छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- मुड़िया माड़िया जनजाति के संस्कार संस्कृति के केन्द्र घोटुल सुन्ना होवत हे

घोटुल शिक्षा, संस्कार अउ संस्कृति के केन्द्र आवय.

घोटुल शिक्षा, संस्कार अउ संस्कृति के केन्द्र आवय. घोटुल मा मोटियारी मन ला दोना पतरी बनाय बर सिखाय जाथे ता चेलिक मन ला शिकार करे बर सिखाय जाथे.

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देश दुनिया मा रहइया बसइया अलग अलग जनजाति के अलग अलग संस्कृति होथे. अइसने छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर मा मुड़िया अउ माड़िया जनजाति परिवार के रहना बसना होथे. जौन जंगल भीतरी गाँव मा घर बनाके गुजर बसर करथें. ए जनजाति के घलो अपन अबड़ अकन अलगेच संस्कृति हवय. जेमा एक संस्कृति हवय घोटुल. घोटुल अइसे तो एकठन घर आवय फेर एला ए जनजाति के शिक्षा संस्कृति अउ संस्कार के केन्द्र माने जाथे. इहाँ चेलिक मोटियारी मन ला अपन आगू के जिनगी जीये के रद्दा बनाय के सीख सिखाय अउ बताय जाथे.

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घोटुल संस्कृति
घोटुल गाँव के अतराब मा मिंझरे अउ गाँव ले थोकिन दुरिहा ठउर मा बने एक घर होथे जेला गाँव भर मिलके बनाय रहिथे. एहा कोनों कोनों गाँव मा माँचा बरोबर घलो होथे. जेमा चारो मुड़ा बड़े बड़े लकड़ी के खूंटा खंभा गाड़ के उपर मा काँदी, डारा पाना ला छाँय करे बर छा देथे अउ चारो मुड़ा खुल्ला घलो रहिथे. घोटुल घर हा अतका बड़ रहिथे जेमा गाँव अउ अरोस परोस गांव के सगा बरोबर अवइया चेलिक मोटियारी मन उठ बइठ सकें. संगे संग चाउर दार, बरतन, हँसिया टंगिया, दोना पतरी ला मढ़ाय के ठउर रहय. इहाँ सिरिफ कुँवारा कुँवारी चेलिक मोटियारी मन आथें जाथें. जेखर बिहाव होगे ओमन ला इहां आय बर मना करे जाथे. घोटुल के बेवस्था चलाय बर गाँव के दू तीन झन सियान रहिथे जेमा कोटवार घलो रहिथे.

घोटुल मा संझा गाँव के चेलिक मोटियारी मन सकलाथें. सबले पहिली नवा नेवरिया अवइया चेलिक मोटियारी के घोटुल मा नवा नाम धरे जाथे. घर के नाम अउ घोटुल के नाम अलग रहिथे. घोटुल के सदस्य मन ओला घोटुल के नाम ले चिनथे बोलथे. इहाँ आय अउ नाम धराय पाछू ओमन ला अपन जोड़ी बनाय के छुट मीलथे. अपन पसंग के चेलिक अउ मोटियारी ला चुनई करके कोनों बुता, जेला सियान मन सिखाथे ओला दूनो मिल के पूरा सिधोथे. इहाँ अवइया चेलिक अउ मोटियारी मन के समूह घलो बनाय जाथे. चेलिक मन के कुँवारा सियान ला सिरदास अउ मोटियारी मन के अगुवा ला बेलासा कहे जाथे. एमन अनुसासन बर नियम बनाथे अउ काम बुता के चेत करथे.चेलिक मन लकड़ी के बेवस्था करथे ता मोटियारी मन राँधे गढ़े अउ दोना पतरी के बेवस्था करथे.

घोटुल शिक्षा, संस्कार अउ संस्कृति के केन्द्र आवय. घोटुल मा मोटियारी मन ला दोना पतरी बनाय बर सिखाय जाथे ता चेलिक मन ला शिकार करे बर सिखाय जाथे. चेलिक मन ला बढ़ाई बुता, खेती किसानी के बुता सिखाय जाथे अउ मोटियारी मन ला राँधे गढ़े, घर परिवार ला सकला करे,घर दुवार लीपे पोते के सीख सिखाय जाथे. अपन घर अउ गाँव के देव धामी के पूजा पाठ, हूम धूप के सीख घलो सिखाय जाथे. देव पूजा के गीत अउ नाच घलो संघेरे मिंझारे जाथे. सामूहिक अउ सामुदायिक बुता ला चेलिक मोटियारी मन इहें आ के सिखथें. अपन आदिवासी संस्कृति ला अजर अमर बनाय बर ओखर रीत रिवाज ला उनला इहें सीखे बर मिलथे.

घोटुल मा चेलिक मोटियारी मन के गुन के परख होथे. इहाँ गाँव के देव धामी, तीज तिहार, परब ला माने के अउ नाच गाना घलो सिखाय जाथे. बाजा बजाय बर किसम किसम के साज बाज रहिथे यहू ला बनाय अउ बजाय बर सीखथें. कोन परब मा काय गाना अउ नाच होथे एखर शिक्षा इहें देय जाथे. घोटुल मा आय चेलिक मोटियारी मन ला अपन पसंग के जोड़ी संग रात बिताय के छूट घलो मिलथे. जोड़ी एक हफ्ता संग मा रहके चिनथे पहिचानथे अउ पसंग नइ आय ता दूसर जोड़ी बना लेथे. रतिहा मा जब नाच गाना चलत रहिथे ता ओमन कहू दुरिहा अलग ठउर मा जाके अपन गृहस्थी के शुरुवात करे के जोखा मढ़ा सकथे. मन पसंग आय पाछू गाँव अउ परिवार के सम्मति ले उँखर बिहाव रीति रिवाज ले कर दे जाथे. इहाँ ले सीखे चेलिक मोटियारी मन अपन सुख के जिनगी बिताथे अउ गाँव, समाज, परिवार के उन्नति गुण सीखत कतको नवा नवा उदीम करथे. संगे संग अपन संस्कृति के सुरक्षा करत आगू बढ़ाथे.

घोटुल जीहाँ जिनगी जीये के रद्दा के केन्द्र हरय वोहा अब आधुनिकता के बेरा मा बिगड़त जावत हे. नवा चेलिक मन अपन संस्कृति छोड़त अउ आधुनिक संस्कृति मा मिंझरत जावत हे. शिक्षित अउ नउकरी पाय के पाछू अपन संस्कृति अउ संस्कार ला सीखे बर छोड़ देवत हे. अवइया पीढ़ी ला घोटुल मा भेजबे नइ करत हे जेखर ले घोटुल मन अब सुन्ना परत हे अउ कतको जनजाति के कतको संस्कृति मन मेटावत जावत हे. छत्तीसगढ़ के ए संस्कृति अवइया बेरा मा कहाँ रही अउ रही कि नइ रही यहू गुनान के विषय आवय.

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