Home /News /chhattisgarhi /

Bhojpuri: अलकरहा गोठ ल तो देखव ये नेता मन के!

Bhojpuri: अलकरहा गोठ ल तो देखव ये नेता मन के!

.

.

चुनाव के मौसम अभी आय तो नइहे फेर दिन लकठियावत जात हे, तब सबो पारटी वाले मन मुद्दा के खोज मं निकल परे हे. कोनो जोतिसी मन कहि दीन- राम के सरन मं जाव, कोनो कहि दीन धरमांतरन के मुद्दा उछालौ, तब कोनो किहिन महंगाई, किसान, मजदूर अउ आदिवासी-हरिजन के सरन मं जाके ''रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम के भजन गावत फिरौ. जरूर लाभ होही.

अधिक पढ़ें ...

अब सब दल के नेता, कार्यकर्ता जेला जौंन जंचिस ओला पकड़ के निकलगे हें. अउ जइसने पावत हे तइसने मुंह फरकावत हे. अब जौंन पेशेवर खिलाड़ी हे, अखाड़ा के दांव-पेंच कइसे का होथे, चौसर, शतरंज मं बाजी कइसे खेले जाथे, तइसने शकुनि कस करतब खेले ले धर ले हें. राजनीति मं का नियाव-अनियावे, मान-मरियादा, इज्जत शांति, परेम. इहां तो बस एके बात होथे विजय, जीत. कहिथे-परेम अउ युद्ध मं सब जायज होथे. फेर सब जानथे-सत्यमेव जयते. इकरे ऊपर देखिन- नेता मन के आनी-बानी के गोठ अउ बात.

देखत रहेंव, भकाड़ू, कइसे चले बानी असन, आन-तान गोठियाय-बताय ले धर ले रिहिसे. कभू ककरो संग सोझ बाते नइ करत रिहिसे. एक दिन पचकउड़ ओला पूछथे- कइसे बेटा, मैं सुने हौं रे, तोर दिल-दिमाग आजकल सात आसमान ले ओ-पार तउरत रहिथे, का बातहे?

-‘तोला अइसे मोर बारे मं गलत जानकारी कोन दीस हे, लगथे का के मोर दिल-दिमाग ठिकाना मं नइहे? बने तो हौं, सब संग बने गोठियावत, बतावत हौं. भकाड़ू के बात ला सुनके पचकउड़ कहिथे- नहीं बेटा, कुछ तोहे. जब पानी मं कोनो पथरा फेंकथे ना, तभे लहरा उठथे, अइसने अपने-अपन नइ उठ जाय.

– ‘तैं जानना अउ कहना का चाहत हस कका, तौंन ला साफ-साफ फोर के बता ना, गोल-गोल घुमा के झन पूछ, तब ना.

पचकउड़ कहिथे- देख बेटा, बइद न रोगी-मरीज के नाड़ी ला टमड़ के ओकररोग ला जान जथे, कतको बइद मस्तक ला देख के, टमड़ के जान जथे, रोग ला अउ उपचार के तरीका दवई-दारू घला बता देथे. संझा-बिहनिया, सुते-उठे के बेरा, कुनकुना पानी मं लेना, वइसने का खाना, पीना हे, सब बता देथे.

कका के बात ला सुनके भकाड़ू सिर पीट लेथे अउ कंझावत पूछथे- ‘तब तैं कोन बइद हस कका, अउ मोला का रोग धर ले हे तौंन ला बता? समे रहिते इलाज, दवा-पानी कर लुहूं तब बने रइंही नहिते रोग कहूं बढ़ जही, तब लेना के देना पर जही. जादा खरचा में उतर जाहूं.

रोग नहीं, तोला महारोग धर लेहे बेटा, अउ ओ रोग हे राजनीति के भूत. कका के ये बात ल सुनके भकाड़ू खिलखिला के हांस भरथे अउ कहिथे- राजनीति अउ रोग. का कहिथस कका, राजनीति कहूं रोग हे? एकर बिगन तो जीवन आज वइसने अधूरा हे जइसे नर बिगन नारी. घर-घर मं राजनीति, गांव, शहर, गली से लेके इसकूल, अस्पताल, खेत-खलिहान, कारखाना ऑफिस, सबो जगह राजनीति. कोन जघा अइसे खाली हे जिहां राजनीति नइ होही तौंन ला बतातेस.

भकाड़ू के बात ला सुनके पचकउड़ कहिथे- बेटा, बात तो हैं अइसे करत हे जइसे बड़े सुजानिक हस. तोरे सही भक्त प्रहलाद हा घला अपन बाप हिरण्य कश्यप ला जब ओहर पूछे रिहिस के बता तोर भगवान कहां-कहां हे, तब ओहर बताय रिहिस के अइसे कोनों जघा खाली नइहे पिताजी, जिहां भगवान नइ होय. अपन बेटा के जवाब ला सुनके हिरण्य कश्यप तिलमिलागे अउ गुस्सा मं भरके पूछथे- अच्छा ये बता, ये खंभा मं हे तोर भगवान? हां पिताजी, ये खंभा मं घला हे भगवान. ओतके बेर म्यान ले तलवार निकालके हिरण्य कश्यप खंभा मं तलवार ला जोर से टकराथे. तब भगवान नरसिंह परगट हो जथे.

भकाड़ू कहिथे- सही बात तो आय कका, राजनीति, आज सब ले बड़े भगवान हे. सब इसी चाहत हे के कइसे अउ कतेक जल्दी हो सकय, पद अउ पइसा मिल जाय. अउ ओकर मिले के एके रसदा हे राजनीति. ये राजनीति मं कोनो ककरो चिनहारी नइ करय, कोन मोर गोसाइसन हे, भउजी हे, दाई, ददा, कका-काकी, ममा-मामी, बाप-बेटा कोनो ला नइ देखे. एके सीट मं एके जघा आपस मं टकराव मं कोनों संकोच नइ करय. मजे के बात ये अउ के एक-दूसर के पोल ला खोल देथे, इज्जत ला एक मिनट मं पानी मं मिला देथे. अइसने हे ये राजनीति, काबर सिरिफ एक पद अउ पइसा खातिर.

उही ला तो देखते हौं रे भकाड़ू, कइसने जब ले चुनाव लकठियाय ले धर ले हे, कइसे तुंहर मन के मुंह फरके ले धर ले हे. जइसने परवा हो तइसने आन-तान बोले ले धर ले हौं. ना पार्टी के रीति-नीति, नियम, चाल, चरित्र अउ गरिमा के खियाल करत हौ न अपन खुद के अउ पारटी के मान-मरियादा ला देखत हौ. अइसे मुंह फरकावत हौ जइसे माईलोगिन मन झगरा करत एक-दूसर के गुप्त पो ला खोल देथे. अइसे लगथे जइसे कुरुक्षेत्र मं महाभारत शुरू होगे हे.

भकाड़ू पूछथे- अइसे का देख सुन अउ पढ़ डरे कका, हमर नेता मन के बारे मं ते मोला उठेना देवत हस?
पचकउड़ बताथे- अरे तोरे पारटी के सवाल नइहे, सबो पारटी वाले मन के एके हाल हे. फेर तोर पारटी वाले मन तो हदे करते हे. अइसे लगथे के उकरे मन के हाथ मं दही जमाय हे, बाकी पार्टी वाले मन अइसे हवा मं तीर छोड़थे. भकाड़ू पूछथे- हमर पारटी के कोन नेता अइसे का कहि दिस कका ते तोला शूल पीरा उठगे, कोनो एकाध झन के नांव फोर के तो बता.

अरे काकर नांव ला बताबे, एक झन नइ बेटा, तोर पारटी मं एक ले बढ़ के एक शूरवीर, महावीर, अउ बहादुर हे. अइसे तीर, गदा, ब्रम्हास्त्र छोड़थे के शत्रु के परान नइ बाचय. भोगाय हे ना, दले-मले हे पन्दरह साल ले माल-मलिंदा खा-खा के. इतरावत हे,मस्तियावत हे.

पचकउड़ बताथे- अरे ओ दिन जगदलपुर के चिंतन शिविर मं तुंहर पारटी के एक झन महारानी आय रिहिसे, कतेक सुग्घर बात किहिस, शिविर के समापन बेरा अउ पत्रकार वार्ता मं विरोधी पारटी थूक चटइया हे. अइसने पेंचदार बात महादेवी द्रौपदी घला केहे रिहिस- अंधरा के बेटा मन अंधरा होथे.

ओ बात आगू चलके भूचाल बनगे. महाभारत के रूप ले लिस. अइसने पता नहीं ये देवी के थूक चाटे के बात का रूप लिहिी तेला तो समे बताही. वइसे थूके चाटे के मरम तो ओहर बने ढंग ले जानत होही, जउन अनुभवी होथे तौंने हा तो हथियार चला सकत हे. छोटकीन छोकरी मन का जानही, थूक चांटे के मरम ला. भगवान झन करय, तुंहर ओ देवी के द्रौपदी कस हाल होय.

अउ बतावौं बेटा भकाड़ू- तुंहर नेता मन के कइसे कइसे मुंह फरकत हे. एक झन काहत हे, अभी तो आवेदन देवत हन. देखबो बाद मं ये आवेदन के कुछु सुनवई होथे धन नहीं. कोन जनी कहूं सुनवाई नइ होइस तब एमन तो आगी झन लगा दैं.

दूसर नेता कहत हे भकाड़ू- कुछ नहीं, अब ये सरकार ला दे दनादन, लगथे इकरे हाथ मं दही जमाय हे, बड़ा आय हे शूरवीर. जौंन सरकार ला आम जनता, आदिवासी, किसान मजदूर अउ हरिजन मन चुन के बनाय हे तेला देख के एकर मन के आंखी छटपटावत हें. एकर मन के काम नइ होवत हे, मतलब नइ सधत हे तब धमकी-चमकी देवत हे. दे दनादन.., दे दनादन काहत हे.

अउ सुन बेटा भकाड़ू- एकर मन के कप्तान हे, पन्दरह साल के जोगी परसादे अउ नौकरशाह के भरोसा सरकार चलिस हे. तौंन का काहत हे, जनता के नइ सुनही, नइ ओकर मन के काम करही, तब ये सरकार के ईंट ले ईंट बजा देवो. अतेक बड़े धमकी, ये धमकी देवइया कोन हे, कतेक के चाउंर घोटाला करे हे, आदिवासी मन के जमीन ला झटक ले रिहिन, नदिया, नरवा, जलाशय, खदान अउ पहाड़ ला सर्वस बेच देवइया, ये सब ला जनता, जानत हे, भुला नइ जाय, अतेक जल्दी जेकर घर लुटे हे,जले हे, बरबाद होय हे, अउ छत्तीसगढ़…ये नकली छत्तीसगिढय़ा मन ला नइ भुला सकयं. अब जनता के आड़ लेके सरकार ला धमकावत हे के उंकर नइ सुनही तब ईंट ले ईंट बजा देबो. कोनो धमकी -चमकी देय ले काम नइ बनय. होगे जतका लुटना हे, लूट डरेव, घर भरना हे घर ला लबालब कर डरेव, जतका खायेव हौ, लूटे हौ ओ सब ला अउ उछरा के रइहीं छत्तीसगढिय़ा. सुने हौं नहीं- छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा.

(परमानंद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Chhattisgarh news, Chhattisgarhi Articles, Chhattisgarhi News

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर