होम /न्यूज /chhattisgarhi /छत्तीसगढ़ी म पढ़व: अभिच्चे लान दे कहिबे त कहां ले लान्हू तोर बर रुपिया

छत्तीसगढ़ी म पढ़व: अभिच्चे लान दे कहिबे त कहां ले लान्हू तोर बर रुपिया

.

.

अभी काय चलत हे कहिबे त कोनो बताए नइ सकय. मंहगाई के जमाना मा चारों मुड़ा कांव- कांव होवत हे. चिंता हा चिता के राख बरोबर ...अधिक पढ़ें

    माली हालत ला जानके पदोथे का करे जाए… कर्ज मा बुड़े ला बाँचे के सेती अपनेच घर मा मुड़ ला खुसेरे खुसेरे जीना परत हे. भूख पियास ला कोनो रोके नइ सकय. अऊ रोकी लेबे ते के दिन. अइसे कहिके समझाना मां बाप अऊ सियान मन के आसरा मा चलना परही. कोनो मेरन कमाए खाए बर निकले के जमाना गय. अपने घर मा रहिके बनी भूती, बर बयपार करत चलाव बने रहय. तहूं ला संग मा चलना परही. तभे बनही.

    कोनो कोनो दिन परसाद पाए असन हो जाथे
    बिता भरके के पेट हा पीठ कोती छुए ला धर लेहे. एक लांघन दू फरलांग. चलत हे. परसाद झोंके असन हाथ ला लमाना परथे. चलव एहू दिन बहुरही. मन मसक्कत करे मा सबो हो सकत हे. थोरेच थोर मा के दिन चलही होथे दिन बादर असन अवई जवई. अभी साहूकार चलाव कर दिही काबर के ओला मालूम हे कमा कमा के छूट डारबो.

    का बुता ला सकेलबे तेला तिहीं जान
    काम अतका हे के करइया नइ मिलय. काड़ी कचरा बीन बीन के चार पैसा बनाने वाला कोती देखबे त सोग घलो लागथे फेर भीख मांगे ले ते अच्छा हे कहिके मन ला संतोष हो जथे. काम करने वाला दिन निकलिस तहां तियारी मा लग जाथे. अपन अपन रुचि अउ चिभिक के हिसाब मा काम अबड़ मिलथे. कोनो डाहर ला धरले तोला चार पइसा देने वाला मिल जाही. दे मेरन के ला ओ मेरन करत करत तो दिन पहा जाही. काम बुता ला बने सकेल के हरहिंसा अपन घर मा थके मांदे आबे त तोर अगोरा मा रद्दा जोहइया के आंखी मा मया झलकही अतके तोर कमाई ए.

    Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarhi

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें