छत्तीसगढ़ी में पढ़ें- ता - गोता अउ दया-मया के करतेन मरदम सुमारी का होगे ममियारो ला

कभू नइ भुलाने वाला संस्कार इहां जनम जनम ले चलतेच आवत हे.

कभू नइ भुलाने वाला संस्कार इहां जनम जनम ले चलतेच आवत हे.

एकदम आटोमेटिक हे एहां के नता गोता के चिन्हारी.पांव परत हंव भांजा एला सुनतेच मन सरधा ले झुक जाथे. सबो जात ला संधार के इहां नता ला नापे गेहे.

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  • Last Updated: November 24, 2020, 3:27 PM IST
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"नता-गोता अउ दया-मया के करतेन मरदम सुमारी

का होगे ममियारो ला आसूं धार रोवय महतारी "


ममा गांव के किस्सा ला सुनावत लइकामन अघावय नहीं. रंग-रंग के गोठ बात उनखर ले सुनतेच राहय तइसे लागथे. हमर इहां ममा गांव के भारी महत्तम हावय. छत्तीसगढ़ ला भगवान राम के ननिहाल केहे बर हमन ला अबड़ गरब होथे. माता कौशिल्या के मयके हमर छत्तीसगढ़ दुनिया मा अपन नाम कमावत हे.का नइये इहां, सबो जिनिस के भण्डार हावय अउ सबले सबल इहां के मनखे. आदिवासी मूल के संग उपजेन बाढ़ेन,जगा-जगा देखले कतको झन ला सरेख ले संस्कार अउ संस्कृति हमर थाथी ए. केहे गेहे न समय बड़ा बलवान होथे सच्चीच बात हरय.आज काल के मनखे समय ला घलो झुको दिही तइसे लागथे. आंखी मूंदे अउ टोपा बांधे सोंचबेत कइसे बनही बने उघार के देख चकचक ले हमर गांव ला. कोनो गांव के तीर मा ओधियाए ततके मा ऊहां के उछाह-मंगल के दरसन हो जाही.दुवारी-दुवारी में लीपे पोते चंवरा, गाय गरुवा के गोबर संग ममहाती हवा.बैला जोड़ी बधाए हे,बछरू मेछरावत हे दुहानु ढिला गेहे.का पूछबे छान्ही परवा अमरे लेवथे थोकन निहर के रेंगबे काहत हे.तेल फूल चुपरे पाटी मारे बहिनी,दिही,माई अपन बुता मा भुलाए रइथें. चिचियावत बोमियावत लइकामन के खेलई कूदई. जतका लमाबे लामतेच जाही गांव के गोठ. दिन भरहा कमाए सकेले के बुता बारो महिना पाबे.बासी पेज मा दिन ला पहा देना इहां के सादगी हरय. आगी गुंगवाही ते जान डारबे ताते-तात जेवन पानी के तियारी होवत हावय.भाजी पाला ला कोनो दिन अतरी नइ परय सबो दिन के बिटामिन भाजीच मा पाबे. किसम-किसम के साग कांदा कुसा अउ अनाज के भंडार हावंय.

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एकदम आटोमेटिक हे एहां के नता गोता के चिन्हारी.पांव परत हंव भांजा एला सुनतेच मन सरधा ले झुक जाथे. सबो जात ला संधार के इहां नता ला नापे गेहे.अपने अपन भउजी के नता ला दाई असन मया दुलार करइया जान. तिहार बार मा नाने लेगे के सुन्दर बेवहार हावय. काम बुता माते हे ते नेंग ला अमराय बर जानच हे .फरक नइ खाव य चैत, बैसाख ले लेके बारो महिना ला सरेखे के सियानी इहां देखे सुने बर मिल जाही. कभू नइ भुलाने वाला संस्कार इहां जनम जनम ले चलतेच आवत हे.

फेर आजकल नवा जमाना मा चारो कोती बगरे-बगरे नता गोहरावत हे.सबो दिन एके जगा कहां रहिपाबे,परवार बाढ़िस लइका बाढ़िस अपन घर जिनगी संवारिस. पढ़ई-लिखई के सेती आज देखले खच्चीत आहूं कहइया घलो नइ अमाए पावय. दुनिया बाढ़ गेहे के भुइंया बाढ़त हे मने मन घटावत रा तोला पार नइ मिलय. मन ला मिलाए ला खट-खटउहन बटन ला चपके तहां झन पूछ तुरतेच गोठ बात अउ दरसन लाभ घलो मिल जथे. फेर दुरिहाए मया के कउनो गनती करइया नइ राहय . अपन बिराना के पता घर पहुना ला कोन पूछय,घरौंधिया होके चले आबे तबे नता मा मया झलकथे हवाई जिहाज,पानी जिहाज,मोटर,फटफटी सबो चढ़ैया गांव मा घलो होगें. साल के साल देवरिहा अमाबो जी अउ अपन गांव बर कांही नवा काम सजाबो अइसन सोंच ला आज हमला बढ़ाना चाही. तें कतको बड़ होजा तोला रुपिया पईसा मा कोन तउलही तोला तउले बर मया चाही, दुलार चाही.मामा-मामी अउ नाना-नानी के पियार चाही. दुनिया ला छोटे करइया हो तुंहर जय होवय फेर दया-मया अउ नता-गोता ला छोटे बड़े मा झन बांटव.बने-बने मा सबो बने लागथे. इही हमर सपना के संसार हरे.

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