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छत्तीसगढ़ी व्यंग्य : भ्रष्टाचार के सुपर-वायरस बर वेक्सीन के आविष्कार कब होही?

भ्रष्टाचार एक महान वायरस आय. ये वायरस अपन सूक्ष्म रूप म हमर महान देश म सब जगा व्याप्त हे. कतको झन एला अशुभ मानथें त कतको झन एला अतेक शुभ मानथें के देवारी म लछमी दाई के जगा म एखरे पूजा करथें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 12, 2021, 1:01 PM IST
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बरीलाल गाँव के ‘चिंतन-चंवरा’ म बइठे हे. बस्ती के चार पांच झिन बड़े-छोटे सज्जन पुरूष मन घलो इही चंवरा म बिराजे हें. इहाँ के पढ़े-लिखे छोकरा-छोकरी मन ये जगा ल ‘चिंतन-चंवरा’ कहि के नाव धर दे हें. एखर कारण हे के गाँव के सियान मन संझा-बिहिनिया इहें सकला के अपन सुख–दुःख ल गोठियाथें. देश-दुनिया के खबर लेथें. गाँव के जरहा बइगा इहाँ के संदेश ल एती-वोती बगराय के बुता करथे. पहिली गाँव के सियान मन के हाथ म सुंदर घड़ी दिखय. कोनो-कोनो एक हाथ म ट्रांजिस्टर से खबर सुनत राहें, सबेरे-सबेरे तरिया-पार म रेडियो के आवाज सुने बर मिल जाय. ससुरार म अंचरा धरऊँनी साइकिल, ट्रांजेस्टर नहिं हाथ घड़ी जरूर मिल जाय ओकर ले नवा दुलहा के टेस बाढ़ जाय. संझा सियान मन बांस गीत के धुन म बुड़े मस्त दिखें. छत्तीसगढिया गीत सदाबहार राहे. आकाशवाणी-रायपुर ले उन बरसाती भैया के लोकप्रिय ‘चौपाल’ कार्यक्रम जरूर सुनय. एमा उन खेती-किसानी के गोठ अउ छ्त्तीसगढी गीत सुनें के अपन मनोरंजन करें. अब घरों घर टी.वी., मोबाइल आगे त सब छू-मंतर होगे. गाँव-गाँव म कम्प्यूटर पहुंच गे हें. गाँव ग्लोबल होवत हे. समझ ऊँच(?) होगे अब रडियो म हमर मुख्यमंत्री भूपेश बघेलजी के गोठ नीक लागत हे. रेडियो फेर लहुटही.

अच्छे दिन आगे
खबरीलाल अपन संगी मन ल बतात हे, आजकल चोर-चंडाल मन के अच्छे दिन हे. भ्रष्टाचार के वायरस सब परकार के वायरस उप्पर भारी हे. ये महावायरस आय. मिनटों म एहा वायरस-दाता के रस चूस के ओला फेंक देथे. हर्रा लगे न फिटकिरी रंग चोक्खा हो जथे. आँन लाईन के मनखे आफ लाईन के शाट ले कलबला जथे. गरीबदास किहिस-हमर संस्कृति म जइसे दान-पुन्न के महत्ता हे वइसने हमर लोकतंत्र म गुप्त-दान अउ ओपन दान दुनो बिना रोक-टोक चलत हे. अज्ञानी-मन एला भ्रष्टाचार कथें. ये वायरस हमर देश बर बहुत जुन्नेट हे. लालबुझक्कड़ किहिस-सब ईश्वर के माया हे. कोनो जगा घाम त कोनो जगा छइहाँ हे. उप्पर वाले पावरफूल मनखे मन लीला रचथें, लीला करथें. अज्ञानी ये वायरस के गुन ल नइ जानें. ये भ्रष्टाचार के वायरस सर्व-सुखकारी, सर्व-दुखकारी हे. एखर किरपा ले सब काज सिद्ध हो जथे. मरहा-खुरहा सब सिद्ध महापुरूष हो जथें. जेखर उपर ये वायरस किरपा करथे ओखर सातों पीढी ल धन दोगानी ले तार देथे. हमर देश के राजतंत्र म एखर खूब दबाव अउ प्रभाव हे. एखर बिना साधारण मनखे के जी पाना बहुत कठिन क्र दे गे हे. कतको झन इही ल देश सेवा कहिथें. ये वायरस खून ल जुड़ कर  देथे . शेर ल बोकरी बना के छोड़ देथे.
भ्रष्टाचार के वायरस कहाँ नइ हे?


खबरीलाल ये गोष्ठी म सब ले जादा गियानिक दिखत रिहिस. अपन गुरू गंभीर बानी ले बोलिस-भ्रष्टाचार एक महान वायरस आय. ये वायरस अपन सूक्ष्म रूप म हमर महान देश म सब जगा छाय हे. कतको झन एला अशुभ मानथें त कतको झन एला अतेक शुभ मानथें के देवारी म लछमी दाई के जगा म एखरे पूजा करथें. एखर से घर के लछमी सदा प्रसन्न रहिथे. गोबरदास के अंतर-चक्षु घलो खुलिस. वोहा किहिस-भ्रष्टाचार के वायरस के बारे म हमर देश के लइका, सियान, जवान सब जानथें. अफसर, नेता, बड़े-बड़े ओहदाधारी अउ समाज के सबे वर्ग के मन ये महान वायरस के पुजेरी आंय. ये वायरस अतेक खतरनाक हे, के जेखर देंह म येखर प्रवेश होथे तेला ये ह विचार-शून्य कर देथे. ओ मनखे आदर्श अउ सिद्धांत ल भूला जथे. लालच के मारे गदगदाथे. ओला सिर्फ अपन अउ अपने परिवार के सुवारथ ले जादा कुछ नइ दिखे.

बाहरी आवक के समीकरन
ये वायरस के प्रेरना से मनखे दिन-रात बाहरी आवक के गुना-भाग अउ  रूपिया के नवा-नवा समीकरन म भिड़े रहिथें. भ्रष्टाचार के वायरस से पीड़ित रोगी मन उन ल नोट सुंघाथें तहाँ ले सब बुता झटकून हो जथे. ये वायरस जेन मनखे उपर सवार होथे वोला सब जगा नोट दिखथे.  जिहां नोट मिलथे वुहें झपाय बल्कि झपा के खुश होथे. पोल खुले के बाद सावन-भादों कस ओखर आँखी म आँसू के झड़ी लग जथे. फेर आज के मनखे बड़ जल्दी म हे. नैतिक शिक्षा के हूम दे के आगू बढ़ जथे. देश ल भ्रष्टाचार के वायरस किसम-किसम के दुःख देवत आत हे. येखर ले पीड़ित मन के खबर लेवइया कोन हे?

आत्म-निर्भर वेक्सीन
लालबुझक्कड़ किहिस-हमर  महान तपस्वी, महान नेता अउ महान विचारक के महान देश म भ्रष्टाचार के वायरस राज करत आत हे. एखर बर वेक्सीन बनाय के कोनो जोरदरहा साहस नइ करें हे? ये विषय म गंभीर होना जरूरी हे. एखर वेक्सीन(टीका) बना के भारत ‘आत्म-निर्भर भारत’ बन सकत हे. भारत म दुनिया भर के वेक्सीन बनत हे. कोरोना वैक्सीन पूरा भारत म लगना हे. सरकार अउ हमर देश के बिज्ञानिक निक मन के दिन-रात मिहनत ले कोरोना के वैक्सीन बने हे. 16 जनवरी से वक्सीनेशन शुरू हो जही. येहा बड़े सफलता आय. भारत ल कोरोना मुक्त होना हे. खबरीलाल किहिस-भ्रष्टाचार-वायरस के वेक्सीन बनाय बर केंद्र सरकार ल जरूर संकल्प ले बर लागही.  प्रचलित टेबलेट पूरा काम नइ करत हे. आँन लाईन टेबलेट तुरंत प्रभावी हे फेर आफ लाईन म ये वायरस अउ घातक हो जथे. जनता के सोच हे के भ्रष्टाचार-वायरस के वैक्सीन या टीका के आविष्कार स्वयं प्रधानमंत्री मोदीजी अपन बिज्ञानिक द्रष्टि ले करे म पूरा सक्षम हें. शेखचिल्ली किहिस-अभी त सरकार ल कोरोना ले निपटन देव. अब त बर्ड-फ़्लू आगे हे. अब चिरई-चूरगुन घलो डरूवावत हें.

सायबर अपराध
लालबुझक्कड़ किहिस-सायबर अपराध बाढ़े उपर ले बाढत हे. ए.टी.एम. ले दूसर के पइसा ल निकाल के दूसर  तिहार मनावत हे. सायबर अपराधी मन के सब ले जादा–दिन अच्छे हे. हौसला बुलंद हे. आर.बी.आई. अउ बैंक खूब चेतावत हे. एमा बइठे-ठाले दिमागी कलाबाजी हे. जनता के पइसा डकारना. आँन लाइन पइसा झटकना बड़े धंधा होगे हे. खबर खूब पढ़े बर मिलत हे. हिंसा के खबर रोजे आत हे. नक्सली उत्पात अउ हिंसा बंद होय के नाव नइ लेय. देश के बार्डर म आतंकवादी लाहो लेवत हें. देश के भीतर देश म आगी लगा के आगी तपइया बाढ़त हें. गाँव के एक झन सियान किहिस-महंगाई खूब बाढ़त हे. भाई कुछ करो. शेखचिल्ली किहिस-बबा पूरा देश म फोकट कार्यकम जिंदाबाद हे. असहाय मन के सहाय बने के जरूवत आजो हे गा. फेर आजकल गरीबी-रेखा म खूब मिलावट होगे हे. गरीब होय म गौरव के बात हे. फोकट म खाव अउ खूब मेंछराव, लोंन लेव मजा करो. सरकार के छत्र सब के उप्पर हे.

फ्री-सिस्टम
खबरीलाल किहिस- फ्री-सिस्टम चुनाव जीते के कुची आय. करजेड़ी होना सम्मान के बात हे. करजा ले-ले के तरक्की करो. अब करजा लेना गौरव के बात हे. करजा नइ पटाना ओखरो ले बड़े गौरव के बात आय. नागरिक करजा म बुड़े राहय, सरकार करजा म बुड़े राहय. जइसे जनता, वइसने सरकार. तरक्की जारी हे. विकास मगन हे कथें. विकास एकांत म लुकाय हे. दिखबे नइ करत हे. राजनीति अपने धुन म चलत हे. गोबरदास किहिस-डीजल,पिटरोल, खाए के तेल के भाव चुपे-चुप बाढ़त हे. सब जिनिस के भाव चढ़त हे. सरकार कोरोना वैक्सीन के बुता म भिड़े हे. पछीना के कमई आथे अउ पछीना म नून बरोबर घुर जथे. जेन कमाय-खाय के काबिल हें उन घलो फोकट सिस्टम के बहती गंगा म डूबके बर सीखगे हें.

कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर ...
गाँव के लेड़गा बसंत(दाई-ददा के रखे नाव) परबत बरोबर बात उठइस किहिस-हमर लोकतंत्र के मुड़ डोलत हे. देश म विरोधी दल के सरकार रचनात्मक विरोध के रीत-नीत ल भसम कर दे हे. जनता जानत हे के उनकर उद्देश्य भरम फैलाना हे. डोरी म सांप अउ सांप म डोरी के भरम फैलाना हे. गाँव के जादा पढ़े-लिखे सरपंच ढालदास किहिस-भ्रष्टाचारके वायरस खूब तिलमिलावत हे. पांच ले दस बरस म पी.एम.मोदीजी एखर टीका इजाद करवा सकत हे. जनता संग म हे. (कारज धीरे होत है,काहे होत है होत अधीर.समय पाय तरवर फरै,केतिक सिंचौ नीर).
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