छत्तीसगढ़िया कला, संस्कृति, पुरातत्व, इको-पर्यटन अउ सी-मार्ट बर प्रावधान

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बजट पेश करत किहिस- कोनो समाज म ओखर समृद्धि के चिन्हारी वुहाँ के कला अउ संस्कृति ले करे जथे. इही ल धियान म रख के साहित्य अउ कला के डिजिटलाइजेशन के फैसला करे हन.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 9, 2021, 12:33 PM IST
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छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह विधानसभा  म एक मार्च 2021 के अपन तीसर कार्यकाल के 97 हजार 106 करोड़ के व्यवस्था करे हे. छत्तीसगढ़ के विकास बर लगभग प्रमुख सोच (गढ़बो नवा छत्तीसगढ़) के तहत किसान के खुशहाली, शिक्षा, उद्योग, कला, जेम्स अउ ज्वेलरी पार्क निर्माण, सी-मार्ट संस्कृति, पुरातत्व संरक्षण, इको पर्यटन-विकास, फूल के खेती, आदि बिन्दु के संगे संग गरवा, BHUROOAA घुरूवा, नरवा, बारी छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी, गोधन न्याय योजना, सुराजी ग्राम-योजना, चिराग, गोठान,  अउ अन्य बिन्दु ल समेटे गे हे. छत्तीसगढ़िया कला एवं संस्कृति उपर धियान हे. कौशल विकास, छत्तीसगढ़ी शिल्प-विकास आदि के समावेश हे. ग्राम-उत्थान ले वोट सुरक्षित करे के सुनियोजित ढंग एमा दिखत हे.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल किहिस....

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बजट पेश करत किहिस- कोनो समाज म ओखर समृद्धि के चिन्हारी वुहाँ के कला अउ संस्कृति ले करे जथे. देखे जथे कि ओखर संस्कृति हर कतेक जुन्ना हे, इही ल धियान म रख के हमन पुरातत्व के बुता ल बढ़ाय बर अउ राज्य के साहित्य अउ कला के डिजिटलाइजेशन के फैसला करे हन.
इको-पर्यटन क्षेत्र

प्रदेश के पुरातात्विक धरोहर मन ल चिन्हारी मिलही. मुख्यमंत्रीजी के धियान बेमेतरा जिला के नवागढ़ विकास खंड के परसदा अउ गिधवा गाँव डाहर गिस. इहाँ पक्षी के संरक्षण अउ ओखर संख्या ल बढ़ाय बर परसदा अउ गिधवा गाँव के आसपास के क्षेत्र ल इको-पर्यटन क्षेत्र के रूप म विकसित करे के प्रावधान रखे गिस. एखर ले पक्षी मन के विलुप्त होवत प्रजाति के सुरक्षा होही. उनकर बसेरा करे के लइक प्राकृतिक वातावरण संरक्षित हो पाही. ये क्षेत्र म देशी अउ विदेशी प्रजाति के पक्षी विहार करथें. छत्तीसगढ़ म जैव विविधता के अब सुरक्षा हो पाही. विदेशी पक्षी इहाँ पांच महीना गुजारथें. प्रसन्नता के बात हे के ‘हमर चिरई-हमर चिन्हारी पक्षी महोत्सव म (31 जनवरी से 02 फरवरी 2021) खुद मुख्यमंत्री जी मुख्य अतिथि के रूप म उपस्थित रिहिन . उन घोषणा करे रिहिन के गिधवा-परसदा पक्षी विहार ल अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन-स्थल के रूप म विकसित करे जही, उही संकल्प ल साकार करे बर बजट म प्रावधान करे गे हे.

श्रीराम वन गमन परिपथ

छत्तीसगढ़ सरकार के ‘श्रीराम वन गमन परिपथ’ निर्माण एक ठन प्रमुख योजना हे. एखर बर सरकार ह 30 करोड़ रूपिया के प्रावधान करे हे. ग्यारह जगा के चिन्हारी करे गे हे. बस्तर ल लेके सरगुजा तक अनेक दर्शनीय जगह हे. देशी अउ विदेशी पर्यटक मन बर इहाँ विशेष आकर्षण हे. प्रकृति के अदभूत  सुंदरता मनमोहक हे. आदिवासी जनजीवन अउ उनकर संस्कृति के प्रति देशी-विदेशी पर्यटक के मन म जिज्ञासा अउ आकर्षण सरकार के प्रयास से अउ बाढ़ही. कुल 35 जनजातीय मन के जीवन शैली ले जुड़े हैण्ड-बुक्स के प्रकाशन करे जही.  कोरबा जिला के हसदेव बांगो जलाशय सतरेगा ल विश्व स्तरीय जरूरी सुविधा से लैस करे जही.



पुरातत्व संचालनालय के गठन

छत्तीसगढ़ म पुरातत्व विभाग के संचालनालय के गठन करे जात हे. लघु फिल्म डाक्यूमेंट्री लोक-कला, नृत्य के संरक्षन करे बर दु करोड़ रूपिया अउ नवा रायपुर म शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक अउ संग्रहालय बनाय बर, ओखर विकास करे बर पांच करोड़ रूपिया के प्रावधान करे गे हे. भोपाल के भारत भवन कस नवा रायपुर म भारत भवन बना के छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक परिक्षेत्र तैयार करे जही. प्रदेश के  सबे संभागीय मुख्यालय म डेढ़ करोड़ के लागत ले आदर्श पुनर्वास केंद्र बनाय जही जिहां सीनियर सीटिजन मन बर हेल्प डेस्क के व्यवस्था होही.

पुरातत्व-धरोहर

छत्तीसगढ़ संस्कृति अउ विभाग अपन ऐतिहासिक दस्तावेज ल बीस बरस हो जाय के बाद घलो म.प्र. ले लाने नइ रिहिस. संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य के अनुसार म.प्र. अउ छ.ग. के बंटवारा के बखत ले छूटे सन 1919 से 1947 तक के एतिहासिक अभिलेख के चिन्हारी करके भोपाल ले रायपुर ले जात हे. वर्तमान म करीब 50 हजार अभिलेख के डिजिटल प्रति भोपाल ले 31 मार्च तक एकट्ठा(एकत्रित) करे जही.

संस्कृति विभाग ह अपन विभाग के दु झन अधिकारी मन ल भोपाल के अभिलेखागार म भेजे हे. उन वुहाँ दु महीना ले छ्त्तीसगढ़ से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेख के चिन्हारी करके डिजिटल रूप म एकट्ठा करत हें. प्राप्त जानकारी के अनुसार आजादी के पहिली अउ आजादी तक के छ्त्तीसगढ़ से जुड़े अंग्रेज सरकार, आजादी के लड़ई, राजनीतिक, सामाजिक बदलाव आदि ले जुड़े घटना लाखों के सख्या म दस्तावेज के रूप म एकट्ठा हे. ये मन ल जल्दी से जल्दी हार्ड कापी अउ डिजिटल कापी के रूप म लान के रायपुर के अभिलेखागार म एकट्ठा करही. पचास हजार दस्तावेज के डिजिटलीकरन करे जही. ये कार्य जारी हे. एला महंत घासीदास परिसर म स्थित संस्कृति विभाग के अभिलेखागार म धरोहर के रूप म एकट्ठा करे जही. इहाँ लोग एला देख सकहीं. जब अभिलेखागार बन जही तब ये धरोहर ल वुहाँ रखे जही.

सी-मार्ट म छत्तीसगढ़िया ब्रांड

छत्तीसगढ़ के खितिहर पैदावारी (उत्पाद) म ढेंकी के कूटे चाउर (चावल) घानी ले निकले खाय के तेल (खाद्य तेल) कोदो , कुटकी, मक्का से के सबे दार वाले फसल(दलहन) जंगल के पैदावारी(उपज) जइसे अमली, महुआ, हर्रा, बहेरा, आँवरा, मधरस(शहद) अउ ओखर ले बने उत्पाद ,फूल झाडू ,टेराकोटा, चर्म-शिल्प (चमड़े की कारीगरी, बांस-शिल्प, बेलमेटल, टेरकोटा ,लौह-शिल्प, कोसा सिल्क अउ छत्तीसगढ़ी व्यंजन एके छत के नीचे प्रदेश अउ प्रदेश ले बाहिर जोन ह ख़ास छत्तीसगढ़ी चिन्हारी के रूप म (ब्रांड)सी-मार्ट म उपलब्ध करे जही. (सामग्री मूलत: कला, संस्कृति, पुरातत्व, इको-पर्यटन, सी-मार्ट उपर केन्द्रित).  (डिसक्लेमर - लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं और ये उनके अपने विचार हैं.) 
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