टोटकोर्रो काबर करे अनविस्वासी

टोटकोर्रो काबर करे अनविस्वासी

टोटकोर्रो काबर करे अनविस्वासी

सबो जगा देखले देने वाला के हाथ सब झन ला पुरो डारथे. हमर धरम मा दान के अबड़ महत्तम हे. कभू थोरको अइसे नइ सोचना चाही के पुरही के नइ पुरही. पुरोती चले के चलन हावय फेर ओतके बेर संगे संग अनविस्वासी के काया घलो अपन बेवहार मा आने ताने कर डारथे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 1:31 AM IST
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मीर अली मीर

देहे अउ लेहे दुनों मा अपार स्रद्धा होना जरूरी हावय. सबो जगा देखले देने वाला के हाथ सब झन ला पुरो डारथे. हमर धरम मा दान के अबड़ महत्तम हे. कभू थोरको अइसे नइ सोचना चाही के पुरही के नइ पुरही. पुरोती चले के चलन हावय फेर ओतके बेर संगे संग अनविस्वासी के काया घलो अपन बेवहार मा आने ताने कर डारथे. एकरे सेती देखव कतको महान आत्मा मन लांघन रहि जाहीं फेर दुवारी मा याचक ला लांघन नइ जावन देंवय. इही हमर संस्कार के रद्दा ला चतवारत आवत हावय अउ टोटकोर्रो करइया थो किन कमती मा पुरोजावय अइसे झन सोचय.

अवइया के झोली भरदे दाता

जेला फुरगेहे तेला ते जानडारबे काबर के ओखर सदगुण ओकर संग ला चाह के भी नइ छोड़य. बड़ेप्फजर ले अपन स्नान पूजा मा अराध्य देव के असीस ला अपन जिवका के अधार मानथे. जइसे तइसे करके जोड़ तंगाड़ के कोनो ललियागे तेन ललियाई नोहो. बाहिर अउ भीतर मा का चलत होही तेला ओही जानही. दू नम्बरी के मन सबो जगा भागत रइथे. चौबीसो घंटा ओला एकेच्च बात पेरथे के कइसे करके का कर डारंव बस हमनला अतकेच ले बांचना हे काबर के देने वाला दाता सबो के चिंता मा खटावत रइथे. सबो जगा हावय अउ बिसवास राखव जेन होही तेन बनेच होही. आने वाला समय सबो झन के अगोरा मा बइठे हावय. समय कहूं मिलगे फेर झनपूछ तोर संग ला छोड़बेच नइ करय. तोर सुख समृद्धि मा समाज के हित सबसे उप्पर राहय. झोली भरतेच राहय.
दतके - दतके मा कतका हो जथे

सबो अंगरी बरोबर नइ होवय फेर सकेलव अउ सबो के मुड़ी ला एके जगा लानबे त बरोबर दिखे लागथे. उप्पर डाहर ईश्वर के देखई अइसनेच होही. गांव, गली , घर , बयपार ला सबो जानथे. सकेलत धरत बेरा घलाव सुरता के सुतरी ला लमावत चलना चाही. याचक के भूमिका मा कोन हे , कतका झन हे तेला चाह के भी झन गनती करव. गनती अपन काम ला खुदे नइ कर सकय. ओकरो पारी आथे अउ वोहू सोचे बर लग जाथे के कोन मेरन ले सुरु करंव. गिनती अगुवागे हावय अउ हमन पछुवागे हावन. खरकत पूंजी ला ते कइसनो कर डर ओला दुबारा सकेलना बहुत कठिन होथे. धन अउ मान ला बचत करत करत जिनगी मा चलना चाही. चार पइसा सबो दिन हाथ मा राहय. बउरे के बेरा आठो काल बारो महिना बिन फोकट के ताय अइसे बिचार नइ आना चाही. जेला जरूरत हे तेला देवत जावव. दतके - दतके मा कतको झन घर मा दू जुंवर के रोटी सकलाहिच.

बांटे ले धन बाढ़थे



धन अउ जन बस अतकेच ताय. सबो जीव अपन समे मा काम करत आवत हें. समे पायके ओला भंजाए के कोसिस मा कोनो झन राहय. तइहा ले चलत आवत हे तेखर सुरता ला राखना जरूरी हे. रद्दा मा कपाट नइ राहय न कोनो राचर बांध सकंय. राचर ला बुलकत कतको झन ला देखे होहू फेर उतके बेर ओखर चेहरा के भाव हा पढ़े के लाइक रइथे. भाव पायके बुलकई मा डर समाए रइथे.धीर लगाके थीर बांह लगाके रेंगत - रेंगत कतको योजन ला पार करे जा सकत हे. तें नहीं त तोर सेती कतको तोर आने वाला पीढ़ी रइही. पीढ़ी के संस्कार हमर थाथी हरय. बांटे ते तोर बांटा नोहय तोला जरिया बनाके राखे गेहे. ते नइ रहिबे तभो तोर नाम चलही. फेर टोटकोर्रो झन होवय अतके खियाल होना चाही.

( डिसक्लेमर - लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं और ये उनके अपने विचार हैं.)
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