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छत्तीसगढ़ी विशेष - जेकर संइया हे कोतवाल

ए सरकार मन ला अतेक पॉवर कोन दे देथे के सत्ता रूपी घोड़ी मं बइठे साठ सातो आसमान मं उड़े ले धर लेथे?
ए सरकार मन ला अतेक पॉवर कोन दे देथे के सत्ता रूपी घोड़ी मं बइठे साठ सातो आसमान मं उड़े ले धर लेथे?

ए सरकार मन ला अतेक पॉवर कोन दे देथे के सत्ता रूपी घोड़ी मं बइठे साठ सातो आसमान मं उड़े ले धर लेथे अउ जनता के हित ऊपर अइसे हनटर बरसावत रहिथे के ओमन कराहत रहि जथे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 6:57 PM IST
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नानपन ले अब तक ये बात ला किस्सा कहिनी के रूप मं सुनत आवत हन, अब मोरे सही सबो झन सुने होहु घला. अंधेर नगरी अउ चउपट राजा टका सेर भाजी अउ टका सेर खाजा. ये कहिनी तो ओ जमाना के हे जब ओ बखत अतेक पढ़हइ लिखइ के जोर नइ रिहिस हे. कम पढ़े लिखे रहय, जइसे कहाय तइसे मान लय अउ वइसने करय धरय. जइसे राजा तइसे परजा रहय. सब सुखी राहय ओकर राज मं अउ चारो मुड़ा सुख अउ शांति राहय.

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परजा एला देख नइ सकय
राजा मनमानी करय, परजा चुपचाप सुन अउ सही लय फेर आज के जमाना अलग हे, गलत बात ला परजा देख, सुन अउ सहे नइ सकय. राजा थोरको गलती करही अनीति के मार्ग मं रेंगे ले धरथे तब परजा एला देख नइ सकय अउ आवाज उठाना शुरू कर देथे. मनमानी देखे अउ सहे नइ सकय अउ राजा के खिलाफ सड़क मं उतरे ले धर लेथे, आन्दोलन करना शुरू कर देथे. अब ज़माना बदलगे हे. राजा के कान पकड़ना, नारे बाजी करना सीखगे हे. जादा तीन पाँच करथे तब अइसन राजा अउ नेता ला कुर्सी ले कइसे उतारना हे तेकरो तरकीब जानगे हे. एकरसेती सरकार ला बहुत चौकस रहे के जरुरत हे अउ कहूँ मनमानी करही, बरपेली अपने चलाही तब ओ दिन दूर नइहे जइसे ओला सत्ता सउपे रहिथे वइसने घुरवा मं कचरा असन फेक दिही. छोड़ दिही भोरहा ला, जादा हवा मं मत उड़ावय सत्ता अउ पद के मद मं आके. जइसन नीति नियम हे वइसने सत्ता रूपी गाड़ी ला क़ानून के रसदा मं चलाना चाही.
अरे ए भला कहाँ के, कोन मेर के नियाव हे के एक कम पांच कोरी याने नीनानबे झन काहत हे के अमुख आदमी चोर, डकैत, बदमास, ठग, बइमान अउ नीयतखोर हे, ओला जेल मं डार देना चाही, समाज ला ओकर मन से खतरा रहिथे हे. सब काहत हे ओहर कालाबाजारी करइया हे, जालसाज हे, घुसखोर हे, वोकर खिलाफ मं पुलिस मं कतको रिपोर्ट लिखाय हे, कतको झन के खून करे हे तभो ले सांड असन खुल्ला घुमत हे. ओ अपराधी हे, हतियारा हे. अइसन अपराधी मन ला तो जेल मं रहना चाही. अइसन मन ला समाज मं देख के लोगन सोचथे, ए कइसे घुमत-फिरत हे, का एला मंत्री संत्री नइ ते कोनो अधिकारी कोती ले छुट मिले हे का?



जब संइया भये कोतवाल तब काकर डर हे के तर्ज मं अइसन अपराधी मन के कोनो कांहीं नइ बिगाड़ सकय. लगथे राजनीति के रूप अब सेवा, सहायता करे के बजाय खाय पिए अउ गुलछर्रा उड़ाय बर होगे हे. एक बार जनता ला ठग के धोखा मं चुन के आ जाथे एकर बाद जनता मन ला अइसन हलाल करथे, बेंदरा कस नचावत रहिथे के बात झन पुछव. जउन काम करना हे जनता बर, परदेश के हित मं तब ओला नइ करय, काम करही नेता मंत्री उद्योगपति अउ अधिकारी मन के, के ओकर मन के जेब कइसे भरय? कहां ले धन के जुगाड़ करे जाय? अब धन आथे गलत रसदा ले, अनीति अउ बइमानी के काम करे ले. गलत क़ानून नियम बना के जनता के अधिकार ला छीन लौ जेकर से ओमन सरकार के बिरोध मं कुछु कोनो बोल झन सकय, आवाज मत उठा सकय?

अभी मध्यप्रदेश सरकार हा अइसने कस अलकरहा क़ानून लागू कर दे हे. ओमा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के धारा 17-ए के तहत आदेश जारी करे हे जेमा केहे हे कोनो लोक सेवक के मामला मं सरकारी कामकाज मं अपराध के जांच अउ पुछताछ शुरू करे जाय ओकर पहिली सरकार ले अनुमति लेबर परही. अब एकर मतलब तो सीधा इही होवत हे के ओ गलत अउ आरोपी अफसर मन ला भ्रष्टाचार के दलदल मं डुबकी लगाय के खुल्लम खुल्ला छुट मिलगे हे. अइसन मामला के जांच बर, जांच कमिटी ओ अफसर मन के कुछ नइ बिगाड़ सकही? कारवाई करना होही तब सरकार ला पूछे ले पर ही.
बिना बिचारे जो करे सो पाछे पसताय.

ए सरकार मन ला अतेक पॉवर कोन दे देथे के सत्ता रूपी घोड़ी मं बइठे साठ सातो आसमान मं उड़े ले धर लेथे अउ जनता के हित ऊपर अइसे हनटर बरसावत रहिथे के ओमन कराहत रहि जथे. जउन ला हितवा मितवा समझ के भारी वोट देके सरकार बनाथे बाद मं विही मन डलहौजी अउ औरंगजेब जइसन तानाशाह के रसदा मं चल परथे. लगथे मध्यप्रदेश सरकार घला भटकगे हे, उहू हर अइसने कस रसदा कोती रेंगत हे ए ठीक नइ लगत हे, जनता एकर बिरोध करही ए तय बात हे. अइसने कस काला कानून पिछली बार राजस्थान सरकार हा घला अध्यादेश के जरिये भ्रष्ट अफसर मन ला बचाए के खातिर लाय रिहिस हे फेर मीडिया हा ओ कानून के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाइस. हार खाके ओ सरकार ला ए काला कानून वापस ले बर परे रिहिस हे. मध्यप्रदेश सरकार ला घला वइसने दिन झन देखे ले पर जए जइसन राजस्थान सरकार ला देखे बर परे रिहिस हे. अइसे झन हो जाय बिना बिचारे जो करे सो पाछे पसताय. ( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)
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