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छत्तीसगढ़ी विशेष- छत्तीसगढ़ म लोकाचार पीढी दर पीढी व्यवहार म घूरे-मिले दिखथे

छत्तीसगढ़ म घरों घर लोकाचार के धियान रखे जथे
छत्तीसगढ़ म घरों घर लोकाचार के धियान रखे जथे

छत्तीसगढ़ म लोक व्यवहार म लोकाचार के बड़ महत्व हे. सैंकड़ों बछर ले चले आवत लोक परम्परा के पालन आचरण म जब उतर जथे तब ओला लोकाचार कथें. ये लोकाचार ले जीवन शैली के दरसन होथे. छत्तीसगढ़ म घरों घर लोकाचार के धियान रखे जथे. एमा छोटे छोटे बात होथे जेमा छ्त्तीसगढिया सोच के प्रतिबिंब दिखथे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 1:35 PM IST
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छत्तीसगढ़ म लोक व्यवहार म लोकाचार के बड़ महत्व हे. सैंकड़ों बछर ले चले आवत लोक परम्परा के पालन, आचरण म जब उतर जथे, तब ओला लोकाचार कथें. ये लोकाचार ले जीवन शैली के दरसन होथे. छत्तीसगढ़ म घरों घर लोकाचार के धियान रखे जथे. एमा छोटे छोटे बात होथे जेमा छ्त्तीसगढिया सोच के प्रतिबिंब दिखथे. एखर हम चरचा करबोन.


सधौरी के खुशी
छत्तीसगढ़ म जब नवा बहुरिया पहिली बखत गर्भवती होथे तब सातवाँ महीना म सधौरी के आयोजन करे जथे. दुनों परिवार म आनंद के अवसर होथे. बहू के मान-सम्मान बाढ़ जथे. ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करे जथे. बहू के साज-सज्जा सिंगार करे जथे. महिला मन खुशी खुशी म सोहर(मंगल-गान) गा के आशीष देथें. बहू के मइके ले ओखर भाई राउत के संग तरह-तरह के पकवान लेके अपन बहनोई के घर आथे. उनकर मान-सम्मान करे जथे. बहू पक्ष ले ओखर महतारी के संगे संग आय देवरानी-जेठानी आदि समधिन भेंट करथें. खाना-पीना होथे. बहू ल आसीष देथे. कांके पानी पिये के अलावा तीली लाडू खवाय जथे.


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छट्ठी के खुशी
जब लइका के जनम होथे तब चाहे लडकी होय या लड़का पूरा परिवार भेदभाव के बिना खुशी परगट करथें. बच्चा-जच्चा के विशेष धियान रखे जथे. छेवारी बर जड़ी-बूटी के लड्डू बांधे जथे. कांके पानी सब पीथें. अब कांके पानी नन्दावत जात हे. सगा संबंधी, अउ सबे हितैषी मन छट्ठी के कार्यक्रम शामिल होथे. नवजात शिशु ल आशीष दे के उपहार भेंट करे जथे. खानपान के व्यवस्था होथे. रिश्तेदार के अलावा बस्ती के मन ये कार्यक्रम म आथें, भाग लेथें. लोग जान डरथें के फलां के घर लईका के जनम होय हे. नाउ ठाकुर मन मेंछा दाढी बनाथें. मिठाई बांटे जथे. मंगल-गान होथे. अइसे धारणा हे के जचकी के बाद महिला के नवा जनम होथे. प्रसव-पीरा अउ स्वास्थ्य संबंधी संघर्स कर वो लईका ल जनम देथे. इही नारी ल महान बनाथे.


अतिथि-सत्कार


छत्तीसगढ़ म मेहमान मन के आदर के बड़ पूज्य भावना होथे. कोनो सगा-सोदर के आय ले पहिली गोड़
धोय बर पानी दे जथे. हाथ मुहूँ धोवा के ठंडा या गरम मौसम के अनुसार पानी या शरबद आदि देय जथे. अतिथि या रिश्तेदार के साथ परणाम/नमस्कार आदि व्यवहार करे जथे. सादर खानपान के व्यवस्था कर कुशल-मंगल पूछे के बाद मूल विषय म बातचीत करे जथे.


छत्तीसगढ़ म गो-धन:पेंउस बाँटना
छत्तीसगढ़ कृषि परधान राज्य आय. पशु-धन के इहाँ के विशेष महत्व हे.सरकार ‘गो-धन न्याय योजना’चलावत हे. इहाँ पशु-धन के प्रति किसान के मन म जन-जागृति हे. गाय गरीब के जीवन के आसरा आय. गोधन सेवा ले अदभूत आनंद के अनुभव होथे. गोधन बिना घर दुआर सुन्ना-सुन्ना लागथे. हर हिन्दू परिवार म गाय पूज्यनीया हे. जब पहिली पइत गाय गाभिन होथे तब पशु-पालक सपरिवार बहुत खुश होथे. अउ गाय जब बछिया या बछरू ल जनम देथे तब गाय के थन ले जों दूध निकलथे तेला पेंउस कथें. ये पेंउस ल इष्ट देव म चढ़ाय जथे. फेर बछियाया बछरू मन ल पियन देथें. पेंउस ल घरों घर बाँट के खुशी जाहिर करे जथे. ये परिस्थिति म गाय बछरू या बछिया के विशेष सेवा करे जथे.


एक खटिया म चार बैठाकू :अपशकुन
एक खटिया म चार झन बइठे बर सियान मन मना करथें,अइसे काबर करत होहीं? शव-यात्रा म चार डाहर ले शव ल उठाय जथे. खटिया के घलो चार पाया होथे. खटिया म अधिक से अधिक तीन झन के बइठे ल ठीक मानथें.एक बात त एहे के चार झन संघरा बइठे ले खटिया टूट सकत हे. दुसर बात ये हे के चार झन के बइठइ अपशकुन लागथे.


संझा जुआर बाहरी चलाना मना करे जथे. साफ सफाई दिन म करे के प्रेरना देय जथे. सफाई दिन म करना उचित होथे. संझा जुआर फेर वुही बुता उचित नइ होय. संझा अउ रात म धुर्रा–माटी ले मुक्ति मिलना चाही.


मुड़ उपर पल्ला
मुड़ उपर पल्ला रखना नारी के सहज शील सुभाव के प्रतीक आय. मुड़ उपर पल्ला रखे बिना बाहिर आना – जाना इहाँ अभू घलो अच्छा नइ माने जाय. जेठ अउ ममा ससुर के आघू पर्दा रखना इहाँ प्रचलन म हे. एला नारी के मरियादा अउ शील से जोड़े जथे. कोनो मनखे ल झाडू नइ मारे जाय एला अशुभ माने जथे. जेला झाडू लगथे ओहा दुबरा जथे अइसे केहे-सुने जथे.


सूरूज उए (सूर्योदय) के पहिली उठना
छत्तीसगढ़ म सूरूज उए के बाद म उठना अच्छा नइ माने जाय काबर के एहा स्वास्थ्य के बर हितकारी नइ होय. एखरसेती हर हाल म कोशिश होथे के पूरा परिवार सूरूज उए के पहिली सूत के उठ जाय. खेती किसानी के बुता त मूंदरहा(बड़े फजर) ले शरू हो जथे फेर मौसम बारिश के होय ,चाहे ठंड या गरमी के ‘जो सोवत है. सो खोवत है’ इही आम धारणा हे. केहे जथे खेती अपन सेती.


बर,पिपर,आमा काटे के मनाही
पेड़ मन म बर(बरगद),पिपर(पीपल),अउ आमा(आम) के पेड़ ल काटे के मनाही हे. एखर पाछू तर्क ये हे के बर पेड़ विशाल अउ छायादार होथे. सैकड़ों, हजारों साल ले जिन्दा रहिथे. एला ऋषि बरोबर जानो, वट-सावित्री पूजा इही पेड़ के करे जथे. ये ह सौभाग्यदायी पेड़ आय. पिपर म ब्रम्हा, बिष्णु, महेश के वास माने जथे. ये पेड़ बहुत अधिक आंक्सीजन देथे. यहू पेड़ विशाल होथे. आम पेड़ ले आमा मिलथे. एखर लकड़ी हवन के काम आथे. आमा बहु-उपयोगी पेड़ आय. हरियाली ले जीवन मिलथे.


भांचा-भांची के सम्मान
भांचा-भांची मन के सम्मान करे जथे. अपन लइका ले जादा मान भांचा-भांची मन के होथे. नान-नान लइका मन छुट्टी होते साठ ममा गाँव जाना चाहथें. वुहाँ ममा,ममा दाई के बहुत लाड़ मिलथे,मउसी के मया घलो बलाथे. फेर ममा-मामी मन घलो खुश होथें. भांचा भांची मन पूरा गाँव के भांचा भांची हो जथें.


हड़हा-पाख के बंदिश
पितर-पाख म कोनो शुभ काम नइ करे जाय. कोनो नवा चीज नइ खरीदे जाय. एला हड़हा-पाख केहे जथे. महिला मन हाथ म पल्लू पकड़ के अपन ले बड़े रिश्ता वाले मन ल परणाम करथें. एमा मरियादा बोध हे. मरनी हरनी म तेरही के रात पगबंदी के कार्यक्रम रखे जथे. समधी अउ बड़े बुजुर्ग मन परिवार के आर्थिक अउ समाजिक स्थिति के समीक्षा करथें अउ परिवार के वरिष्ठ सदस्य ल पगड़ी पहिना के परिवार संचालन के भार संउपथें. जवाबदारी के बोध कराथें. सब मिलजुल के रेहे के सूझ देथें.


एकड़ा रखिया नइ काटंय
रखिया के बरी, रखिया-मिठई बनाय जथे. अउ दीगर चीज बनाय के काम आथे. एकड़ा रखिया सपड़ा जथे त ओखर संग जोड़ा बनाय बर लिमउ नहीं त आलू, नहीं दीगर एक ठन अउ जिनिस काटे के रिवाज हे. रखिया के बरी, बिजउरी घलो बनाय जथे. कोनो नियम या मान्यता स्थायी नइ होय, देश,काल परिस्थिति के अनुसार बदलाव होना निश्चित हे. बदलाव होय ले जीवन म नवीनता आथे. जों नियम रूढ़ हो जथे तेंन अपने अपन समय के झटका म टूट-फूट जथे. आजकल कोरोना के आय ले जनजीवन म भारी बदलाव दिखत हे.

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