही मजदूर मन बतरकि? असन जिहां जिहां रिहिन हे भरे गरमी म लांघन भूखन भागत अपन अपन परदेश अउ गांव अइस.

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एती कुंआ ओती खाइ र्, जाय तो जाय कहां? गांव मं रोजगार नही. करय तो करय का? इही किसान के भाग हे, तकदीर हे! का सुख हे किसान के घर जनम लेये मं? एक किसान ले बने तो वो पान ठेला वाले अउ चाय दुकान वाले मन हे. इही चाय के दुकान के परसादे म नरेन्द्र मोदी हमर देश के परधान मंतरी बनगे. बने हे आज के बखत मं कोनो मेर दुकान खोल ले, फेर जौन खेती किसानी करही तौन मूरख हें. एक ना एक दिन करजा मं बूड़े ले परही, मौत ला गला लगाय ले परही.

किसान मन के आत्महत्या करे के बारे मं कृशि विशेशज्ञ मन के कहना हे के एनसीआर बी के रिपोर्ट हा जौंन राज्य मन के बारे मं आत्महत्मा करइया किसान मन के खुलासा करे हें, ओमा जादातर किसान कर्जा मं बूढे हे खेती किसानी मं घाटा परजथे तब करजा ला समय मं नइ चुका पावय, एती वित्तीय संस्थान मन के दबाव बढ़ जाथे. एकर सेती तनाव बढ़ जथे अउ समाज मं जौंन मान-सम्मान परतिष्ठा रहिथे तेला खोय के डर म आत्महत्मा कर डरथे. रिपोर्ट म मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, तेलंगाना मं घला किसान मन के ऊपर गंभीर होके सोचे के जरूरत हे. किसान, ये देश के परान हे, सांस हे. तभे तो पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री हा जय जवान, जय किसान के नारा लगाय रिहिसे. ओ नारा ला आजो जिंदा रखे के जरूरत हे, उही मं सबके भलई हे.
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