छत्तीसगढ़ी में पढ़ें -जगमग जगमग जगमगाही गोबर के छत्तीसगढ़ी दीया

गोबर के ताकत अब देश-दुनिया घलो देखही !
गोबर के ताकत अब देश-दुनिया घलो देखही !

गोबर थोपना ठेलहा बुता न होके व्यवसायिक काम करना होही. सब गोबर कर दिस, गोबर चोता, गोबर–गनेस, गोबर देना, कोनो ल ‘गोबर’ कहना अब भोकवा या मूर्ख आदि के अर्थ में बदलाव हो जही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 1:10 PM IST
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त्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नरवा (नाला), गरूवा (पशु), घुरूवा (कम्पोस्ट), बारी (न्यूट्रीशन गार्डन) अउ गोधन न्याय योजना से गाँव धीरे–धीरे आत्म-निर्भर होय के दिशा म आघू कदम बढावत हे. प्रदेश के मुख्यमंत्री हर गाँव के जनजीवन म आर्थिक, जैविक-खेती अउ कृषि भूमि संरचना म बदलाव के संकलप ले हे तेंन आघू बढत हे. गाँव ल आत्म-निर्भर बनाय बर जब ले प्रदेश म गोधन न्याय योजना शुरू करे हे, तब ले छत्तीसगढ़ म पशुधन अउ गोबर के महत्व बाढ़ गे हे. गोबर के दीया अउ खातू (वरमी कम्पोस्ट) बनाय के पहल से बड़े बदलाव हो सकत हे.

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छत्तीसगढ़ म गोबर के महत्ता
“गोबर दे बछरू, गोबर दे, चारों खूंट ल लिपन दे ... ये लोक गीत म गोबर के महत्ता बताय गे हे. पहिली गाँव अउ सहर म माटी के मकान राहय. हर दिन गोबर से घर लिपे जाय. अंगना-दुआर ल पवित्र करे बर गोबर के छरा दे जाय. देवारी तिहार म गोबर ले बनाय गौरी–गनेस के पहिली पूजा करे जथे. गोबर्धन पूजा म गोबर खुंदाय जथे. इही गोबर ल लेके एक दुसर ल तिलक करे के परम्परा हजारों साल ले आवत हे. हर पूजा–पाठ के पहिली जगा ल गोबर ले लिप के पबरित (पवित्र) करे के रीत आजो हे.
नवा परयोग: गोबर के दीया


गोबर से कइ परकार के दीया बनाय बर, कचरा संग्रहन केंद्र के दीदी अउ स्व-सहायता समूह के महिला मन ये बीड़ा ल उठाय हें. विशेष बात ये हे के ये महिला मन जनरूचि के अनुसार गोबर के रंग–बिरंगा दीया बनावत हें. एमा ऊँ, नरियर ,कलश ,स्वस्तिक,कछुआ,शुभ-लाभ,गुल्लक आदि मन लुभावन आकार-परकार के दीया बनाय गे हे. कई जगा दीया के अलावा ,धुप अगरबत्ती ,हवन सामग्री घलो बनाय जात हे. दीया जलाय के बाद एला गार्डनिंग करईया मन खाद के रूप म उपयोग कर सकत हें. गोबर के दीया मन बहुत आसानी से माटी म मिल जथे. ए नवा परयोग हे. प्रदेश के स्व-सहायता समूह ले जुड़े सैंकड़ों महिला मन गोबर के दीया बना के अपन रोजगार अउ आमदनी ल बढावत हें. महिला स्वावलंबन के एमा प्रेरना हे.
छत्तीसगढ़ अउ दूसर प्रदेश म गोबर के लाखों दीया के मांग हे. शहर-शहर अउ गाँव के हाट-बजार म गोबर के दीया लुभावत हे. एसो के देवारी म छत्तीसगढ़ के पवित्र गोबर के दीया छत्तीसगढ़, दिल्ली, नागपुर, बैंगलोर ,उड़ीसा म जगमग - जगमग रोशन करही.

नवा परयोग - गोबर खातू (वरमी कम्पोस्ट)
गोबर खातू (वर्मी कम्पोस्ट) कोनो नवा बात नइ हवे. फेर ओला राज्य स्तर म जेन परकार ले लागू करे गे हे ओखर ले गाँव म आमदनी बढत हे. सरकार दू रूपिया किलो म गोबर लेवत हे अउ जैविक खातू बना के ओला आठ रूपया म बेचही. एखर ले जैविक खेती ल भरपूर बढावा मिलही. ये ह सफल होगे त एखर बहुत अच्छा परभाव जनता उपर परना तय हे. ए योजना ले मुख्यमंत्री जी ह. छत्तीसगढ़ के नाड़ी ल पकड़े हे. छत्तीसगढ़ में एखर सामाजिक, राजनीतिक,आर्थिक, जेविक परभाव पड़ना निश्चित हे.

गाँव अब आर्थिक बदलाव के दिशा म
अब वो समे नइ रिहिस जब गोबर गाँव के छेना (कंडा) अउ घुरूवा म फेंके के काम आय. गउ–पालक गोबर बेच के अपन आमदनी बढावत हें. गाय –भंइस ल चारा मिले ले उनकर मान बाढिस हे. सरकारी खरीद के सेती अब गोबर नियमित आमदनी के जरिया हे. पहिली गोबर थोप के छेना (कंडा) बनाय जाय. खातू-कचरा बर घुरूवा म फेक दे जाय. मवेशी छेल्ला घूमें जहाँ–तहां गोबर कर देंय. अब गोबर ‘धन’ होगे. गोबर रूपिया देथे. सरकार खुद दू रूपिया किलो म गोबर लेवत हें. जैविक खातू बनावत हे. छेल्ला घूमइया पशु मन के मान बाढीस हे. घर के कोठा (पशुधन को रखने की जगह), कोठार म छेल्ला घूमइया पशु ल जघा मिलगे हे. गौठान बनगे हे, चरोखर के व्यवस्था करे गे हे. छत्तीसगढ़ बर ये कोनो नवा ब्यवस्था नोहे फेर भुलात जात रिहिन तेला सरकार दुरूस्त करत हे. गोबर के छेना (कंडा) आन लाइन बेचे के खबर घलो सुनात हे. एहा कोनो अचरज के गोठ नोहे. आन लाइन वाले जुग म छेना घलो ऊँची कूद कूदत हे.

गोबर के कमाल- हाना म अर्थ बदल जही
गोबर के ताकत अब देश-दुनिया घलो देखही. अब दिमाग म गोबर भरे हे के अर्थ घलो बदल जही. गोबर थोपना ठेलहा बुता न होके व्यवसायिक काम करना होही. सब गोबर कर दिस (सब व्यर्थ कर दिया) / गोबर चोता (निष्क्रिय,निकम्मा) / गोबर–गनेस(मूर्ख) / गोबर देना (गाय भैंस का मल त्यागना) कोनो ल ‘गोबर’ कहना अब भोकवा या मूर्ख आदि के अर्थ में बदलाव हो जही. अब गोबर अर्थ से जुड़गे हे तेखर सेती गोबर के पहिली ले जादा मान बाढ़ जहि.
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