छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: छत्तीसगढ़ी फिलिम के वैश्विकरन, होगे डिजिटल सिनेमा के सुरूआत

छत्तीसगढ़ी सिनेमा के बदलते रंग.

छत्तीसगढ़ी सिनेमा के बदलते रंग.

छत्तीसगढ़ के सो-मैन कहे जाने वाला सतीश जैन के फिलिम मन के महत्ता हे के ओखर एक्को फिलिम अइसे नइ हे जउन ल हिने जा सके, टूरा रिक्शावाला, मया, हंस झन पगली फंस जाबे ये फिलिम मन तो जइसे छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पहिचान ही बनगे हें.

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फिलिम सुरू ले ही समाज के दरपन रहे हे. समाज म व्याप्त रीति-कुरिति, जस-अपजस ल गढ़के ही फिलिम के निरमान होथे. छत्तीसगढ़ के पहिली फिलिम जउन सबले पहिली छत्तीसगढ़िया मन के मुखपत्र बनिस अऊ देश-दुनिया ल हमर भाखा. परंपरा अऊ संस्कृति ले आकब कराइस, कहि देबे संदेश. ये फिलिम ल रायपुर जिला के खरोरा तिर कुर्रा-बंगोली के युवा मनुराम नायक हर 1965 म बनाए रहिस, जेमा उन प्रदेश अऊ देशभर म व्यापत उंच नीच अऊ जातिवाद के परंपरा ऊपर प्रहार करिन. ये फिलिम के कहिनी उंचा जाति के युवती अऊ नीचे जाति के युवक के प्रेम प्रसंग के तिर तार घुमरथे संग ही फिलिम म खेती अऊ प्रकृति के संग छत्तीसगढ़िया जनमानस के अस्मिता के घलो बात हे. जेला आज तक सुरता करे जाथे, ये फिलिम के बाद तुलसी चौरा. हमर घर द्वार फिलिम मन घलो प्रादेशिक माटी के महक ल देश भर म बगराइन.

छत्तीसगढ़ प्रदेश म मनोरंजन के साधन के रुप म रंगिन सिनेमा के पहिली निरमान नवा छत्तीसगढ़ राज बने के ही बछर म यानि 2000 म सतीश जैन ह करिन. मोर छइंहा भुइंया नाम ले ये फिलिम प्रदेश के जनमानस के अंतस ल टमर लिस, सिनेमाघर म लोगन के भीड़ उमड़गे, तत्कालीन छत्तीसगढ़ म राजनीति, बेरोजगारी अऊ पारिवारिक संबंध के ताना बाना बुनत ये फिलिम छत्तीसगढ़ सिनेमा के अम्मर कृति बनगे अऊ तब ले ही प्रदेश के कलाकार मन ल घलो फिलिम म काम करे के अवसर बनिस. बंबई म लंबा बेरा ले फिलिम लेखन करइया छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर के रहइया किसान परिवार के युवा सतीश जैन जब मोर छइंहा भुइंया के कहिनी गढ़िन त युवा छत्तीसगढ़ फिलिम के पर्दा म जनोमनो जीवंत होगे. तहं एक के बाद एक प्रदेश के सिनेमाकार मन घलो कईठो फिलिम बनाइन जउन जुच्छा बंबई फिलिम मन के देखासीखी साबित होइस.

एक अंतराल के बाद सतीश जैन फेर झन भुलव मां-बाप ल लेके आइन अऊ मरत सिनेमा म जीव फूंक दिन, येखर बाद ले तहां सिनेमा के स्वरुप म बदलाव अइस, ये बीच प्रेम चंद्राकर के फिलिम तोर मया के मारे, कारी समेत कई फिलिम छत्तीसगढ़िया जनमानस के भीतर मनोरंजन के जोर ल थिराए म सफल होइस. जमाना बदलिस अऊ तहां मुंबई के संग ही छत्तीसगढ़ म घलो डिजिटल सिनेमा के सुरूआत होगे, प्रकाश अवस्थी के गजब दिन भइगे फिल्म ले एचडी फार्मेट म फिल्म बने के सुरू होइस, जेमा 2008 म रिलीज होए मनोज वर्मा निर्देशित फिलिम- बैर सफल एचडी सिनेमा साबित होइस. बैर के बाद ले जमोमनो छत्तीसगढ़ सिनेमा म जबर बदलाव आइस. कम लागत म नान्हें कलाकार मन मिलके फिलिम बनाए लगिन अऊ ये तरह ले छत्तीसगढ़ के सिनेमा संसार छॉलीवुड के नाम ले देशभर म नाम कमाए लगिस.



छत्तीसगढ़ के सो-मैन कहे जाने वाला सतीश जैन के फिलिम मन के महत्ता हे के ओखर एक्को फिलिम अइसे नइ हे जउन ल हिने जा सके, टूरा रिक्शावाला, मया, हंस झन पगली फंस जाबे ये फिलिम मन तो जइसे छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पहिचान ही बनगे हें. कई युवा निर्देशक घलो ये बीच छत्तीसगढ़ी फिलिम म नवा प्रयोग करिन बछर 2012 म आए निर्देशक शैलेंद्रधर दीवान के फिलिम- तोला ले जाहूं उढ़रिया नवा जमाना के संग सबले बड़े लागत के फिलिम रहिस जेमा कॉलेज जीवन म युवा मन के भीतर मया के उफान ल सुग्घर ढंग ले गढ़े गे रहिस.
छत्तीसगढ़ म पहिली बार नाचा के जनक कहे जाने वाला दाऊ मंदराजी के जीनगी ऊपर बीयोपिक फिलिम घलो बनिस जेला प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल अपन मंत्री मंडल समेत सिनेमाघर म देखिन अऊ सराहना करिन. छत्तीसगढ़ म फिलिम के इतिहास 1965 ले आज तक स्वर्णिम हे, इहां के मीठ बोली, परंपरागत सवांगा अऊ खेत खलिहान के बीच गांव गंवई म गढ़े कहिनी लोगन ल आकर्सित करथें. नवा जमाना के संग छत्तीसगढ़ी फिलिम मन म नवा प्रयोग घलो होत हे अऊ अब त छत्तीसगढ़ के पृस्टभूमि म रास्ट्रीय स्तर म घलो फिलिम के निरमान होए लगे हे. बीते महिना रिलीज होए चमन बहार फिलिम छत्तीसगढ़ के छोटकून कस्बा लोरमी के युवक के कहिनी रहिस जेला विस्वस्तर म सराहे गिस, ये तरह ले छत्तीसगढ़ के सिनेमा सरलग प्रसिद्धि के रस्दा म आगु बाढ़त हवे.
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