छत्तीसगढ़ी में व्यंग पढ़ें-  हंसा थे जो उड़ गए,अब कागा भए दीवान

ठलहाराम किहिस-‘व्यवस्था मोटाय हे के दुबराय समय बताही.अब सरकारी अउ निजी अस्पताल उपर जनता भरोसा जरूरी हे? आधा मरत आधा जियत मरीज आखिर का करे? सरकारजी बर कहे जात हे के  कुंआ के मेचका कुंआ के हाल जानही. गरीबदास के चिंता कोरोना छोड़ के दीगर मरीज मन बर घलो दउडीस.

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  • Last Updated: September 24, 2020, 12:21 AM IST
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त्तीसगढ़ के एक गाँव म संझा के बेरा का होइस? पीपर रूख के उपर कोरी दु कोरी कऊँआ कांव कांव करत राहंय मानो उनकर पंचइती जुरे होय. वुही पीपर रूख तरी खबरीलाल, गरीबदास, लालबुझक्कड ,गोबरदास अउ ठलहाराम पाँचों मितान आ के दुरिहा-दुरिहा म बैठिन. सब के मुहूँ म मास्क लगे हे.कोनो खांसत-खखारत त नइ हे एक दुसर के सेहत के खबर लिन.सार बात ये होइस के सब स्वस्थ हें. खबरीलाल शुरूच म बोलिस-सब खबर आ के कोरोना खबर के मुख म समा जथे.

पूछताछ होथे कोरोना के का हालचाल हे? सरकार का करत हे? अइसने पश्न. गरीबदास किहिस –‘हंसा थे जो उड़ गए कागा भए दीवान.’ गोबरदास पूछिस-‘एखर का मतलब?’ खबरीलाल किहिस – कंउआ मन के बीच म हंस के    का काम? वो बिचारा त खुदे उड़ा जथे. बने रद्दा बतइया मन के इहाँ इही हाल हे.’ ये सुन के  लालबुझक्कड हाँस  परिस. फेर किहिस-‘पूरा छत्तीसगढ़ कोरोना ले डर्राय हे.सरकार थथरमरथर हे.अभी त लाकडाउन बड़े इलाज दिखत हे. कतको बेसमझ जनता अभी घलो अपन धुन म हे.

लात के देवता बात ल नइ मानें. बाँध फूटे के बाद पार बांधे के जुगत होवत हे.’ ठलहाराम किहिस- ‘ये लाकडाउन जियत बाघ के मेंछा उखाने कस हे. शासन-प्रशासन सुते–सुते जागत रिहिन. नींद त अपने आंखी म आथे न.’ खबरीलाल किहिस-‘देखो कोविड-19 भगाय बर जइसे सहयोग जनता के मिलना चाहिए वइसे सहयोग कहाँ मिलत हे? मास्क आधा खुल्ला, आधा लगे रहिथे. सामाजिक दूरी ल अपन ले दूरिहा रखथें. बार बार साबुन ले हाथ कोन धोथे? गदहा के मुड़ म सिंग नइ जामे.’



कोरोना ले जीतना हे त सब के संकलप होना चाही. सामाजिक संस्था अब आगू आवत हे. विपक्ष कथे कोरोना संक्रमण होय ले सरकार के गोड़ हाथ फुलगे. ठलहाराम किहिस-‘व्यवस्था मोटाय हे के दुबराय समय बताही.अब सरकारी अउ निजी अस्पताल उपर जनता के भरोसा जरूरी हे? आधा मरत आधा जियत मरीज आखिर का करे? सरकारजी बर कहे जात हे के  कुंआ के मेचका कुंआ के हाल जानही. गरीबदास के चिंता कोरोना छोड़ के दीगर मरीज मन बर घलो दउडीस.
ओखर कहना रिहिस –‘ गैरकोरोना मरीज डाहर अपन आँखी कोन घुमाय? गोबरदास किहिस - ‘उनकर स्वास्थ्य पूरा-पूरा भगवान भरोसा हे.पूरा ताकत कोरोना बर समर्पित होगे.कोरोना समाजवादी हे, बिना भेदभाव के हमला बोलथे. बच सको तो बचो. जब कोरोना-मरीज मन के सुनई करइया कमती हें त गैरकोरोना मरीज के त मरे बिहान हे !! अस्पताल पूछथे कोरोना जांच कराये हस का? हाँ-नहीं के बीच ओखर हालत गंभीर होना आम –बात हे. त महामारी के आपदा-काल महा-काल होगे. मरइया-बचइया के बीच आँकड़ा-गेम बुझव्वल चलत हे.’

खबरीलाल सब के सुख दुःख के खबर रखथे.वो किहिस-‘स्कूल के गेट म कोरोना-तारा जड़ाय छै महीना होगे. लइका मन स्कूल जाय बर दिन गिनत हे. घरे म रेहे-रहे बिफड़त हें. छोटे लइका का करें?आँन-लाइन एजुकेशन,आफ लाइन एजुकेशन होगे.पोंगा एजुकेशन अखबार म सुनाथे. मोहल्ला-एजुकेशन ल घलो कोरोना के नजर लग गे. आन-लाइन एजुकेशन के प्रतिशत लइका पावत हें? ये ह एजुकेशनल बताशा आय. स्कूल के गेट खुलिस तहां ले कोरोना झपइस जान.

फेर नवा हाहाकार,का करे सरकार? स्वास्थ्य विभाग दिन-रात कोरोना-मरीज के सेवा करे म भिड़े हें.पुलिस वाले मन बर दिन अउ रात एक हे. सफाई कर्मचारी मन के वुही हाल हे. इनकर सेवा ल कोन भुलाही.जे महामारी म घलो सेवा म भिड़े हें. इन ल तनखा सहित अलग प्रोत्साहन राशि देना चाही.’ गोबरदास किहिस –‘छत्तीसगढ़ म सरकारी कर्मचारी मन के इंक्रीमेंट कोरोना के भेंट चढ़गे. नेताजी मन खुश हें. वेतन भत्ता डबल होगे. अब किसान मन ल केंद्र सरकार साध डरिस.

उन अपन खेती के उत्पाद बेचे बर मन के मालिक होगें.जब मन चाहे जिहाँ चाहें अपन उत्पाद बेच सकत हें. मंडी घलो खुले रइही.बिल पास होगे. विपक्ष के वोट गडबडावत हे. लालबुझक्कड के धियान रेल डाहर गिस – आपात सेवा वाले रेल-सेवा अटकत-भटकत हे. गिने–चुने रेल नियम से चलत हे. कोरोना रेल के चक्का जाम कर दे हे. गोबरदास रेल के बंद होय के दुःख ले दुखी लगिस.वो किहिस –‘लाखों करोड़ों मन ल ये दुष्ट कोरोना बेरोजगार कर दिस. हमर नेता मन ल रोजगार शब्द ले परहेज होगे.

बात बात म बड़े बड़े बात करइया मन के कंठ रोजगार शब्द सुन के बइठ जथे. खबरीलाल चेतइस घरे म रेहे म खुद के परिवार के अउ देश के भला हे. अभी इही देश सेवा हे.सब मुड़ी हलावत अपन –अपन घर लहुटिन. मुंधियार होय ले जेवन के बेरा होगे.
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