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छत्तीसगढ़ी विशेष - पाछू लहुट के देखे बर भुलागे गाँव : अब नइ ठाहरत हे पाँव

गाँव म कतको मनखे मनखे सुपरफ़ास्ट हें.
गाँव म कतको मनखे मनखे सुपरफ़ास्ट हें.

गाँव-गाँव म अब मोटर, कार, फटफटी, टेक्टर हे जेन एकक साँस म शहर दउड़थे दुसर साँस म लहुट जथें. मोटर गाड़ी के रेम लगे रहिथे. छत्तीसगढ़ नवा राज्य बने ले सुंदर-सुंदर सड़क बने हे. अब किसान कम मशीन जादा खेती करत हें. धान सरकारी दर म बेचावत हे. गोबर बेचाय ले रूपिया बनत हे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 4:12 PM IST
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खबरीलाल अपन भतिजा संग गाँव जावत राहय. गाँव के सियार(सीमा) अइस तब भतिजा भोलू पूछिस कस कका गाँव ह त गाँव कस नइ लागत हे. चारों खुंट चकाचक अंजोर हे. खबरीलाल किहिस-बेटा इही त हमर छत्तीसगढ़ के बिजली पावर आय. गाँव-गाँव म बिजली के अंजोर हे. भोलू किहिस-’कका, इहाँ त चारों खूंट दूकान दिखथे गा. खबरीलाल किहिस - ठेठ जंगल के गाँव ल छोड़ के अब गंवई-गाँव ह गंवई-गाँव बरोबर नइ लगे. जरूवत के सबे जीनिस मिलत हे. साग-भाजी बर घरों घर बारी-बखरी हे. गाँव-गाँव म अब मोटर, कार, फटफटी, टेक्टर हे जेन एकक साँस म शहर दउड़थे, दुसर साँस म लहुट जथें. मोटर गाड़ी के रेम लगे रहिथे. छिन-छिन म मनखे एती ले ओती होवत रहिथें. छत्तीसगढ़ नवा राज्य बने ले सुंदर-सुंदर सड़क बने हे. बइला-गाड़ी के जुग नइ रिहिस. अब किसान कम मशीन जादा खेती करत हें. धान सरकारी दर म बेचावत हे. गोबर बेचाय ले रूपिया बनत हे.

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बुता करइया टंच होगे
गाँव म पंचइतीराज हे. जेला लोकतंत्र म गाँव के छोटे सरकार कहे जा सकत हे. गाँव म कतको मनखे मनखे सुपरफ़ास्ट हें. बुता करइया टंच होगे हें. दू दिन के बुता म चार दिन अउ चार दिन के बुता म आठ दिन लगाथें. भोलू किहिस-‘कका ये गाँव ह त आधा सहर, आधा गाँव कस हे’. खबरीलाल किहिस-‘बेटा, अब सब ल सुख चाही न. कम काम अधिक दाम होना. तइहा के दिन गै.
भेलई छत्तीसगढ़ के चिन्हारी


खबरीलाल भोलू ल किहिस-‘तोर ददा हर कबड्डी खूब खेले. कइ परकार के रेस म भाग लेय अउ पढ़ई म घलो अव्वल आय. पहिली भेलई म नौकरी मिल जाय. तोर ददा के भेलई म नौकरी अइसने लगगे. मोर बड़े होवत ले भेलई स्टील प्लांट के नौकरी पाना कठिन होगे. पता लगन नइ पाय सीट फूल हो जथे. ये चमत्कार छत्तीसगढ़ म कई दसक पहिलील हे. ये बात ल पहिली छत्तीसगढ़ के अस्मिता ले जुड़े सवाल उठइया, विद्वान सांसद स्व.चंदूलाल चन्द्राकर कइ बखत उठाय रिहिस, फेर प्रश्न उत्तर ले जादा गरू रिहिस. ये प्रश्न ह उत्तर के रद्दा देखत आज तक खड़े हे. पहिली कोनो पूछें के का बुता करथस त कहूँ भेलई स्टील प्लांट म कहि देय त टूरा-टूरी मन के बिहाव बाते-बात म चुटकी बजात पक्का हो जाय. प्लांट अउ बैंक वाले मन ल दूसर विभाग के करमचारी के तुलना म पगार जादा मिलय. बोनस घलो खूब बनय. हर महीना आँखी के भरत ले रूपिया दिखे. तोर ददा के बिहाव त अइसना पक्का होय रिहिस. हमर देश म छत्तीसगढ़ ल भेलईच के नाव ले जानें जाय. भेलई के स्टील प्लांट देश दुनिया म प्रसिद्ध हे. अब छत्तीसगढ़-राज होय ले लोगन रायपुर के नाव ले छत्तीसगढ़ ल जानथें. नवा रायपुर चकाचक हे. फेर भोपाल के श्यामला हिल्स के सुरता नइ भुलात हे. अइसे लागथे के भोपाल ताल घुमे बर फेर बलावत हे.

स्कूल-मैदान गायब: नवापारा आगे
भोलू पूछिस-कइसे कका, गाँव म त स्कूल के बड़े जान मैदान रिहिस न? खबरीलाल किहिस-‘हाँ, फेर अवैध कब्जा होगे हे. एक झन सज्जन सत्ताधारी पारटी के झंडा मैदान म लटका दिस अउ घर बना डरिस ओखर देखा-सिखी दूसर, फेर तीसर अइसे करके पच्चीसों घर बनगे. चुनाव के पहिली सब ल पट्टा घलो मिलगे. पंचइतीराज के मुखिया सत्ताधारी दल के रिहिस ओखर खूब चलिस. स्कूल के मैदान के जगा म एक साल बाद नवा पारा गाँव म जुड़गे. बड़े नेता के नाव म मोहल्ला बनगे. संइया भए कोतवाल त डर काहे का?

स्कूल त चिक्कन तोपागे हे, अउ मैदान गायब होगे.
इहाँ के राजनीति म कदम-कदम म संइया अउ भैया हे. एक दु झन बस्ती के स्कूल परेमी जागरूक खूब लिखा-पढ़ी घलो करिन फेर सत्ता के जब आँखी कान मुंदा जथे तब कतको लिखा-पढ़ी कर लेव कुछू नइ होय. नियाव मांगत-मांगत एक खरही, दु खरही आवेदन दे डारो सिस्टम अइसे हे के परान लेवा जही फेर नियाव नइ मिल पाय. एला सब जानत हें फेर कुरसी म बइठते साथ खोपड़ी घुम जथे. छोटे-छोटे बात म कोर्ट-कछेरी म पेशी-दर पेशी झेलत जवान बुढवा हो जथें. अपवाद एक्का-दुक्का हो सकत हे. बाकी जेखर तिर लउठी हे ओखरे भंइस होथे.

तरिया-अटागे, मर कोकड़ा
भोलू फेर पूछिस-‘कका, तरिया(तालाब) के पानी ह हरियर-हरियर कइसे दिखत हे? खबरीलाल बतइस पहिली हेंडपंप नइ रिहिस. लोगन तरिया अउ कुआं के पानी पिएं. पानी एकदम फरिहर (साफ़) राहय. गर्मी म झरिया के पानी ले काम चल जाय. जेखर-जेखर घर कुआं नइ राहय या गरमी म जेखर कुआं सूखा जाय तेंन झरिया के पानी ल पिएं. अब गाँव के आबादी बाढ़ीस, मवेशी मन ल तरिया म नहवाना शुरू करिन ओखर ले परदूसन बाढना शुरू होइस बाद म तरिया म मछरी बोय के सुरूआत होगे. ओखर ले पानी चुक हरियर होगे. कोनो कोनो तरिया के पानी करिया- करिया होगे. अउ तरिया बरबाद होगे. जीव –जन्तु मन के परान गे. कतको तरिया के परान सुखागे. तरिया अटागे,पटागे. बरसों-बरस होगे तरिया के लद्दी सरत-बस्सात हे. कोनो देखइया रिहिन न सुनवइया. पचास साल पहिली स्कूल के लइका मन ल साफ़-सफाई शिक्षा देय जाय. हर सनिच्चर स्कूल के विविध गतिविधि म ग्राम-सफाई के कार्यकरम शामिल राहे. स्कूल, गाँव, तरिया, नदिया के तीरे-तीर के साफ-सफाई हो जाय अउ लइका मन ल सफाई के शिक्षा मिल जाय. लइका मन के शारीरिक स्वास्थ्य अउ सफाई जांचे-परखे जाय. एखर बने शिक्षा मिले.

खेती के शिक्षा गायब हे !!
भोलू पूछिस-‘कका, हमर राज्य छत्तीसगढ़ कृषि परधान हे. इहाँ स्कूल हे, मैदान नइ हे. कृषि-शिक्षा नइ हे अइसे काबर? खबरीलाल किहिस-‘हाँ, तेंहाँ जोंन बात कहत हस तेंन वाजिब बात आय. तोर प्रश्न हर जरूरी प्रश्न आय. बेटा, जब हमन पढ्त रेहेंन तब गाँव वाले मन मिलके स्कूल ल खेत दान करे रिहिन. स्कूल म धान बोउ जाय. स्कूल के लइका मन गुरूजी के बताय रद्दा म चल के धान बोवइ, निंदई-कोड़ई, धान कटई सब बुता करके कृषि-शिक्षा पांय. मिडिल सब लइका मन के स्कूल म ये शिक्षा हो जाय. स्कूल के आमदनी बाढ़े. ओखर ले स्कूल के जरूवत पूरा करे जाय. स्कूल अपन जरूवत बर आत्मनिर्भर हो जांय. गरीब लइका मन ल पढ़े बर मदद मिल जाय. अब त ये सब के कल्पना तक करना कठिन हे. ईमानदारी से लइका मन के बहुमुखी विकास होय. गाँव-गाँव म स्कूल ल आर्थिक सहयोग मिलते राहय. स्कूल मन ल सरकार परजीवी बना दिस. दान-मान के भावना खतम होगे. बुनियादी शिक्षा के बुनियादे(नींव) गायब होगे. जनसहयोग के भावना चुकता खतम होगे.स्कूल म राजनीति नइ होय भले राजनीति म स्कूल समा जाय.

चाँदनी रात के आनंद
भोलू अपन नाक ल धर के पूछत हे- कइसे कका ये ह डाहर बड़ बस्सात हे गा? गाँव म नाली बने हे. नाली बारहों महीना बोजाय रहिथे. खबरीलाल बतइस-पंचइतीराज बर ये नाली हर बड़ पंचइत के होगे हे. कोनो जगा बस्ती म सड़क हे, कोनो जगा सड़क कागज ले बाहिर नइ निकले हे. कागजे म सड़क दउड़त हे. बिजली ले कोनो जगा चकाचक हे त कोनो जगा कुलुप अंधियार हे. सरपंचजी, पंचजी मन के राज हे.

शान्ति कहाँ गे ?
जेन सालों साल ले नीलामी म बजार लेवत हे तेंन भोगागे हें. कतको गाँव म स्कूल के आगू किराया म दूकान चलत हे. बाजरीकरन गाँव-गंवई घलो घुसरगे हे. सुंदर सुंदर लइका मन पाउच खा के पिच्च-पिच्च थूकत रहिथें. गुड़ाखू करके थूका-थूकी आम बात हे. गाँव म खुल्ला मैदान म बइठे-बइठे चाँदनी रात के आनंद लेना अब बस सुरता म रहिगे हे. गाँव म पुलिस थाना खुलगे हे. मनखे मन रात म अपन घर के भीतरी म तारा लगा के सूतथें. तभो ले सुरक्षा के सवाल दिमाग म गश्त लगावत रहिथे. गाँव म कतको तिगीड़-तागड़ मन के बसेरा हे. आए-दिन झगड़ा-झंझट होना आम बात हे. पहिली कोनो-कोनो मनखे दारू पिएं अब कोनो-कोनो मनखे दारू नइ पिएं. सूरा पी के शूरबीर होवइया मन के कोनो कमी नइ हे.

सेल्फी के मजा
भोलू पूछिस- गाँव मन खूब तरक्की करत हें न कका? खबरीलाल किहिस- हाँ, बेटा ‘आजकल घरों घर नल ले पानी आवत हे. बोरिंग के पानी के बेवस्था हे. पहिली पोस्ट आँफिस काम करे. अब बैंक घलो आगे हे. कइ ठन छोटे-बड़े उद्योग के धुंगिया हे. धुंगिया म साँस लेय के गाँव ल अभ्यास होगे हे. अब वो हवा कहाँ जेन नींद बला दे. कोनो कइसनो शिकायत करे सरकार के कान खड़े नइ होय .ख़ास बात ये हे के अब गाँव म गँवइहाँ कम नेता जादा होगे हे .भ्रष्टाचार म गाँव के सुन्दरता हे. खेती के संगे संग बारी हे. लइका मन गुल्ली डंडा, बाटी, बिल्लस, नदी-पहाड़, कबड्डी, खो-खो, खेलत कम दिखथें. मोबाइल ले सेल्फी ले के मजा लेथें. मेसेज भेजथें, फोटू खिंचथें. गाना सुनथें, फिलिम देखथें. बचपन टी.वी.देखत बड़े होथे. जवानी परेम के लाहरा म नहाथे. वाट्स एप,फेस बुक, म मजा आवत हे. बहुरिया मन मोबाइल म जादा, बुता म कम बिजी होथें.

कोरट-कछेरी के दुखड़ा
भोलू किहिस, बने गाँव लगत हे कका! खबरीलाल किहिस-‘का, करबे बेटा अपन दुखड़ा कोन ल सुनाबे. छितका कुरिया ईंटा के पक्का मकान होगे हे. गाँव म स्वास्थ्य केंद्र हे फेर डाक्टर, नर्स नइ हे. स्कूल हे फेर मास्टर नइ हें. कतको गाँव म मनी पावर हे, परेम नइ हे. आए दिन कोरट-कछेरी चलत हे. कतको सज्जन मन एक-दुसर ल लड़ाय म बिजी रहिथें, उनकर इही म रोजी-रोटी पकथे. सुनता नइ होंन देंय. अब पहिली सरिख आगी मांगे बर कोनो दूसर घर नइ जाँय. सेफ्टी माचिस हे अउ गैस चुल्हा. साग के कटोरी म दुसर घर के मितानी साग के दुकाल हे. भाई-चारा अउ परेम-भाव ल राजनीति चगल दिस.अब कोनो-कोनो घर ल छोड़ के छेना के आगी म दोहनी म दूध चूरत कमती दिखथे. गाँव के दूध शहर म बेचावत हे. घर के लइका रोवत-चिल्लाव्त हे. दुनों कका भतीजा अइसना गोठियावत घर लहुटगें. ( लेखक साहित्यकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)
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