छत्तीसगढ़ी व्यंग्य-कोरोना जुग म तोता होगे बइदराज

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कोविशील्ड/को-वैक्सीन देशी टीका लगाओ . कोरोना भगाओ, कोरोना भगाओ. ये तोता रटंत प्रेरना बनत हे. टीकाकरन महाभियान चलत हे. तोता के टीका- भजन सुन खबरीलाल टीकाकरण केंद्र गिस. टीका लगा के अइस. ओखर चेहरा खिलगे.

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कोरोना-जुग म बइदराज बाढ़गे हें. घर के तोता घलो बइदराजी करत हे. मनखे मन ल सीख देवत हे कोरोना के ‘टीका लगाओ, टीका लगाओ’ कोरोना भगाओ. कोविशील्ड/को-वैक्सीन देशी टीका लगाओ . कोरोना भगाओ, कोरोना भगाओ. ये तोता रटंत प्रेरना बनत हे. टीकाकरन महाभियान चलत हे. तोता के टीका भजन सुन खबरीलाल टीकाकरण केंद्र गिस. टीका लगा के अइस. ओखर चेहरा खिलगे. तोता चार झन सियान जवान मन ल देख के फेर जनता जनार्दन ल आवाज दिस -‘टीका लगाओ . कोरोना भगाओ, कोरोना भगाओ’. खबरीलाल तोता के देशभक्ति से खुश होइस. झट तोता ल लाल मिर्चा खवइस. फेर सोचे लागिस- का समे आगे हे, मनखे मन ल तोता समझावत हे. सियान-जवान मन तोता के आवाज ल सुन के कंझागें. उन खबरीलाल के तोता ल घूर-घूर के देखिन. जानो-मानो चील अब तब तोता ल झपट लेही. खैर, तोता ल दूसर के चिंता रिहिस. फेर शोर मचइस ‘टीका लगाओ’ कोरोना भगाओ. अब ओखर गोठ के अतेक असर परिस के बहुत झन मन कोरोना टीका लगा डरिन टीकाकरन के महाअभियान म भारत दुनिया म पहला स्थान म आगे हे.

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टीकाकरन के महाअभियान
कोरोना अभी घलो डरूवावत हे. एक लहर, दुसर लहर चढीस-उतरिस. अब कथें तीसर घलो आही. गौंटिया किहिस- मरना हे रे. जीना हे त कोरोना के टीका लगाव. ककरो बहकई म झन आव. बुद्धूराम के आवाज से पूरा गाँव जाग गे. खबरीलाल जागे इंसान आय, खबर लगिस टीकाकरन के महाअभियान शुरू होगे हे. शहर जागिस, गाँव जागिस अउ व्यापक रूप से टीकाकरन शुरू होइस. खबरीलाल के कान झन्नाइस. बैरी गोठ छोड़ो. अफवाह छोड़ो. तीसर लहर से खुद ल बचाव, परिवार ल बचाव. गाँव-गाँव अउ सहर-शहर बाचही त देश महामारी से जीतही. कहूं टीका नइ लगाएव त फेर तीसर लाहरा म कोरोना सपड़ा सकत हे.

नागरिक कर्तव्य के सुध
खबरीलाल जनता के पीठ पाछू परान लेवइया मन के चारों खुंट झोले-झोल देखिस. मास्क लगाना, दु गज दूरी. घेरी बेरी साबुन से हाथ धोना/सेनेटाइजर के परयोग करना हमर नागरिक कर्तव्य हे. बरपेली पेलइया मन सब जगा मिलथें. लालबुझक्कड़ अइसन मन ल नमूना मनखे कहिथे. सरकार ल कोरोना भगाय बर जेन उपाय करना चाही वो करत हे. नागरिक कर्तव्य के पालन हमन ल करना चाहिए. लालबुझक्कड़ सुवारथी मन के खबर लेवत हे. मितान दयालुराम ल किहिस- कोरोना के आपदा काल म सुवारथी अउ राजगद्दी प्रिय मन अपन सुवार्थ सिद्धी के उदीम म लगे रिहिन. रोज-रोज छटके-छटके गोठियाऍन. उत्तर ल दक्षिन, दक्षिन ल उत्तर बतांय. कोरोना काल बनके जेखर उपर टूटिस तेंन परिवार अपन छाती म पहाड़ कस गरू दुःख भोगत हे. आपदा म घलो जेन राजनीति करके अपन जेखर चाकरी करिन तेंन ल भले सुखी करिन फेर जनता जागरूक हे. जनता सूचना क्रान्ति से जुड़े हें. अब झूठ के कथा-कहिनी ले मन भरमाना कठिन हे.

मानवता के रक्षक
कोरोना किटकिटा के पोटार पोटारथे. समधी मन बरोबर. घेरी-बेरी भेंट करथे. डिग्री अउ बिना डिग्री वाले असंख्य डाक्टर मन हर गाँव, हर सहर के अली-गली म अपन-अपन कोरोना सूत्र लगइन. कतको झन के परान बाचिस अउ कतको झन परान छोड़ दिन. कोरोना कतको झन ल मालामाल करिस. कतको धंधाखोर मन आपदा ल अवसर म बदलिंन. खूब कमाइंन. कतको झन ल कंगाल बनगें. सरकार के अर्थव्यवस्था डोलगे. कोरोना दुनिया ल रोवा दिस. सुंदर-सुंदर मुखड़ा बेनकाब होइस. दयालुराम किहिस-भगवान, अइसना दुःख कोनो ल झन देखाय. इतिहास लिखइया मन आँसू से इतिहास लिखहिं एखरे सेती सबे पात्र मन टीका लगवाएं. दुसर मन ल घलो प्रेरित करें. कोरा गाल बजइय्या मन अपन गाल बजावत रर्हिगें.      (डिसक्लेमर - लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

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