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छत्तीसगढ़ मं बिनास अउ आफत के धुंआधार बारिस

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जेती देखव तेती पानीच पानी,सबो कोती हाहाकार मचे हे. अइसन तो कभू नइ बरसे रिहिस हे तेन हा एसो का ला कहिबे परलय मचा दे हें| बिलासपुर सरगुजा संभाग मं धुंआधार पानी के बरसे ले अरपा महानदी समेत कतको नदिया नरवा उफनत हे.

  • News18Hindi
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जुन्ना मनखे जउन मन अभी जीयत होहीं तउन मन बने ढंग ले बता सकत हें के सन 1960-65 के पहिली कइसन बारिस होवत रिहिस हे| ओ समे नदिया, नरवा मं आज सही पूल अउ पुलिया नइ रिहिस हे| कच्चा रपटा रहाय| पानी गिरय तहां ले सब चउपट हो जाय| आवागमन के जतका साधन रहाय ओमन ठप पड़ जाय| छत्तीसगढ़ के राजिम मं ओ बखत सब ले पहिली अउ बड़े जनिक पूल बनिस| अतेक पानी गिरय ते पूल ला छुए ले धर लय| पंद्रह बीस-बीस दिन के झड़ी देखे हें ओ समे के मनखे हा| काला पानी भुगते कस कर दय मुसलाधार बारिस| घर ले निकलना मुसकिल हो जाय| कोनो बीमार पर जाय तब ओला इलाज कराय बर शहर ले जाना पहाड़ कस हो जाय| अतेक संकट, दुःख अउ करलेस भोगें हें ओ समे के मनखे| तब के बरसात अउ अभी के मं जमीन आसमान के अंतर आगे हे| अब तो चार आना बरसगे ते बहुत होगे|

अब एसो के हाल ला देख लौ, धान बोवागे, बियासी होगे, रोपा लग गे| शुरू मं गिरिस पानी तब किसान भरोसा मं रिहिस फेर अइसे आंखी निटोरिस ते किसान अउ सरकार के तेरवा सुखाय ले धर लिस| किसान मन हड़बड़इन तब सरकार हा सुखा परभावित खेत के जांच बर टीम बनाइस | जइसे गांव-गांव मं जांच टीम पहुंचिस आकाश मं बादर फटे ले धर लिस| जो पानी दमोरना शुरू करिस, धुंआधार गिरिस ते किसान अउ सरकार देखते रहिगें, चकरागे माथा| सब कोती उर्रा पुर्रा| नदिया, नरवा, तरिया, ढोड़गा बांधा खेत खार बक-बकागे| गांव, शहर पानी-पानी होगे| बाढ़ आगे| कतको के फसल नुकसान होगे, बोहागे, घर दुआर गिरगे, भोसकगे| कतको मनखे आंधी, पानी अउ बिजली के कड़कड़इ मं झझक के मरगे| बहुत साल बाद अइसन पानी गिरिस हे, तीन चार दिन के झड़ी देखे ले मिलिस|

सावन भादों के बरसा होवत हे, जेती देखौ तेती पानी-पानी| नदिया, नरवा, तालाब, बांधा, खेत-खार मं उर्रा पुर्रा पानी बोहावत हे, घर दुआर गली सड़क माड़ी भर ले उपर पानी| कतको के घर दुआर कोठा बियारा ला ये पानी हा बरबाद कर दिस| कतको झन अचानक मकान झोपड़ी गिरे ले ओमा फस के मरगे| सरकार नुकसान के आकलन करत हे|

हाहाकार मचा दे हे एसो के बरसा| अइसन तो कभू नइ बरसे रिहिस हे तेन हा एसो का ला कहिबे परलय मचा दे हें| बिलासपुर सरगुजा संभाग मं धुंआधार पानी के बरसे ले अरपा महानदी समेत कतको नदिया नरवा उफनत हे| बिलासपुर अउ जांजगीर के कइ इलाका पानी मं बुड़गे हे| गौरेला, पेंड्रा अउ मरवाही जिला मं बारिस व अरपा-भैसाझर बैराज परियोजना के गेट जादा पानी गिरे हे तेकर सेती अरपा नदी के जल स्तर बाढ़गे हे|

अइसने कस हाल अभी के बारिस हा बिलासपुर मं घला रमझाझर मचा दे हे| का ला का कहिबे चारो मुड़ा करलई मचे हे| भारी बरसा के सेती बिलासपुर के पांच कोरी(एक सौ) गांव मं बिजली बंद हे| बिलासपुर मं

सनीचरी बाजार अउ चांटीडीह ला जोड़ने वाला रपटा के बुड़े ले आवागमन बंद होगे हे| कोनचरा-पेंड्रा मार्ग मेर जउन पूल हे तेमा तीन फीट उपर पानी बोहावत हे| इही हाल कोनचरा अउ छतउना मार्ग के हे| इहां कतको झन के घर मं पानी भरगे हे| ओमन ला रात जागरन करे ले परत हे| रायगढ़ के तो हाल बेहाल हे| दू दिन सरलग पानी गिरिस तेकर सेती चंद्रपुर बरमकेला मार्ग मेर के लात नाला बुड़गे हे|
कोरबा जिला मं सरलग पानी गिरे के सेती दर्री बराज के जल स्तर बढ़गे हे| खतरा ले बचे खातिर बराज के गेट ला खोल दे गे हे| ओ पानी ला हसदो नदी मं छोड़े गे हे| सरगुजा जिला मं तो सरलग पानी बरसते हबय| इहां बारिस हा हाहाकार मचा दे हे| कांकेर जिला मं तो तबाही मचा दे हे| रायपुर, जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 मं चरामा करा भरकोला घाट हे तिहां भूइसखलन शुरू हो गे हे| प्रशासन कोनो अनहोनी झन हो जाय ओला देख के ओ रसदा ला बंद करवाइस| इहां सरलग बरसा होवत हे|

राजधानी रायपुर तो पानी के मारे चोरो-बोरो हो गे हे| तीन दिन के सरलग बरसइ मं का गांव कहिबे का राजधानी, एकमई होगे रिहिस हे| खारून, शिवनाथ, महानदी, सोढुर, पइरी खतरा के निसान ले उपर बोहाय ले धर ले रिहिस हे| गंगरेल सिकासेर तांदूला खरखरा अउ पइरी बांध लबा-लब भर गे| अतेक पानी होगे बांध मं ते गेट खोले ला परगे|

अभी के तीन-चार दिन के बरसा ला देख के सब किसान बइपारी नेता अउ प्रशासन सब हड़बड़ा गे रिहिन| सब के मुंह ले इही निकलत रिहिस हे के अइसन पानी दसन साल बाद गिरे हे| सब के काम काज बंद होगे| झड़ी देखे बर सब तरसते रिहिन, एसो देखा दिस बारिस का होथे अउ झड़ी का ला का कहिथे| कोनो मनखे मन से चरचा करे मं ए बात सुने ले आइस यहा झाड़ी तो ओकर मन के समे तो होय नइ हे| ओकर मन के पाहरो मं तो आठ-आठ, दस-दस दिन के झड़ी परय तेमा कोनो मनखे लइका सियान घर ले बाहिर नइ निकल सकत रिहिन हे| खेत-खार, नदिया-नरवा, बाध सब तलातल, उर्रा पुर्रा हो जात रिहिस हे| कहात लगाय ओ समे के बरसा| जम्मो फसल चउपट हो जात रिहिन हे| कतको जगह डोंगा लहुट जाय, बोहा जाय मनखे|

ये स्तम्भ के लेखक ला घला सुरता आवत हे के ओ समे के बारिस असन के मुकाबला मं अब तो चार आना बारिस नइ होवय| छोटेपन मं नदिया-नरवा मं बाढ़ आवय तब ओला देखे ले जान| अकबका जान चारो मुड़ा पानी ला देखके| सोचन अतेक पानी कहां ले आ जथे, का आकाश मं कोनो सागर हे तिहां ले भगवान हा पानी बरसाथे| लइकापन के दिमाग अब सुरता आथे तब हांसी आथे| इही मौसम मं मछरी पकड़इया मन जाल धर धर के नदिया-नरवा अउ तरिया कोती दउड़ जाय| बड़े-बड़े मछरी, रोहा, पड़हीना, भुंडा, मोंगरी पकड़-पकड़ के लानय| अब वइसना बारिस नंदागे, न अब कभू वइसन नदी नाला मं पूरा देखे ले मिलय| जइसन बारिस, झड़ी अउ बाढ़ अपन समे मं देखे हन वइसन अब कहां? कोंन कउंआ, चील अउ गिधवा मन धर के लेगे ओ बारिस ला, ते कोनो राक्षस मन ओकर अपहरन करके लेगे हें अउ अपन अशोक वाटिका मं कैद करके राख ले हे तेला उपर वाले मालिक हा जानय? फेर हां अब वइसन बारिस देखे ले बीस-पच्चीस साल ले उपर होगे हे, होबे नइ करत हे|

अभी एसो सावन भादों मं कोन कोती ले वरून देवता के दया होइस हे, लगथे किसान मन सावन मं बने हकन के ओला चीला रोटी खवइन होही| तेकर से खुश होके अतेक बरस दिस ते सब के होस ठिकाना मं आगे| अइसन बारिस छत्तीसगढ़ भर मं नहीं, देश के चारों कोना मं झूम-झूम के बरसत हे|

(परमानंद वर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं. लेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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