छत्तीसगढ़ी में पढ़ें - आँसो - पऊर - परिहार तीनों सदादिन रइहीं

.

.

धरती के कोख मा सिरजनहार हा सबो रतन ला जतन के राखे हावय. जतनइया के जतन ला जानना हे ते अपन स्वांसा के राहत ले संसारी बनके जीव के रक्षा मा लगे राह.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 5, 2021, 12:46 PM IST
  • Share this:
केहे गेहे तें कतको कांही करले फेर तोला काल के गति ला जान सुन के सधे अउ साधे ला परही. एकझन बैठांगूर चोला के दुःख अउ सुख ला सरेखने वाला कोनो नइ मिलय. समय अपन काम मा लगे हे ओला आजतक कोनो सुरतात नइ देखे हें तभे तो समे परे मा काम आवत ले खटावत रइथे. जीव हा जांगर ला धरके पैदा होथे. फेर ए मिरतु लोक मा पोट - पोट करइया के कमी नइहे काबर के वोकर सोंच मा ठल्हा रहिके जीना घलो एक ठन बुता होगे हे. अइसे नइ होना चाही .

आज हा आजेच मा पहावत ले चलही
कोनो नइ जानिन कहिके मनसा पाप ला पोंसइया कतको झन होंहीं फेर कोन जानी कोन हरय न कोन. धरे संइते के दिन मा घलाव चेतभुलहा मालिक असन जीयत हावे. एके दिन मा काय हो जही कोन जनी अइसे कहिके मसमोटिहा मन पेले ढपेले असन करे ला धर लेथें. पाप अउ पुन्य ला कोनो संघारे नइ सकिन तभो आजकल पुन्य दान करइया के गनती कोन करय. कलेचुप दान पुन करइया घलो आगे हांवय. अइसन बड़भागी कोन होही सोंच के बात होगे. बांटा परके लाखा डरगे ए संसारी जीव जांगर मा. तोर मेरन आज ले वोतको नइये काबर के अपन सोंच नइ बनाए सके. जेन सावचेत होके अपन सोंच ला बनाके राखथे तेने ला सबो झन सहराथें. तोला सहराए के लाइक काम बुता करत अघाना चाही. तंय काली के चिंता छोड़ आजेच हा तोर बर सबो हरय.

जांगर खिरगे तहांले भइगे होगे अइसे नोहय
रतन के जतन करइया कोने. कोने तेला सबो जुरमिल के जतन करे के उदिम मा लागे हांवय. ये हमर पुरखा के सीख हरय. गियानिक मन घलाव जान डारथें नानमुन कहानी किस्सा मा घलो समाज ला कुछु न कुछु देहे जा सकत हे. कमिया के अलाली मा लालच ला समोखे ततके मा ओकर जांगर चले ला धर लेथे अउ समय के मान ओला मिलथे. धरती के कोख मा सिरजनहार हा सबो रतन ला जतन के राखे हावय. जतनइया के जतन ला जानना हे ते अपन स्वांसा के राहत ले संसारी बनके जीव के रक्षा मा लगे राह. जबले हाथ गोड़ चलत हे तबले तो चलतेच जाना हे. एक दिन अइसे घलो आही तेला तें पाछू मुड़ के देखबे त ओखर ताव घला तोला मिलही. सरीर ताय चलत भरके साथी नइते परे राह अघाती. आज काल अउ परोदिन के सपना तोर संसार हरे. बस करम करे जा.



करसा बोहे कोनो मेर अपटबे झन
आंखी के राहत ले दिन अउ रात तोर पहरा मा रईही. आंखी एकठन आसरा हरय. कतको तपस्वीमन आंखी मूंद के तपस्या करिन अउ अपन मनके आंखी में देखिन. तोर मनके आंखी हरय सत करम. सत करम करइया ला कोनो मेरन दुख संग भेंट पयलगी करत नइ पाए जाए. दुख हा हमर करम गति के सेती तीर मा आथे. ईश्वर सबो ला बरजे हे फेर ओखर सुनय कोन. जेन सुनिस तेन तरगे अइसे समझ मा घलो आ जथे फेर काबर भोगे ते जान.

सबो जनम के सार छिपे हे मन मा
मने मन मा ,ते मने मन गोठियाले. गोठियाले अउ पतियाले काबर के तोर मन भितरी तिहिंच रहिबे. कोनो मेरन रहिबे तोला पदोवत मिलही. थीरबांह नइ पावे दउड़तेच - भागतेच पाबे. पल्ला दउड़हूं कहिके सोंचे तहां गे. दउड़त ले तोर अगोरा मा कोनो नइ राहंय. अतका तें जान ले. पीरा अउ मया के सागर ला मुड़पुलुस नापबे तभो नइ नपावय. मन मा थाम के राखना हे त सत्कर्म मा लगे रा. अपने अपन आंखी उघरही कहिके चलन झन बना. रद्दा चिन्हा सबो सकम के तोला जाने बर परही अउ चतवार के रेंगे ला परही. अइसे मन ला बना के प्रार्थना तोर तीर मा बइठे सुख पावय.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज