छत्‍तीसगढ़ी में पढ़ें: खबरीलाल गोबरदास अउ लालबुझक्कड के दोस्ती के किस्सा

सब्बो मितान गंभीर हो के अपन अपन घर लहूटीन .
सब्बो मितान गंभीर हो के अपन अपन घर लहूटीन .

खबरीलाल  गोठ के पटरी बदलिस किहिस – सत्ता म भागीदारी के बड़ महत्व हे! तहूँ खा, महूं खा! तहूँ खुश, महूं खुश. इही नवा मंतर हे. मेंहा रसगुल्ला खावत हों त तेंहा मोतीचूर के लड्डू खा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 3:55 PM IST
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बरीलाल गोबरदास अउ लालबुझक्कड के दोस्ती जिंदाबाद हे. ये मन जागरूक परानी आंय. इनकर पंचइती चलते रहिथे. देश–दुनिया के चिंता अउ-चिन्तन करना. इनकर बुता आय. जब मिल बइठथें तब बइठे– बइठे पगुरावत रहिथें. खबरीलाल हर खबर उपर गिद्ध-द्रष्टि रखथे. फेर गियान के अंजोर फेंकथे. खबरीलाल किहिस –‘छतीसगढ़ म कोरोना-काल अउ गोबर–काल दुनो संगे-संग चलत हे. कोरोना तेज गति से फइलत हे. सरकारजी के पछीना चुचवात हे. हठी किसम के महान जनता अभी घलो बेपरवाह हे!! नागरिक-कर्तव्य छू मंतर. नागरिक-कर्तव्य के चटनी पिसागे. व्यवस्था डोलगे. फड़फड़ावत हे.’

गोबरदास किहिस- ‘कोरोना टेस्ट के रफ्तार बाढे के खूब गोहार हे. कोरोना मरीज रोज बाढ़त हे. कखरो नंबर आगे त वाह वाह. नहीं त दुसर दिन आ. जांच होगे त परिणाम आय म समे लगत हे. देश अउ राज्य मकोरोना आंधी चलत हे. खबरीलाल किहिस – ‘हालत बहुत खराब हे सरकारी अउ निजी अस्पताल म ‘नो-बेड’ ‘नो-बेड’ सुनात हे. राज्य सरकार अकबकावत हे. अब कुछ न कुछ करे बर लागही. जनता सब देखत हे. कोरोना छोटे बड़े सब बर लिलों लिलों करत हे.’ लालबुझक्कड किहिस –‘रायपुर म कोविड -19 नवा रिकार्ड बनइस. एक कोरोना संक्रमित सात झन ल संक्रमित करत हे. इटली अउ अमेरिका पछ्वागे, उहाँ संक्रमण 5.6 ले जादा नइ बाढ़ीस. खबरीलाल झल्ला के किहिस ‘एमा सरकार ,प्रशासन अउ जनता के घोर लापरवाही के महिमा हे? अब पूर्ण लाकडाउन फेर शुरू होगे. बंद-बंद म समझ खुल जाय त बड़े बात होही. शहर –शहर /गाँव –गाँव म सरलग कोरोना संक्रमण बगरत हे.’



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लालबुझक्कड किहिस – ‘जब देश के दिगर राज्य पूरा खुलत हें तब छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दर जिला बंद होवत हे .केंद्र सरकार के एम्स वरदान हे. फेर कतेक ल सम्हाले? व्यवस्था ल खुदे वेंटीलेटर के जरूवत हवे. सरकारी दफ्तर म कोरोना के पाहरा हे. कामकाज महीनों ले ठप्प बरोबर जान लेव. कोरोना के डर म मंत्रालय/कार्यालय हांफत हे. देश के आधुनिक महापुरूष मन कथें महामारी के आपदा ल अवसर म बदले के अच्छा अवसर हे. जनता के चुने सरकार कोरोना मरीज मन के भार ल जिला कलेक्टर उप्पर छोड़ के खुश हें. जो करही कलेक्टर करही. अउ सत्ता दांत निपोरही. दांत निपोरे म महानता हे. गरीबदास किहिस-‘केंद्र सरकार लोकसभा के सबे सदस्य मन के तनखा के 30% रूपिया साल भर काटे के निर्णय लिस. लोकसभा सदस्य मन ल अपन क्षेत्र के विकास बर हर साल मिलइया पांच करोड़ रू. दू साल बर रोक दिस. केंद्र सरकार कोरोना आपदा म वोला खरचा करही.

गोबरदास दुखी मन ले किहिस –‘कोरोना (कोविड-19) के रोना रोवइया छतीसगढ़ सरकार के मंत्री /सत्ता पक्ष अउ विपक्ष के विधायक मन विधानसभा म अपन वेतन-भत्ता ल दोगुना (डबल) कर डरिन. जादू होगे. कोरोना–काल के आपदा अवसर म बदलगे. जनता सेवा के फल त मिलनाच चाही न. ये ह लोकतंत्र के चमत्कारआय के कोनो राजनीतिक दल एखर विरोध नइ करिन. विधानसभा म एक मत. इही जनता सेवा आय. जनता सरकारी अस्पताल के अव्यवस्था में व्यवस्था खोजत हें. जूनियर डाक्टर के मन म भारी असंतोस हे. स्वास्थ्य विभाग के संविदा करमचारी परमानेंट करे बर आन्दोलन करत हें. छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना संकट ले हट के अलग कदमताल करत हे. कोरोना के इलाज बर न कोई ठोस कार्य-योजना, न सही दिशा, न संकल्प, न कोई रणनीति बस जबानी जुगाली रिहिस. एके बुता हे करजा लेव सरकार चलाव. फेर करजा लेव सरकार चलाव .सरकार रेंगत, भागत दिखना चाही. घेरी–बेरी केंद्र सरकार ल चिट्ठी लिखो. आरोप लगाओ. घेरी–बेरी पइसा मांगो. जब उधारी ले ले के सरकार चलाना हे तब कोनो सरकार चला सकत हे.’

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खबरीलाल गोठ के पटरी बदलिस किहिस –‘सत्ता म भागीदारी के बड़ महत्व हे. तहूँ खा, महूं खा. तहूँ खुश, महूं खुश. इही नवा मंतर हे. मेंहा रसगुल्ला खावत हों त तेंहा मोतीचूर के लड्डू खा. मेंहा मोतीचूर के लड्डू खावत हों त तें करी लाडू खा. तेंहा करी लाडू खावत हस चिल्ला झन अउ तेंहां मुर्रा लाडू खा. वाह तें मुर्रा लाडू खावत हस. ले तेंहां  चाकलेट खा. मुहूँ मीठ होना चाही. अउ बस सरकार चलत हे.’ गोबरदास किहिस-‘अब सरकारजी मन किसान ल साधत हें. केंद्र –राज्य रस्सा खींच चलत हे. राजनीति के आँखी किसान ल देखत हे. किसान राजनीति ल देखत हे. गोधन न्याय योजना चलत हे. लालबुझक्कड अपन बात रखिस किहिस- ‘किसान गोबर म पइसा के दरसन करे के सुख पावत हें. गाय माता, बइला, भंइसा, बछरू, बछिया पठरू सरकारी सगा होगे हें. उनकर मान बाढगे हे. उन गोबर देवत छेल्ला घूम सकत हें. जानवर सडक म आराम कर सकत हें. नरवा, घुरूवा, बखरी देख के मन हरिया जाय त चारा चर सकत हें. शहरी पसु सडक म आराम करे बर सुतंत्र हें. उन ल रोके बर कोनो नियम काट नइ करे. ’सब्बो मितान गंभीर हो के अपन अपन घर लहूटीन .
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