छत्तीसगढ़ी में पढ़ें - "कोनो बद्दी कर दिन त का होगे, पहली सुन तो ले"

धैर्य से सोचने की बात हर समाज में कही जाती है.
धैर्य से सोचने की बात हर समाज में कही जाती है.

नान - नान बात मा देखले कइसे चढ़ी के चढ़ा हो जथें, कोनो झुकना नइ चाहय. दू पार्टी बने मा टाइम नइ लगय. अपन - अपन ले हांव - हांव एहू कोई जिनगी ए.

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  • Last Updated: November 16, 2020, 7:05 PM IST
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कीमत ला देखबे त कउड़ी के नइये अउ हमला सिखोए बर धरत हे, अइसे कहिके छोटे - बड़े के फरक ला बताने वाला कतको मिल जही. वइसे एक बात तो सोला आना सच हे आजो धरमी चोला मन के सेती ए दुनिया चलत हे. धरमी चोलार नइ होतिन ते दुख , पीरा लइया गरीबी झेलइया मन के माईं - बाप कोन होतिस. संसार के अबादी मा सुखियार कतका हे तेखर गनती करइया मिल जहीं एकक करके गना दिहीं, फेर गरीबी के आंकड़ा ला देखले दिनों - दिन बाढ़तेच जावत हे. काकर सेती कोन कतका बेर मौका ला भंजाइन सबो जानत हन तभो ले किस्मत मा हमर नइये अइसे कहइया के तें का बिगाड़ लेबे.

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नान - नान बात मा देखले कइसे चढ़ी के चढ़ा हो जथें, कोनो झुकना नइ चाहय. दू पार्टी बने मा टाइम नइ लगय. अपन - अपन ले हांव - हांव एहू कोई जिनगी ए. कई पईत लइकामन के सेती सियानमन के मुड़ कान फूटे के नौबत आ जाथे. बीच-बचाव करइया अउ तमासा देखइया सबो रकम के मनखे इहें मिल जाहीं समझदारी अतके मा हाबे के एक झन कहूं झुक जातिस त अइसे हाल नइ होतिस? अइसे कहने वाला, समझाने वाला पछुवाए रहे अउ जगा देख के ठंउका पट ले बीच मा भेंगराजी डारे बर आ जथें. बाताचिती चलतेच हे, चंदरकठवा बरोबर आही ततके मा फेर हांव – हांव. भीड़ सकलाए हे. तेन करा आकप लगा के बात ला झोंकना चाही. कोनो कांही कहि दिस ततके मा नइ हो जाए. सबो के सेती सभे जगा नियाव अपन काम करथे. नियाव देने वाला अउ नियाव लेने वाला कोनो उप्पर ले नइ उतरे हे. हमरे बीच के आवंय. हमरे बीच के सेती दुनो डाहर ओखर दिमाग चलथे घटाना, बढ़ाना कइसे हे, कोन ला कतका डांड बोड़ी करना हे एला सोंचे बर समय चाही. सियानी रद्दा के गोठ बात जानना समझना हे ते समाजिक बइठका मा सकलाना चाही. कइसे समाज गंगा दूध के दूध अउ पानी के पानी करथे जान डारबे.
मानव के विकास मा समाज के अड़बड़ जिम्मेदारी हे. धरती के कोनो कोन्हा मा जा, सबले बड़का र समाजेच होथे बनउका नइ बनिस ततके मा रेंधिया मन के सेती आन के तान हो जथे. एही मेरन नियाव अउ अनियाव मा टक्कर होए ला धर लेथे. पुलिस थाना, कचेरी , जेल ए सब काए हमरे करम के दोस ए. अटेलहा होबे एमा तोला तोर दोस कइसे दिखही. अपन आप ला कोनो अपजस करइया सिध नइ कर सकय तभे तो समाज हा दर्पन के काम करथे. दरपन देखाने वाला ला कहूं ते समझगे ते जान डार तोर बनउकी बन के. अतके जीवन के सार हरे. सबो नियम, धरम , नेंग जोग ला कोन सिरजे हे. जानडार ए सब तोरे सिरजे हरे. अब देखले ए दुनिया मा कतको देश, कतको भासा, रहन - र सहन , खाना - पीना , आदत - बेवहार ला सबो जाने के कोसिस करिन. कोसिस करेच के सेती एदे दुनिया एके जगा सकलागे हे तइसे लागथे.

आजकल एक ठन ओखी निकाले के उदिम करइया मन कतका नाच नचावत हे. कोनो ले छुपाव , दुराव करे के बात नोहय तभो ले आदमी सुनतेच तमतमा जाथे. ए तमतमाई ला कतका बिगाड़ कर दिही तेखर तोला अजम नइये. अजम करइया होते त तमतमाए के पहिली सोंचते. सोच - विचार करके अपन सेती भलाई के रद्दा चिन्हारी करना जरूरी हे. तोला लुहा दिहीं अउ अपन दुरिया ले मजा लिही. लुहाने वाला तोर आगूचमा रइही , तें नइ जान सकस. गवाही , साखी बने के जगा बनाही अउ चटके - चटके असन रइही. ए जुग मा जब हमन पूरा ब्रह्मांड के चक्कर लगा डरे हन अउ भगवान के रचे संसार ला देखत हन. रचना रचने वाला ला कोनो देखे नइये अउ न देख सकंय. अभी तो ओखर रचना ला देख डरे हावन कहिके इतराय के टाइम नइ आए. अभी ते जानेच कतका हस. तोर जानकारी मा ओखर एक ठन कोर हा नइ आए हे. वो अनंत हे तेखरे से देखतेच रहिबे सब हवा हो जथे , तहाने फेर जगा पाके बोमियाए ला धर लेथे. ते भुलाए रा अइसे ओखर कहना हे. कामा भुलाए रबे कहिकेच तोला संसारी बनाए हे.
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