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छत्तीसगढ़ी विशेष : छत्तीसगढ़ी कइसे बनही राजकाज के भाखा?

छत्तीसगढ़ी देवनागरी लिपि म लिखे जथे. एला सीखना थोरकुन प्रयास से संभव हे.
छत्तीसगढ़ी देवनागरी लिपि म लिखे जथे. एला सीखना थोरकुन प्रयास से संभव हे.

छत्तीसगढ़ विधान सभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत ह प्रदेश के मुख्यमंत्री ल छत्तीसगढ़ी ल संविधान के आठवीं अनुसूची म शामिल कराय बर कोशिश करे खातिर अउ छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग अध्यक्ष नियुक्त करे बर चिट्ठी लिखे हे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 5:05 PM IST
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नवम्बर सन 2000 म छ्त्तीसगढ़ देश के 26 वाँ राज्य बनिस. नवा राज्य बने से जनता नवा-नवा सपना देखिस. नवा-नवा सपना पोंगा छोड़ींन. सबे क्षेत्र म विकास बर प्रयास शुरू होइस. 28 नवम्बर 2007 म छ्त्तीसगढ़ विधानसभा म सर्वसम्मति से छत्तीसगढ़ राजभाषा (संशोधन) विधेयक 2007 पास होइस. इहाँ के साहित्यकार मन छत्तीसगढ़ी साहित्य ल समृद्ध करे बर लेखन करत हें. बहुत अकन बुता छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग करे हे फेर अउ काम करे के जरूवत हे. छत्तीसगढ़ी बर पूरा समर्पण भाव होही तभे ठोस बुता दिखही. छत्तीसगढ़ विधान सभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत ह प्रदेश के मुख्यमंत्री ल छत्तीसगढ़ी ल संविधान के आठवीं अनुसूची म शामिल कराय बर कोशिश करे खातिर अउ छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग अध्यक्ष नियुक्त करे बर चिट्ठी लिखे हे. उन यहू लिखे हे के आयोग म अध्यक्ष नियुक्त नइ करे गे हे तेखर सेती छत्तीसगढ़ी राजभाषा के उत्थान के काम विशेष रूप से प्रभावित होवत हे. छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मन के किताब के प्रकाशन नइ हो पात हे. साहित्यकार अपन रचना प्रकिया ल गति नइ दे पावत हें. छत्तीसगढ़ी संस्कृति के विकास म विश्वास करइया मुख्यमंत्री भूपेश बघेलजी अब महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी के विकास डाहर जरूर ठसलगहा धियान देही अइसे जन-विश्वास हे.

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विकास-यात्रा
राजभाषा छत्तीसगढ़ी अपन विकास यात्रा म हे. छत्तीसगढ़ी देवनागरी लिपि म लिखे जथे. एला सीखना थोरकुन प्रयास से संभव हे. शब्द भंडार लगातार बढ़त हे. एखर अपन व्याकरण हे. भाखा म सम्प्रेषण-शक्ति हे. भाखा के विकास अचानक नइ होय. सब के सहयोग से एखर गियान कोठी लबालब हो सकत हे. हम अपन महतारी के मान-सम्मान जइसे करथन वइसने मान सम्मान छत्तीसगढ़ी भाखा के जन-जन म होना चाही. छत्तीसगढ़ी बोल-चाल के भाखा होय. निच्चट सिकुड़े सोच ल तियागे बर लागही. उदार हो के जनता के जरूवत के हिसाब से भाषा के लेखन हो. हिंदी, अंगरेजी या अन्य भाखा के शब्दावली के प्रयोग करे से यदि छत्तीसगढ़ी के सम्प्रेषण-शक्ति बाढ़त हे त एखर सुवागत करना चाही. शब्द के मूल भाव पाठक तक पहुंचना चाही. अति अक्खड़ता भाखा के ताकत ल कमजोर कर सकत हे. हमर बोलचाल सब जगा छत्तीसगढ़ी म हो. सरकारी अउ गैर सरकारी सबे स्तर म छत्तीसगढ़ी म पढ्ना-लिखना होय. महतारी पूज्य अउ वन्दनीया हे. छत्तीसगढ़ी राजभाषा ल राजकीय कामकाज के भाषा बनाय बर संकल्पित होय बर परही. ओखर बर वातावरण तियार करना जरूरी हे. छत्तीसगढ़ी ल राज-काज के (राजकीय) भाखा बनाय के दिशा म अखिल भारतीय प्रशासनिक शब्दकोश (अंगरेजी-छ्त्तीसगढ़ी भाग-2) विधान सभा द्वारा संकलित अउ छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग द्वारा जाँच-परख कर के छपवाय गे हे.
शासन के छत्तीसगढ़ी म कार्यकलाप के आधार भूमि


छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव देवेन्द्र वर्मा अपने संदेश म लिखे है-‘प्रत्येक लोक भाषा जब राजभाषा बनती है तो उसके समक्ष यह यक्ष प्रश्न होता है कि वह समय के साथ अपने आप को कितनी शीघ्रता से परिवर्तित व परिमार्जित करती है? अन्य भाषा के शब्दों को सुविधा की द्रष्टि से किस सीमा तक आत्मसात करती है. छत्तीसगढ़ी भाषा के क्षेत्र विशेष में शब्दों के उच्चारण में भिन्नता और हिंदी के शब्दों के उपयोग की अधिकता दोनों ही छत्तीसगढ़ी भाषा को मानक भाषा बनाने की राह में बडी चुनौती है. अगली कड़ी में उन्होंने लिखा है-‘ अखिल भारतीय प्रशासनिक शब्दकोश में छत्तीसगढ़ी शब्दों को समाविष्ट करने की आवश्यकता होना महसूस करते हुए हमारा यह प्रयास है कि छत्तीसगढ़ी भाषा के मूल शब्दों के साथ साथ अन्य भाषाओं के शब्दों को उच्चारण के आधार पर लिपिबद्ध कर छत्तीसगढ़ी भाषा के शब्द भंडार को विस्तृत कर आधुनिकृत स्वरूप दिया जाय.’उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि यह शब्दकोश छत्तीसगढ़ी भाषा को शासन के कार्यकलाप में प्रयोग के आधार भूमि का कार्य करेगा. इसी शब्दकोश में छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग-रायपुर के सचिव पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे ह लिखे हे-‘छत्तीसगढ़ी में हिंदी,अंगरेजी, अवधि, भोजपुरी, ब्रज की भाषाएँ एवं छत्तीसगढ़ की बोलियों का समावेश है. छत्तीसगढ़ी को महासागर बनाने में इन सभी का अवदान है.’ सार बात इही हे के सरकार हर अपन स्तर के बुता ल कुछ करे हे. हम छत्तीसगढ़ म अपन महतारी-भाखा के प्रयोग करे बर ढेरियाबो त दूसर कोनो आ के हमर भाषा के मान ल नइ बढ़ाही.

लोक-जागरण
सामान्य रूप से छत्तीसगढ़ी ल पढ़े-लिखे म दिक्कत आथे जरूर फेर अतको दिक्कत नइ होय के मैदान छोड़ के भागे जाय. हमर अपन संकल्प बेहद जरूरी हे. सरकार खुद के बलबुता ले कोनो भाषा ल उन्नत नइ कर सके. एखर बर लोक जागरण जरूरी हे. ये बुता बर साहित्यकार अउ जनता के जवाबदारी बाढ़ जथे. एखर सेती जेन जिहाँ हें उन उहें ले शपथपूर्वक छत्तीसगढ़ी अपन महतारी भाखा के सेवा कर सकत हे. फेर चाहे मजदूर हो, किसान हो, चाहे कोनो सरकारी दफ्तर वाले हो या अन्य जगह काम करइया मनखे छत्तीसगढ़ी के विकास बरसब ल अइसना मिहनत करना जरूरी हे. भाखा सब ल जोड़े-जुड़े अउ सांस्कृतिक विकास के ताकतवर माध्यम होथे. स्कूल म एक-दु पाठ छत्तीसगढ़ी के जोड़े गे हे. हो. एमा छत्तीसगढ़ म प्रकृति के सुन्दरता के अलावा लोक-जीवन के प्रेरक संदेश अउ छत्तीसगढ़ी साहित्य म लोक-चेतना के स्वर हे.

लोक-जीवन के ख़ूबसूरती
ऋतू परिवर्तन के संगे-संग लोक-जीवन के विविध रूप अउ जीवन के ख़ूबसूरती के दर्शन होथे. जीवन के सास्कृतिक द्रश्य आगू-आगू चलथे. इहाँ ‘अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार...के छत्तीसगढ़ महतारी के वन्दना ल सुन के श्रोता आनंद-विभोर हो जथे. वुहें छत्तीसगढ़ के कोठी ले धान-धन ले छाती फूल जथे. प्राकृतिक संपदा आत्म-विश्वास जगाथे. जीवन सिंगार करथे. खेत के लहलहावत फसल, लोक-जीवन म लोकगीत के धुन गुनगुनावत हर संघर्ष ल सरल बना देथे. छेरछेरा, जसगीत, सुआ-गीत, डंडा-गीत, जंवारा-गीत, भोजली, करमा, ददरिया, पंथी-गीत, नाचा-गीत, राउत-नाचा के दोहा, फाग-गीत, बांस-गीत, देवारी-गीत, गौरा-गीत, बिहाव-गीत, लोक-गीत, लोक-नाटय आदि जीवन ल विविधता के ख़ूबसूरती म बांधे रखथे. खान-पान के अलग ठाठ होथे. छ्त्तीसगढ़ी साहित्य लिखइयाछत्तीसगढ़ी मन अउ गतिमान हों. सरकारी स्तर म उन ल यथोचित सहयोग मिले अउ छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी के चारों खुंट विकास के धरातल बने. भाखा प्रयोग से सतत गतिशील होथे. ओखर भाव नदिया के धार बरोबर गतिशील होथे. आवव हम सब मिलके छत्तीसगढ़ी भखा के बने सेवा करन ल. जेखर ले छत्तीसगढ़ महतारी के माथा गरब से अउ उंच होय. (लेखक साहित्यकार हैें और ये उनके निजी विचार हैं.)
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