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छत्तीसगढ़ी विशेष - भाई असन हितवा नहीं अउ भाई असन बईरी नहीं- अइसन काबर

आमदनी के बांटा होना चाही. परिवार के बांटा बने नइ होवय.
आमदनी के बांटा होना चाही. परिवार के बांटा बने नइ होवय.

बखत परही त तोर काम कोन आही तोर आगू सबले पहिली कोन खड़े होही. बांटे भाई परोसी होगे. परोसी घलोक अपन धरम ला निभाथे. पास परोस मा सब्बो झन एक दूसर के आसरा मा रइथे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 4:27 PM IST
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हाना हा कइसे बनिस होही सोचबे ते बिकराल लागथे. सब्बो जग मा अइसने होवत होही का कइथंव? चीज बस हे, रुपिया - पइसा हे. जिंहा जाबे तिहां तोर मान गउन होवथे. फेर अइसे काय होगे कि पुरखा सियान मन कहि दिन भाई असन हितवा नहीं, भाई असन बईरी नहीं. अउ इही हाना आज ले चलतेच हे. आजकल के समय ला देख दुनिया कतेक बदलगे.

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परिवार सांझर मिंझर अलथे तभे बने लागथे
एके जगा बइठे रा अउ सब्बो बुता ला तियारत रा. काम बुता करइया अपन जगा मा हे अउ बुता जोगइया अपन जगा मा हे. बुता करे अउ तरक्की करे आमदनी होइस बार बिराज के चले एला कइथे जिनगी. आमदनी के बांटा होना चाही. परिवार के बांटा बने नइ होवय.
बिचार नइ मिलिस ते चार दिन झन गोठिया फेर मिल जा, भैंसा बैर बने नोहय. सियानमन अउ कतकोन बात केहे हे. देश, काल, परिस्थिति के मांग अलग अलग जनाथे. इही सोच ला बगरावत अउ जतका बात गियानिक मन बताए हें तेला गुनव. कोनो परिवार के उदाहरण देके अपन परिवार ला छोटे समझे के समय बीत गे. खेती किसानी के संगे संग कल कारखाना मा घलोक आमदनी कमइया कमावत हें. संघरे रहू त ताकत बनही अउ ताकत वाला के पूरा समाज मा अलग स्थान होथे.



सुर लमाए रेहे मा काम नइ बनय सबो जगा उजियारी हे तेला जानव
दुनिया मा अइसे मया बगरावव के अपने अपन मा जेन माते हें तेन चेत जावंय. देह ले थोरको लहु बोहाथे त देखइया मन के हिरदे टघल जाथे. सब्बो कोती ले देखइया मनखे चिंता मा पर जथें के अइसे का होगे हमर समाज ला. कतका पाप बोहावत हावय धरती माता ला. माता ला माता असन माने के अक्कल हावय फेर कोन मति ला फेर देथे. सब्बो किसम के जिवका के साधन हम मन ला अगुवा के मिले हे. हम मन ला मिहनत करे के देरी हे झट कुन जान डार अउ परिवर्तन के सार ला जान के आनंद के लगन पैदा कर .

सब्बो किसम के नता गोता मा पूरा समाज गंथाए हे. देखते साथ अपन नता के सुरता आ जथे अउ ओखरे हिसाब से व्यवहार शुरू हो जथे. गुड़ के भेला ला देख घुर जथे तभो ले अपन सुवाद ला नइ छोड़य. अइसने मीठ मीठ गुरतुर बोली घोरे के हम मन ला प्रयास करना चाही अपन भाई बन्ध मा देख. बखत परही त तोर काम कोन आही तोर आगू सबले पहिली कोन खड़े होही. बांटे भाई परोसी होगे. परोसी घलोक अपन धरम ला निभाथे. पास परोस मा सब्बो झन एक दूसर के आसरा मा रइथे. जिये खाए के सेती जिनगी नइ मिले हे. अपन आए के अर्थ ला जानो अउ अपन आप ला पहिचानो. भाई, भाई हरय चाहे कखरो राहय. लहू अपन डहर दउड़थे ठीक बात हे फेर दोस्ती घलोक अपन रेहे के कारन ला बताथे. अतकबड़ संसार आज अइसे लागथे के जइसे एके परिवार हरय. परिवार मान के रक्षा करे के जिम्मेदारी सब्बो के हे. तोड़ फोड़ करके जब जोड़ नइ सकन त काबर अइसनहा बुता करके बदनाम होथन. सोंच मा हमेशा दूसर बर भलाई राहय. दूसर ला देख के कभू मन मा ईर्ष्या झन पैदा होवय. सब्बो जगा सुख समृद्धि राहय.

अपन जिनगी भर जिये फेर खाली हाथ काबर इही हरय एक शिक्षा
जीवन चक्र पूरा होवय त अइसे होवय के आने वाला पीढ़ी ला प्रेरणा मिलय. सकल किसम के बुता हावय संसार मा. अपन अपन शक्ति के हिसाब से सब्बो झन लग जावव. शक्ति संग भक्ति जुड़े हे. कतको झन भक्ति के काम मा लगे हें. संसारिक नियम धरम अउ सदाचार ला अपनावव. सदाचार रिही तभे ये दुनिया चलही. मीत मितानी करय सियानी, महापरसादी के बाढ़य चलन, आवव जुर मिल के अपन अपन जिवका साधन करन. जीव त जीव हरय एही पायके मानुस तन ला सबले अच्छा केहे गेहे. अच्छा होय के प्रमान हमर मेल मिलाप मा राहय. ( लेखक साहित्यकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)
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